Sugar Ke Lakshan

Sugar Ke Lakshan

शुगर के लक्षण

मधुमेह : कारण व लक्षण

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हम आधुनिक युग में, रहन-सहन, आहार-विहार सब में पाश्चात्य संस्कृति का समावेश अधिक और भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। फास्ट फूड, गरिष्ठ भोजन, मिष्ठान का अधिक सेवन, मद्यपान, रासायनिक पेय पदार्थ, गुटका, पान-मसाला, ड्रग्स व व्यभिचार, ऐश-आराम की जिंदगी अथवा अत्यंत तनाव ग्रस्त रहना, परिश्रम व व्यायाम आदि नहीं करने से चयापचय संबंधी क्रिया सही ढंग से नहीं होने पर मधुमेह रोग(डायबिटीज़) उत्पन्न हो जाता है।

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मनुष्य के शरीर में मौजूद एक ग्रन्थि जिसे ‘क्लोम अग्न्याशय’ या ‘पैंक्रियाज’ कहते हैं। यह ग्रन्थि आमाशय के निचले भाग में होती है, जिससे एक नलिका निकल कर पक्वाशय में खुलती है तथा क्लोम में बने स्त्राव को भोजन में मिलाकर अन्न को पचाने में सहयोग देती है। इसके स्त्राव में तीन प्रकार के खमीर होते हैं जो क्रमशः प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा(चिकनाई) पर क्रिया कर उन्हें पचाने योग्य बनाते हैं।

प्रथम खमीर, ट्राइप्सीन प्रोटीन का पाचन कर इन्हें प्रोटीन ओसस तथा पेप्टोन के रूप में द्वितीय खमीर अमाइलेज हैं, जो कार्बोहाइड्रेट(चीनी, गुड़, मीठे पदार्थ आदि) को माल्टोज में परिवर्तित करता है। यही माल्टोज आंत्रिक लाईपेज भोजन में विद्यमान वसा(घी, तेल, चर्बी) को ग्लेसरीन तथा फैटी एसिड के रूप में परिवर्तित करता है।

क्लोम रस द्वारा पचाये गये प्रोटीन(माँस, दालें आदि) कार्बोहाइड्रेट तथा वसा भोजन का सार बनकर शरीर को पोषण देते हैं। इस ग्रन्थि से एक हार्मोन(क्रियाशील तत्त्व, रस) जो यहां बनकर रक्त में मिलता रहता है। इसे इंसुलिन कहते हैं। (क्लोम रस) यह रस मानव शरीर के लिए अत्यंत उपयोगी है। इंसुलिन के रक्त में उपस्थिति के कारण ही हमारे शरीर के पोषण(सेल), ग्लूकोज को आत्मसात करते हैं। इसी से आत्मसात हुआ ग्लूकोज शक्तिदाता बनता है। जब किसी भी कारण से क्लोम इंसुलिन नहीं बनता या निष्क्रिय हो जाता है तो इसका यह बहुमूल्य जीवन रक्षक क्रियाशील तत्व रक्त मेें मिलना बंद हो जाता है।

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प्रोटीन, वसा व कार्बोहाइड्रेट का पाचन भी कम हो जाता है और रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ती चली जाती है तथा शर्करा मूत्र के साथ बाहर निकलने लगती है। इसी को मधुमेह रोग कहते हैं। मधुमेह से बचने के लिए क्लोम, अग्न्याशय या पैंक्रियाज का स्वस्थ व सक्रिय रहना अति आवश्यक है।

मधुमेह के लक्षण-

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1. मधुमेह रोगी को बार-बार मूत्र आने लगता है।

2. प्यास अधिक लगती है।

3. भूख अधिक लगती है।

4. थकावट अधिक लगती है।

5. पसीना अधिक आता है।

6. पेशाब शहद की तरह आने लगता है।

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7. शरीर पर बार-बार फोड़ा होना।

8. शरीर पर चीटियाँ-सी रेंगना।

9. नज़ला, ज़ुकाम।

10. जीभ का खुरदरा होना।

11. त्वचा की चमक कम होना।

12. हथेली व पैरों के तलुवे पीले होना।

13. मूर्छा आना।

14. पेशाब के चीटियाँ लगना आदि-आदि लक्षण उपस्थित होते हैं।

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मधुमेह का सही उपचार नहीं होने पर वृक्क रोग, तन्त्रिका शोथ, ब्रेन हेमरेज होना, हृदय रोग, नेत्र विकृति, उच्च रक्तचाप, फेफड़ों की टी.बी., अंधापन, लकवा, गेंग्रीन, बेहोशी, शरीर पर फुन्सियाँ, मांस सूखकर शरीर पिंजर मात्र हो जाना।

इस प्रकार यह रोग चिरकारी, घातक तथा अनेक रोगों का प्रवर्तक है। इस रोग का उपचार अतिशीघ्र होना चाहिए। इससे मृत्यु तक भी हो सकती है।

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