Sugar Me Kya Khana Chahiye

Sugar Me Kya Khana Chahiye

शुगर में क्या खाना चाहिए?

रक्त में शक्कर की मात्रा (Sugar In Blood)
मधुमेह, डायबिटीज़, शुगर

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प्रत्येक मनुष्य के रक्त में स्वस्थ दशा में शुगर की एक निश्चित मात्रा होती है, जो प्रातःकाल बिना भोजन किये अलग होती है और भोजन करने पर उसमें एक निश्चित मात्रा में वृद्धि होती है, जो भिन्न-भिन्न लोगों में भिन्न होती है।

प्रातःकाल बिना भोजन किये फास्टिंग की दशा में एक स्वस्थ व्यक्ति के 100 मि.ली. रक्त में शक्कर की मात्रा 80 से 120 मि.ग्रा. तक या 0.08 से 0.12 प्रतिशत तक रहती है। भोजन के पश्चात् यही मात्रा 180 मि.ग्रा. से अधिक हो जाये तो उस व्यक्ति के मूत्र में शुगर का उत्सर्जन होने लगता है। अर्थात् शक्कर आने लगती है, इसी को प्रतिशत मात्रा में भी प्रकट कर सकते हैं, जो 0.18 प्रतिशत या अधिक कहलायेगी। यही वृक्क की शुगर को रोकने की क्षमता या रीनल थ्रैशोल्ड(Renal Threshold) भी कहलाता है। मूत्र में शक्कर आने को मधुमेह या डायबिटीज़ कहते हैं और इस विकार में रोगी के रक्त में शुगर की मात्रा 180 मि.ग्रा. प्रति 100 मि.ली. रक्त से भी अधिक रहती है। रीनल थ्रैशोल्ड किसी-किसी व्यक्ति में 0.180 प्रतिशत से कम भी हो सकता है और ऐसी दशा में उस रोगी के मूत्र में शक्कर आने लगती है।

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चिकित्सा व्यवस्था-

Sugar Me Kya Khana Chahiye

रक्त में शुगर की मात्रा मालूम करने के उपरान्त यदि मधुमेह या डायबिटीज़ का निदान हो जाता है, तो उसकी चिकित्सा व्यवस्था यथासंभव सिद्धान्त के अनुरूप होनी चाहिए। इस रोग में औषधियों के प्रयोग से भी अधिक भोजन के सुनियोजित ढंग से प्रयोग करने का महत्व अधिक होता है। यदि रक्त में शुगर की अधिक मात्रा का पता चले और मूत्र में भी शुगर आ रही है, तब भोजन के नियंत्रण के साथ मधुमेह में लाभकारी औषधियों का प्रयोग रोग की दशा के अनुसार कम या अधिक कराना चाहिए। रोगी के मूत्र की जाँच समय-समय पर करके रक्त में शुगर की बढ़ती-घटती संभावना का बराबर पता लगाते रहना चाहिए। मधुमेह के रोगी को जमीन के अंदर पैदा होने वाले भोजन पदार्थों का प्रयोग बिल्कुल ही नहीं छोड़ देना चाहिए और ना ही मीठे फल या दूसरे अन्य पदार्थों का प्रयोग मूलतः बंद कर देना चाहिए, बल्कि प्रत्येक प्रकार का भोजन विशेष नियंत्रण के साथ करना चाहिए।

लंबे अध्ययन तथा अनुभवों से यह सिद्ध हो चुका है कि मधुमेह का रोग एक बार आरम्भ हो जाने पर केवल नियन्त्रित ही रह सकता है। वह मूलतः समाप्त नहीं होता है। इसके अतिरिक्त अधिक समय तक अनियंत्रित मधुमेह रोग की दशा में रोगी के शरीर में अन्य कई प्रकार के विकार उत्पन्न होने लगते हैं, जैसे स्नायु संस्थान के विकार, नेत्र विकार, रक्तचाप का विकार तथा शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति का कमजोर हो जाना, जिससे शरीर में शीघ्र संक्रमण होने के साथ ही उससे छुटकारा बहुत देर से मिल पाता है।

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नोट- रक्त में सामान्य से अधिक ग्लूकोज़ हो जाये तो वह दशा ‘हाईपरग्लाइसीमिया’ कहलाती है। जबकि इन्सुलिन आदि औषधियों के आवश्यकता से अधिक प्रयोग करने पर रक्त में ग्लूकोज़ या शुगर की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है और वह दशा ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ कहलाती है। उपरोक्त प्रथम दशा में शुगर, रक्त निकल कर मूत्र द्वारा शरीर में बाहर बहने लगती है और यही स्थिति मधुमेह या डायबिटीज़ या ‘ग्लाइकोसूरिया’ कहलाती है। इन्सुलिन के अतिरिक्त जो औषधियाँ मधुमेह की चिकित्सा या नियंत्रण हेतु प्रयोग करायी जाती है वह भी हाइपोग्लासीमिक औषधियाँ कहलाती हैं और मुख द्वारा प्रयोग की जाती हैं।

जैसा कि पहले भी बताया गया है मधुमेह की चिकित्सा में भोजन का विशेष महत्व है, अतः मधुमेह रोग की चिकित्सा सिद्धान्त की तीनों दशाओं में भोजन नियंत्रण का अपना महत्व है। सर्वप्रथम भोजन पर नियंत्रण करके ही मधुमेह की चिकित्सा की जाती है। दूसरी प्रकार से इन्सुलिन तथा भोजन के प्रयोग और तीसरे मुख द्वारा हाइपोग्लाइसीमिक औषधियों तथा भोजन के प्रयोग द्वारा मधुमेह की चिकित्सा की जाती है।

मधुमेह के रोगी का भोजन निम्नलिखित कार्यक्रमानुसार हो सकता है-

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1. प्रातःकाल नाश्ता में एक अण्डा या 120 ग्राम लगभग दूध के साथ 60 ग्राम लगभग ब्रैड(2 से 4 स्लाईस) तथा चाय या काॅफी एक प्याला।

2. लगभग 10 बजे प्रातः 2 या 4(लगभग 30 ग्राम भार के) बिस्कुट और एक प्याला चाय या काॅफी, दूध इच्छानुसार डालकर लें।

3. दोपहर के भोजन में सब्जियों का सूप, लगभग 60 ग्राम माँस(माँसाहारी भोजन वाले), 120 ग्राम भार के उबले हुए आलू, लगभग 60 ग्राम भार के मटर तथा कच्चा सलाद, 120 ग्राम छिला हुआ सन्तरा, दूध या काॅफी ले सकते हैं।

4. दोपहर बाद लगभग 6 बजे 30 ग्राम भार के बिस्कुट के साथ इच्छानुसार दूध वाली चाय या काॅफी ले सकते हैं।

5. रात का भोजन लगभग 8 बजे माँसाहारी भोजन करने वालों के लिए मछली 90 ग्राम, टमाटर या अन्य सब्जियाँ जो जमीन के ऊपर पैदा होती हैं। मक्खन के साथ 60 ग्राम ब्रैड, लगभग 90 ग्राम केला और 60 ग्राम भार के लगभग आईसक्रीम ले सकते हैं। चाय या काॅफी दूध के साथ लें।

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6. सोने से पहले दूध इच्छानुसार, लगभग 20 ग्राम ब्रैड तथा मक्खन ले सकते हैं। दूध, चाय या काॅफी में शुगर का प्रयोग निषेध है और इसके स्थान पर सैक्रीन का प्रयोग कर सकते हैं।

उपरोक्त भोजन क्रम अनुसार निम्नलिखित औषधियाँ मुख द्वारा प्रयोग करायी जा सकती है और समय-समय पर मूत्र व रक्त की जाँच करनी भी आवश्यक होती है, जैसे- मूत्र की जाँच 15 दिन पश्चात् तथा रक्त की जाँच प्रत्येक मास करायी जा सकती है।

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