chetanherbal.com

Rakt Ki Samasya Ka Desi Ayurvedic Ilaj

रक्त की समस्या का देसी आयुर्वेदिक इलाज

रक्त वमन, रक्तपित्त
हेमोटाईसिस(Haemoptysis)

परिचय-

खाँसी और बलगम के साथ रक्त आना यक्ष्मा का लक्षण है। इसके साथ अन्य पूरक भी लक्षण होते हैं। लेकिना बिना यक्ष्मा के भी मुँह से रक्त की वमन आती है। यह रक्तपित्त का लक्षण है। रक्तपित्त में मुँह ही नहीं, शरीर के किसी भी भाग से रक्त का स्राव हो सकता है। मुँह, गुदा, लिंग, नाक, आँख यहां तक कि रोमकूप से भी रक्त आ सकता है। यदि रोग अधिक उग्र हा तो निम्न योग लाभदायक हैं..

आप यह हिंदी लेख chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

चिकित्सा-

chetanherbal.com

1. अर्जुन की छाल को रातभर जल में भिगो दें। सवेरे मल छानकर या उबाल कर इसका क्वाथ पीने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

2. दही के साथ आँवलों, आँवलों का चूर्ण या आँवलों का मुरब्बा खाने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

3. वृद्ध(अच्छी तरह पके हुए) गन्ने का रस कुछ दिन तक लगातार पीने से रक्तवमन(रक्तपित्त) ठीक हो जाता है।

4. गम्भारी का पका फल एक या दो नित्य खाने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

5. काँटा चैलाई(काँटाभाजी) को शहद के साथ अवलेह बनाकर नित्य चाटने से रक्तपित्त ठीक हो जाती है। यह योग अतिरजः, श्वेतप्रदर, सुज़ाक आदि में लाभप्रद है।

6. काठगूलर की जड़ को पीसकर कपड़छान करके उस चूर्ण को इसके पंचांग के स्वरस की तीन भावनायें देकर तैयार करना चाहिए। इस चूर्ण में प्रतिमात्रा 3 ग्राम शहद और घी के साथ चटाने से अथवा इसके आसव के प्रयोग से भयंकर रक्तपित्त(शरीर के चाहे जिस अंग से बहने वाला खून) रूकता है। बवासीर का दर्द मिटता है। रक्तरोधक यह एक अक्सीर दवा है। कम से कम 15 से 30 दिन इसका सेवन करायें।

7. मिश्री के साथ लौह भस्म का सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

8. कमलगट्टे और गूलर के फलों के चूर्ण को दूध के साथ देने से रक्त की कै(वमन) ठीक हो जाती है।

यह भी पढ़ें- मधुमेह

9. गूलर के सूखे या हरे फलों को पानी में पीसकर मिश्री मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से रक्त की वमन, रक्तातिसार, खूनी बवासीर से खून का स्राव और मासिकधर्म में अधिक रक्तस्राव आदि ठीक होते हैं।

10. गूलर के रस में शहद मिलाकर पीने से रक्तपित्त ठीक हो जाता है।

11. गोभी 12-15 ग्राम पानी में पीसकर नित्य दो बार पीने से कफ के साथ रक्त आना बंद हो जाता है।

12. गोरखमुण्डी के चूर्ण को नीम के रस के साथ लेने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

13. अड़ूसे का रस 4 भाग में घी एक भाग मिलाकर, सिद्ध करके लेने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

14. चिरयारि एक उत्तम रक्तरोधक वनस्पति है। इसमें रक्तस्रावरोधक क्षमता अद्भुत है। किसी भी धारदार अस्त्र(हथियार) से लगे घाव से हो रहे रक्तस्राव को तत्काल रोकने में सफल है। लगे घाव पर इसे पीसकर लेप करके बाँध देने से इससे रक्तस्राव तत्काल बंद हो जाता है और घाव बिना पके ही ठीक हो जाता है।
आन्तरिक प्रयोग- बाह्य प्रयोग की भांति चिरयारि का आन्तरिक प्रयोग भी पूर्ण प्रभावी है। इसकी जड़ 6 ग्राम पानी में पीसकर शक्कर में मिलाकर दिन में दो बार पीने से बवासीर का रक्तस्राव या फेफड़े से आने वाला रक्त और खूनी अतिसार शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

Rakt Ki Samasya Ka Desi Ayurvedic Ilaj

15. चिरायता मुँह से आने वाले रक्तस्राव में लाभकारी है। महर्षि चरक अनुसार यह सफल योग है। इसका चूर्ण, फाँट या क्वाथ बनाकर सेवन करें।

16. छतिवन का धन क्वाथ चोबचीनी के साथ दूध के अनुपान से रक्तपित्त में लेने से लाभ होता है। नियमित रूप से सेवन करें।

17. नाशपाती के शर्बत में बेर मींगी का चूर्ण छिड़क कर नित्य दो बार चाटने से रक्त वमन में लाभ होता है।

18. पीपल(पीपर) के चूर्ण को शहद के साथ नित्य दो बार चाटने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

यह भी पढ़ें- शराब छुड़ायें

19. फिटकरी का फूल 1 ग्राम में 3 ग्राम बूरा मिलाकर उसकी 4 पुड़िया बना लें। प्रत्येक पुड़िया 2-2 घंटे बाद लेने से छाती से रक्त आना बंद हो जाता है।

20. बड़(बरगद) के पत्तों की लुगदी में शहद और शक्कर मिलाकर खाने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

21. बबूल का गोंद 4.5 ग्राम गाय के घी 15 ग्राम के साथ नित्य 3 से 7 दिन तक चाटने से कफ के साथ होने वाला रक्तस्राव और शरीर के किसी भी भाग से होने वाला रक्तस्राव बंद हो जाता है।

22. बथुए के बीजों का चूर्ण शहद के साथ नित्य सुबह-शाम चाटने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

23. शहद के साथ बंशलोचन का सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.