Sar Dard Ki Dawa

Sar Dard Ki Dawa

सिरदर्द की दवा

Headache, Sar Dard Ki Dawa, Migraine Pain

शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जिसने होश तो संभाल लिया हो, लेकिन ‘सिरदर्द’ से परिचित नहीं हो। सिर में अव्यक्त वेदना ही सिरदर्द के रूप में जाना जाता है। यह कभी-कभार हो और स्वतः ठीक हो जाये, तो कोई चिंता की बात नहीं है। लेकिन कुछ लोग आये दिन ऐसे मिलते हैं, जिन्हें वर्षो से सिरदर्द की शिकायत रहती है। उनमें से भी कुछ ऐसे हैं, जिन्हें बराबर सिरदर्द रहता ही है, तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें प्रत्येक 2-4 सप्ताह बाद निश्चित रूप से सिरदर्द होता है। ये रोगी अलग-अलग होते हैं लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा की दृष्टि से चिकित्सा सबकी एक जैसी ही है, क्योंकि सिरदर्द का मूल कारण पाचन संस्थान में विकृति पैदा होना है।

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सिरदर्द दूर करने के उपाय-

Sar Dard Ki Dawa

1. जैसे कि ऊपर पहले बता दिया गया है कि सिरदर्द का मुख्य कारण पाचन संस्थान में विकार होना हो सकता है, अतः सर्वप्रथम ध्यान दें कि आप कब्ज़ के रोगी तो नहीं हैं। यदि ऐसा हो तो उसे दूर करें। कब्ज़ के शीर्षकानुसार निर्देशों का पालन करें।

2. तात्कालिक लाभ के लिए किसी औषधि का प्रयोग करें। इससे पीड़ा का शमन तो नहीं होता, मात्र पीड़ा अनुभव करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। बार-बार लेने से स्नायुतंत्र एवं पाचन संस्थान और अधिक दुष्प्रभाव से प्रभावित होते हैं।

3. स्थायी रूप से इस प्रकार के सिरदर्द को दूर करने के लिए जल चिकित्सा(Hydrotherapy) बहुत ही उपयोगी है, इसको करें।

4. चिकित्सा के प्रारम्भ में 2-3 दिन केवल तीन बार फल खायें और नित्य एनीमा लें। तीन दिन बाद चैथे दिन सवेरे फल, दोपहर को चोकर वाले आटे की रोटी और कुछ पकी और कच्ची तरकारियाँ खायें। शाम को फल या तरकारियाँ खायें। जब रोटी लेना प्रारम्भ करें तो सुबह-शाम कटिस्नान लेकर कुछ देर टहलें।

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5. टहलने के लिए इतनी दूर तक अवश्य टहले, जिससे वापस आते-आते थकान अनुभव हो।

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6. कटिस्नान प्रथम दिन 5 मिनट, फिर 1 मिनट बढ़ाते हुए 10 मिनट तक की अवधि बढ़ा लें। 10 दिन की अवधि पूरी हो जाने पर नित्य सुबह-शाम कटिस्नान के बदले मेहन स्नान करें। मेहन स्नान 10 मिनट से प्रारम्भ करके नित्य 1 मिनट बढ़ाते हुए 15 मिनट तक करें। मेहन स्नान प्रारम्भ करने के बाद नित्य शाम को भोजन के साथ-साथ गाय का कच्चा दूध आधा लीटर लेना प्रारम्भ करें। शाम को फल ही खायें, क्योंकि दूध के साथ तरकारियाँ की अपेक्षा फलों का संयोग अच्छा होता है। इस प्रकार 20 दिन के बाद 15-15 मिनट का मेहन स्नान सुबह-शाम लेना प्रारम्भ करें। इसे 30 दिन तक जारी रखें। यदि आवश्यकता प्रतीत हो तो मेहन स्नान को डेढ़-दो मास तक भी कर सकते हैं। इससे सिरदर्द दूर हो जायेगा।?

7. प्रति सप्ताह एनीमा लेने का क्रम जारी रखें।

8. व्यायाम या तेज धूप में लेटकर पसीना शरीर से अवश्य निकालें। धूप लेते समय सिर पर ठण्डे पानी में भीगा तौलिया अवश्य लपेट लें। पसीना आ जाने पर ठण्डे पानी से तुरन्त स्नान करके शरीर को साफ कर लें।

9. टहलने के समय गहरी सांस लें। सांस लेना और छोड़ना दोनों ही धीरे-धीरे करें। इस प्रक्रिया से मात्र सिरदर्द ही नहीं, शरीर के अन्य रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।

10. आँवलों का चूर्ण, घी, शक्कर के साथ नित्य प्रातः खाकर गाय का दूध पीने से सभी प्रकार का सिरदर्द ठीक हो जाता है।

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11. सूखे नारियल की गिरी और मिश्री मिलाकर सूर्योदय से पूर्व खाने से सिरदर्द दूर हो जाता है। यह सूर्यावर्त सिरदर्द में भी लाभदायक है। कुछ दिनों तक नियमित प्रयोग करें।

12. पित्तजनित सिरदर्द में नाशपाती के रस में शक्कर मिलाकर पीने से लाभ होता है।

13. एक मीठा सेब काटकर उस पर नमक छिड़क कर 15 दिन तक नित्य प्रातः चबाकर खाली पेट खाने से आशातीत लाभ होता है।

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