Stan Badhane Ki Dawa

Stan Badhane Ki Dawa

स्तन बढ़ाने की दवा

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संसार की हर स्त्री की यह कामना रहती है कि उसका वक्षस्थल उभारयुक्त व माँसल हो और वह पुरूषों के आकर्षण का केन्द्र बनी रहे। स्तन सौंदर्य बना रहे, इसके लिए युवतियाँ ही नहीं, अपितु अधेड़ उम्र की स्त्रियों को भी ‘ब्यूटी पार्लर’ के चक्कर लगाते देखा जा सकता है।

स्तन सामान्य से छोटे हो जाना अथवा सामान्य से छोटे रह जाना भी एक रोग है। हर युवती चाहती है कि उसके स्तन भी उम्र के अनुसार विकसित हों, ताकि वह सम्पूर्ण नारी की भाँति दिख सके और स्त्री की परिकाष्ठा को पूरा कर सके। किन्तु अविकसित स्तन के कारण युवा हो चुकि युवतियों को शर्मिन्दगी का अहसास करना पड़ता है। उन्हें लगता है कि वह जवान होकर भी वह अन्य स्त्रियों से कमतर हैं। भले ही ऐसी स्त्रियाँ चेहरे से कितनी ही सुंदर व आकर्षक क्यों न हों, लेकिन पुरूषों की दृष्टि में उनका कोई मोल नहीं रहता। कुछ स्त्रियाँ या लड़कियों के वक्षस्थल युवावस्था आ जाने के बाद भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं। उनका उभार कितना कम होता है कि देखने पर छाती एकदम सपाट लगती है।

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यहाँ उल्लेखनीय है कि सपाट छाती वाली अथवा छोटे स्तनों वाली लड़कियों या स्त्रियों के पति अथवा अन्य पुरूष तो दूरी बना ही लेते हैं, साथ ही स्त्रियाँ या लड़कियाँ भी उनके नजदीक आना पसंद नहीं करतीं और पुरूषों की भाँति निंदा करती हैं।

इस रोग की शुरूआत क्योंकि युवावस्था आते-आते ही हो जाती है, इसलिए ऐसी लड़कियों की चिकित्सा इसी दौरान प्रारम्भ करने से लाभ की आशा की जा सकती है। इसके अलावा जिन लड़कियों या स्त्रियो के स्तन पहले तो उभारयुक्त व माँसल थे, लेकिन एकाएक किन्हीं कारणों से स्तन सिकुड़कर छोटे हो जाने पर चिकित्सा, शिकायत आने पर की जा सकती है।

युवा हो रही लड़कियों के मासिक चक्र में यदि अनियमितता अथवा कोई अन्य विकार हों, तो उसकी तुरन्त चिकित्सा व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा ऐसी लड़कियों को औषधिय उपचार के साथ-साथ आवश्यक व्यायाम तथा योगासनों का सहारा लेेने का भी निर्देश देना चाहिए। इससे आशातीत लाभ होता है।

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स्तन अविकसित रहने के प्रमुख कारण-

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1. शारीरिक कमज़ोरी, दुर्बलता, निर्बलता।

2. अत्यधिक दुबलापन

3. किसी प्रकार का कोई गर्भाशयिक रोग।

4. डिम्बवाहिनियों में किसी प्रकार का रोग हो जाना।

5. रक्त संबंधी किसी प्रकार का कोई रोग या विकार।

6. हारमोन्स से संबंधित किसी प्रकार की गड़बड़ी।

7. डिम्बाशय में किसी प्रकार का कोई रोग अथवा विकार।

8. स्तनों की रक्तवाहिनियों में किसी प्रकार की विकृति उत्पन्न हो जाना।

9. शरीर में खून की कमी हो जाना।

10. स्तनों में पोषण की कमी हो जाना।

11. पोषक आहार का अभाव।

12. खाया-पिया शरीर को न लगना।

13. मानसिक चिंता व गहरा तनाव लेना।

14. स्तनों में चर्बी की मात्रा घट जाना।

15. किसी प्रकार का शोक, सदमा, मानसिक आघात लग जाना।

16. लड़की की भीतरी जननेन्द्रिय में जन्म से ही किसी प्रकार की विकृति या खराबी उत्पन्न हो जाना।

अविकसित स्तनों को विकसित करने के देसी आयुर्वेदिक उपाय-

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1. कटेरी की जड़, अनार की जड़ और कन्दौरी को पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तन कठोर हो जाते हैं।

2. कमल के बीजों(कमल गट्टों) को पीसकर शक्कर मिलाकर दूध के साथ एक मास तक लेने से स्तन सख्त होकर निखर आते हैं।

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3. छरीला का लेप करने से शरीर के ढीले अंग कठोर हो जाते हैं। यदि स्तन भी ढीले हो गये हों, तो छरीला का लेप करने से स्तन कठोर हो जाते हैं।

4. झाऊ और अनार की छाल को बारीक पीसकर दूध में मिलाकर दिन में दो बार स्तनों पर लेप करने से ढीने स्तन कठोर हो जाते हैं।

5. लजालू(लाजवन्ती) और असगंध की जड़ को पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तनों का ढीलापन दूर होकर स्तन गोल और कठोर हो जाते हैं।

6. गोरखमुण्डी का पंचांग और लोंडी पीपर को समान मात्रा में सिल पर पीसकर लुगदी बना लें। इस लुगदी को पीपल की कलईदार कड़ाही में डालकर लुगदी की वजन से चैगुना काले तिलों का तेल और तेल से चैगुना पानी मिलाकर हल्की आंच पर पकायें। जब पानी जलकर मात्र तेल रह जाये, तो छान लें। इस तेल में रूई भिगोकर स्तनों पर बांधने और सूंघते रहने से ढीले स्तन कठोर हो जाते हैं।

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