Safed Daag Ka Ilaj

Safed Daag Ka Ilaj

सफेद दाग का इलाज

श्वेत कुष्ठ, सफेद दाग

Leucoderma, Safed Daag, Leucoderma Treatment, Vitiligo

शरीर के विभिन्न भागों जैसे- चेहरा, होंठ, टाँग, हाथों पर पहले छोटे-छोटे सफेद दाग पड़ जाते हैं। परन्तु धीरे-धीरे ये फैलते जाते हैं, जिससे लोग उस मनुष्य से घृणा करने लग जाते हैं। सफेद दागों वाले चर्म को चुटकी से ऊपर उठाकर माँस से पृथक करके उसमें सुई चुभोकर देखें। यदि उसमें रक्त निकल आये तो चिकित्सा योग्य समझें। यदि पानी जैसा तरल निकले, तो असाध्य समझें। यदि दाग छोटे और कम हों तो रोग की चिकित्सा हो सकती है।

आप यह हिंदी लेख Chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

आयुर्वेदिक चिकित्सा-

Safed Daag Ka Ilaj

1. कत्था तथा आँवला दोनों 1-1 तोला प्राप्त करें। इन दोनों का काढ़ा बना लें। भली-भाँति जब पक जाये, तब उसमें एक तोला बावची के बीजों का चूर्ण डालकर रोगी को पीने का निर्देश दें।
इसमें शहद मिलाकर भी पिया जा सकता है।

2. सफेद फूल वाले अरण्ड पौधे की खोज करें। इस पौधे की जड़ को रविवार को लेकर आयें अैर दूध में घिसकर एक तोला पिलायें। श्वेत कुष्ठ का नाश हो जायेगा।

3. बावची बीज 200 ग्राम, हड़ताल 48 ग्राम, मनसिल, चीता की जड़ प्रत्येक 6-6 ग्राम। इन सबको गौमूत्र में पीसकर दागों पर दिन में 3 बार लेप करायें।

4. ब्राह्मी पंचांग, लहसुन, सेंधा नमक और चीतामूल प्रत्येक 12-12 ग्राम। इन सबको गौमूत्र के साथ पीसकर लेप करायें।

5. अपामार्ग भस्म 12 ग्राम को मनसिल 12 ग्राम में मिलाकर जल के साथ पीसकर दागों पर दिन में दो बार लेप करायें।

यह भी पढ़ें- मधुमेह का इलाज

6. कत्था और आँवला चूर्ण प्रत्येक 12-12 ग्राम का जल में 250 मि.लि. क्वाथ बनायें। जब 30 मि.लि. जल बच जाये, तो छानकर इसमें बावची चूर्ण 12 ग्राम मिलाकर ऐसी एक मात्रा सुबह-शाम श्वेत कुष्ठ से पीड़ित व्यक्ति को पिलायें। लाभ होगा।

7. बावची, पनवाड़ के बीज, अंजीर, चावसू समभाग पीस लें। 6 से 12 ग्राम औषधि रात को ढीली पोटल में बांधकर गर्म पानी में भिगो दें। सुबह के समय छानकर 40 दिन तक पिलायें और औषधि का बचा भाग दागों पर ज़ोर से मलत रहें।

8. बावची का चूर्ण प्रतिदिन रूग्ण त्वचा पर लगाने से लाभ होता है। बावची बीज महीन करके सरसों के तेल में मिलाकर लेप करायें।

Safed Daag Ka Ilaj

9. घी के पथ्य के साथ बावची चूर्ण 1-2 ग्राम पानी के साथ प्रतिदिन सेवन कराने से आशातीत लाभ होता है।

10. ताँबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से रक्त शुद्ध हो जाता है और श्वेत कुष्ठ का नाश हो जाता है।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.