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Rheumatism Ka Gharelu Ayurvedic Upchar

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आमवात(Rheumatism)-
परिचय-

आहार में हम जो कुछ खाते हैं, वे आमाशय में पहुंच कर जठराग्नि द्वारा अच्छी प्रकार पचकर ऐसा रस तैयार होता है कि वह सरलता से रक्त में मिलकर शरीर के 1-1 अंग और 1-1 कोशिका तक पहुंचता है। इसी से हमें शक्ति मिलती है और शरीर के अंगों का संचलान होता है।
जब खाया गया आहार अग्निमांद्य आदि के कारण ठीक से नहीं पचता है, तो रक्त में उचित ढंग से नहीं मिलता है। परिणामतः रक्त के साथ प्रत्येक कोशिका तक नहीं पहुंच कर आमाशय तथा शरीर के अन्य भागों में भी जमा होने लगता है। यही ‘आम’ है। यह जहां-जहां जमा होता है, असहनीय पीड़ा होती है। वायु कुपित होने की भाँति वात की भाँति इसलिए इसे ‘आमवात’ कहते हैं। इससे स्पष्ट है कि इसका मूल कारण मन्दाग्नि आदि पाचन विकार हैं।

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प्रमुख लक्षण-

कुपित आम और आमवात में त्रिक-स्थानों, संधियों में पीड़ा होती है और शरीर को पूर्णतः जकड़ लेता है। रोगी के लिए चलना-फिरना, अंगों को संचालित करना बहुत कठिन होता है। इस स्थिति को देखते ही यह आमवात का रोगी लगता है। इन लक्षणों के साथ-साथ अरूचि, प्यास, शरीर टूटना, आलस्य, भारीपन, ज्वर, पाचन विकार, अंगों का सूनापन, आक्रान्त भाग पर सूजन आदि कष्ट होते हैं। इसका मुख्य कारण संयोग विरूद्ध आहार और अनियमित, अस्वाभाविक दिनचर्या है।
सामान्यतः कमर, पीठ, हाथ, कन्धे, गुल्फ एवं संधियों से संकुचित करके सूजन हो जाती है। इसमें बिच्छू के डंक मारने जैसी पीड़ा होती है।

चिकित्सा सूत्र-

1. जैसा कि हम ‘परिचय’ के अन्तर्गत जान चुके हैं कि इस रोग का मूल कारण है ‘मन्दाग्नि’ पाचन विकार हैं। अतः पहले पाचन विकार को दूर करें।

2. लंघन(उपवास), स्वेदन(पसीना निकालना), विरेचन(जुलाब देकर पेट साफ करना) आदि चिकित्सा सूत्र को अपनायें।

3. उपवास के बाद अग्निदीपक, पाचक, तीक्ष्ण पदार्थ आदि आहार दें।

4. यदि पीड़ा हो तो पीड़ा को कम करने के लिए कपड़े की पोटली में बालू, रेत डालकर आग पर गर्म करके पीड़ा के स्थान पर सेंक करें।

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घरेलू योग-

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1. सोंठ और गोखरू का क्वाथ प्रतिदिन सुबह पीने से आमवात, गठिया, कमरदर्द आदि में लाभ होता है।

2. सोंठ का चूर्ण 10 ग्राम काँजी के साथ लेने से आमवात, गठिया ठीक हो जाता है।

3. सोंठ, काली मिर्च, बायविडंग, सेंधानमक का समभाग चूर्ण 5-5 ग्राम गर्म जल के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम लेने से आमवात ठीक हो जाता है। क्योंकि इसके सेवन से मन्दाग्नि ठीक हो जाता है और जठराग्नि की वृद्धि होती है।

4. पीपर का चूर्ण दशमूल के काढे़ में मिलाकर पीने से आमवात ठीक हो जाता है।

5. सोंठ और हरड़ का चूर्ण प्रतिदिन सेवन करने से आमवात ठीक हो जाता है।

Rheumatism Ka Gharelu Ayurvedic Upchar

6. सोंठ और गिलोय के काढ़े में पीपर का चूर्ण मिलाकर पीने से आम, आमवात, पेट दर्द, कमर की जकड़न तथा सूजन ठीक हो जाती है।

7. एरण्ड के बीज छिलके रहित दूध में पीसकर और दूध में उबाल कर प्रतिदिन रात को पीने से कमरदर्द, गृघ्रसी आदि ठीक हो जाती है।

8. प्रतिदिन रात को खजूर 250 ग्राम पानी में भिगो दें। सवेरे गर्म करके पीने से लाभ होता है। कुछ दिन तक नियमित प्रयोग करें।

उपरोक्त बताये गये योग वात और आमवात में उपयोगी हैं।

पथ्य-अपथ्य :

गैस जिससे बनती हो, वे आहार, गरिष्ठ भोजन और अधिक आराम आदि से बचें। कब्ज़कारक आहार भी न दें। कब्ज़ न होने दें। प्रतिदिन सुबह-शाम खुली हवा में टहलें लाभ होगा।

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