Sugar Me Kya Khaye Aur Kya Nahi khaye?

Sugar Me Kya Khaye Aur Kya Nahi khaye?

शुगर में क्या खायें और क्या नहीं खायें?

मधुमेह में भोजन का महत्व-

मधुमेह रोग की चिकित्सा में औषधियों से भी अधिक आवश्यक और महत्वशाली भोजन का सुधार है। इसलिए इस रोग में भोजन की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्रायः देखा गया है कि रोग के आरम्भ में और साधारण रोग में केवल भोजन का सुधार होना ही पर्याप्त होता है। चूंकि इस रोग में रक्कत में शूगर की अधिकता होती है, इसलिए ऐसे तमाम भोजन, जिनमें शूगर और निशास्ता अधिक होता है, को क्रमशः कम कर दिया जाये। क्योंकि यह शरीर में शूगर की मात्रा को बढ़ाकर रोग को बढ़ाने के कारण होता है। इस रोग में भोजन का सुधार बहुत महत्वशाली होता है और इसको ठीक-ठीक रूप में प्रयोग करने से योग घटाया जा सकता है। इसलिए चिकित्सकों के ज्ञान में वृद्धि के लिए भोजन के बारे में नीचे विस्तार से बताय जा रहा है।

आप यह आर्टिकल chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

पथ्य-अपथ्य :

Sugar Me Kya Khaye Aur Kya Nahi khaye?

रोटी- इस क्रम में सबसे पहले रोटी पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि रोटी के बिना गुजारा असंभव है। रोटियां आटे से बनाई जाती हैं और आटे में निशास्ते की मात्रा काफी होती है, इसलिए आटे से निशास्ता निकाल कर अर्थात् आटे के छानकर भूसी(चोकर) निकाल लिया जाये और चोकर को पीसकर इसकी रोटियां बनाकर खाई जायें या आधा चोकर और आधा आटा मिलाकर उसकी रोटी बनाकर रोगी को खाने का निर्देश दें।
डबल रोटी के टुकड़े काटकर आग पर इतना सेंके कि वह लाल हो जाये, क्योंकि जितनी डबल रोटी सेंकी जायेगी, उसका निशास्ता उतना जल जायेगा।
सूजी की भी खूब सेंकी हुई रोटियां हानि नहीं पहुंचाती है।

सब्जियाँ और साग- कद्दू, तुरई, टिण्डा, परवल, टमाटर, पालक, कुल्फे का साग, शलजम और मूली के पत्ते, गिलोय, मेथी और सोया का साग, हरा धनियाँ, सरसों का साग, चैलाई का साग और बथुआ का साग खुशी से प्रयोग किया जा सकता है।

माँस- बकरा, मुर्गी, तीतर, वला, बटेर और अन्य पक्षियों का माँस, मछली, अण्डे, रोहू मछली का यकृत, मक्खन, दही और छांछ बिना भय प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि उपरोक्त वस्तुओं में निशास्ता और शूगर के अंश बिल्कुल नहीं होते हैं। परन्तु दूध में निशास्ता और शक्कर के अंश अवश्य पाये जाते हैं। फिर भी इसके प्रयोग करने से कोई विशेष हानि नहीं होती है। बशर्ते कि उसे बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग न किया जाये। कलेजी(यकृत) में भी शक्कर के अंश पाये जाते हैं, लेकिन रोहू मछली की कलेजी कोई हानि नहीं पहुंचाती है।

Sugar Me Kya Khaye Aur Kya Nahi khaye?

फल- संतरा, खट्टा-मीठा सेब, खट्टा-मीठा अनार, लोकाट, आलुबुखारा, नींबू, खीरा, ककड़ी और जामुन प्रयोग किये जा सकते हैं।

यह भी पढ़ें- उच्च रक्तचाप

मेवे- बादाम की गिरी, पिस्ता, अखरोट की गिरी, काजू के बीजों की गिरी, चिलगोजा की गिरी दें।

पेय- पानी पीने से रोगी को न रोका जाये और न अधिक मात्रा में पानी पिया जाये। हां, साफ और शुद्ध पवित्र पानी पी सकते हैं। अधिक अच्छा तो यह होगा कि पानी को उबाल लिया जाये। इस रोग में छांछ का पानी बहुत लाभप्रद है। इससे प्यास कम लगती है और इसमें पोषक अंश भी बहुत होते हैं। चाय, कहवा और काॅफी बिना चीनी के प्रयोग कर सकते हैं। परन्तु मेरी राय में इनको न पीना ही अच्छा है। सोडा वाटर आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जा सकता है।

मिठाईयाँ- मीठी वस्तुओं में शक्कर की बजाय सैक्रीन और ताड़ की मिश्री प्रयोग की जा सकती है।

अपथ्य-

हर प्रकार की शुगर, खाँड और निशास्ता वाले भोजन जैसे- साबूदाना, चावल, अखरोट, मैदा, ज्वार, मक्की, मूँग, माँस, मसूर, सेम, चना, लोबिया, बाजरा, मटर, अरहर, सिंघाड़ा, शक्करकंद, आलू, गाजर, गोभी, चुकन्दर और तमाम जड़ वाली सब्जियाँ, कच्चे प्याज, शलजम, अंगूर, सेब, नाशपाती, आम, खरबूजा, खुरमानी, मुनक्का, किशमिश, अंजीर, खजूर, बेर, तरबूज, छुहारा और हर प्रकार की मिठाईयाँ जैसे- लड्डू, पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन, इमरती, बालूशाही और जलेबी इत्यादि तथा हर प्रकार के शर्बत, हलवे आदि बिल्कुल न खायें।
इनके अतिरिक्त नया अन्न, दही, कौंजी, सिरका, तेल, घी, गुड़, पेठा, ईख, ऊपर पत्य में जिस माँस का उल्लेख नहीं हुआ है, वे सब माँस, स्त्री-प्रसंग, दिन में सोना, रात में जागना, अधिक साइकिल की सवारी, बीड़ी, सिगरेट आदि धूम्रपान का प्रयोग एकदम वर्जित है। अधिक क्रोध करना, सूर्योदय तक देर से सोये रहना, हर समय आराम पूर्वक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना, थोड़ा भी(यथाशक्ति) परिश्रम, व्यायाम, आसन, प्रातः भ्रमण(घूमना) आदि में दिलचस्पी नहीं लेना, सुबह देर तक पाखाना नहीं जाना, मल-मूत्र के वेग को रोक कर रखना आदि बहुत हानिकारक और तन्दुरूस्ती को बिगाड़ने वाले हैं। मधुमेह के रोगी को इनसे बचाना परम अनिवार्य है।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.