Swasth Kaise Rahe

Swasth Kaise Rahe

स्वस्थ कैसे रहें?

व्यायाम और जीवनशैली

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स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करने के साथ-साथ अपनी जीवन शैली में थोड़ा बदलावा लाना भी जरूरी है। तभी आपको बेहतर परिणाम हासिल होंगे। उदाहरण के लिए आप व्यायाम तो बहुत करते हैं, लेकिन संतुलित आहार नहीं लेते या पूर्ण रूप से सो नहीं पाते या क्रोध अधिक करते हैं, तो व्यायाम करने का उतना लाभ आपको प्राप्त नहीं होगा, जितना कि होना चाहिए।

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Swasth Kaise Rahe

स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करने के साथ-साथ यदि आप निम्न बातों का ध्यान रखते हुए अपनी जीवन शैली बदल लेंगे तो आपको पूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है-
निंद्रा :
निंद्रा एक स्वस्थ शरीर की आवश्यकता है। दिन के 24 घण्टों में कम से कम रात को सात घण्टे सोने की आदत जरूर बनायें। गहरी व अच्छी नींद मनुष्य को दूसरे दिन के लिए तरोताजा रखती है। दिन में खाने के बाद कुछ देर लेटने या आराम करने की आदत भी पाचन क्रिया को सुचारू रखती है। एक भरपूर ‘शान्त नींद’ लेने वाला व्यक्ति शरीर से ही नहीं, मन से भी स्वस्थ व तरोताजा रहता है।

कठोर परिश्रम :
स्वस्थ रहने के लिए अपनी दिनचर्या में कुछ-न-कुछ कठोर परिश्रम करने की आदत जरूर बना लेनी चाहिए, ताकि माँसपेशियां मजबूत रहें। कुछ पसीना शरीर से बाहर आ सके ताकि त्वचा में भी निखार बना रहे।

सकारात्मक दृष्टिकोण :
स्वस्थ जीवन के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण भी आवश्यक पहलू है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ ‘मन’ का होना जरूरी है, क्योंकि मन यदि प्रसन्न है, तो जीवन जीने का उत्साह दोगुना हो जाता है। ‘सकारात्मक सोच’ मनुष्य को जीवन की बुराइयों से दूर रख अच्छाइयों के प्रति प्रेरित कर जीने की प्रेरणा देती है।

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हास्यासन :
दिन में एक बार खुलकर खिलखिला कर हंसने की आदत जरूर बनायें। हास्यासन से ‘पाचन-संस्थान’ का अच्छा व्यायाम हो जाता है, तो पाचन क्रिया सुचारू रूप से काम करने लगती है। मन के सारे विकार बाहर निकल जाते हैं, तो मन शान्त व सहज हो जाता है और चेहरे की माँसपेशियों में रक्त संचरण हो ‘दिव्य कान्ति’ चमकने लगता है।

Swasth Kaise Rahe

प्राणायाम करें :
प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है ‘प्राणों का आयाम करना’ यानी बढ़ाना। प्राणायाम से ‘श्वसन तंत्र’ निरोगी रहता है। रक्त का शुद्धिकरण ऑक्सीजन की आपूर्ति के कारण अच्छा हो जाता है एवं अंग-प्रत्यंग में रक्त का संचार तीव्र होता है, जिससे शरीर स्वस्थ व सक्रिय रहता है।

क्रोध का शमन :
स्वस्थ रहने के लिए क्रोध से बचें, क्योंकि क्रोध से मन अशान्त हो जाता है, शरीर कांपने लगता है। सुविचार भी नष्ट हो जाते हैं। शरीर में कई व्याधियां पनपने लगती हैं। ‘हाई ब्लड प्रेशर’, हार्ट अटैक, एसिडिटी, हाईपरटेंशन, अल्सर सभी क्रोध के कारण होते हैं। अतः क्रोध का परित्याग ही स्वास्थ्य का लक्षण है।

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