Pitt Ke Liye Gharelu Upay

Pitt Ke Liye Gharelu Upay

पित्त दोष के लिए घरेलू उपाय

पित्त वृद्धि, पित्त का बढ़ना, पित्ताधिक्य, गात्रदाह
बिलिअसनेस(Biliousness)
परिचय-

pitta ka desi ilaj, pitt se chutkara, pit ki dawa

पित्त के बढ़ने की स्थिति को ही पित्त वृद्धि या पित्ताधिक्य कहते हैं। इसके बढ़ने से कब्ज़, सिरदर्द, अरूचि, सर्वांग शरीर में जलन जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। शरीर में जलन होना पित्त वृद्धि के निर्देशक लक्षण हैं। यदि सही समय पर चिकित्सा उपचार संभव नहीं हो तो मिचली एवं अन्य औपसर्गिक लक्षण प्रकट होते हैं। इन लक्षणों को देखते ही निम्न योगों में से कोई एक जो आसानी से उपलब्ध हो दें।

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चिकित्सा-

Pitt Ke Liye Gharelu Upay

1. यदि भोजन से पहले आलू बुखारा खा लिया जाये तो पित्त वृद्धि एवं पित्त वृद्धि से उत्पन्न तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं।

2. पके हुए गन्ने का रस नित्य पीने से पित्त और वात संबंधी कष्ट दूर हो जाते हैं।

3. मिश्री के शर्बत के साथ लौह भस्म लेने से समस्त प्रकार के पित्त रोगों में लाभ होता है।

4. खमान के पत्तों और जड़ का रस पीने से दूषित पित्त और कफ दस्तों द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

5. खस के चूर्ण की फंक्की लेने से पित्त के उपद्रव दूर हो जाते हैं।

6. यदि पित्त वृद्धि के साथ-साथ मन्द ज्वर, प्यास, सिरदर्द, वमन आदि कष्ट भी हों, तो कुलफा भोजन के साथ खाने से लाभ होता है।

7. पित्त वृद्धि में ‘कोकम’ के फलों का शर्बत पीने से लाभ होता है।

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8. यदि गिलोय(गुरूच) का सेवन मिश्री के शर्बत के साथ किया जाये तो पित्त का प्रकोप शांत हो जाता है और पित्त से उत्पन्न तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं।

9. गूलर के पत्तों को पीसकर शहद के साथ चाटने से पित्त विकारों में लाभ होता है।

Pitt Ke Liye Gharelu Upay

10. ताड़ के फूलों के गुच्छों की राख पानी में घोल कर पीने से पित्त के रोग ठीक हो जाते हैं। मिश्री के शर्बत में घोलकर देने से अधिक लाभ होता है।

11. नागफनी के फलों का शर्बत चार मि.ली. नित्य 3-4 बार पीने से लाभ होता है।

12. गोदुग्ध में मिश्री मिलाकर प्रवाल भस्म लेने से पित्त का प्रकोप शांत हो जाता है।

13. पारस पीपल की लकड़ी के बीच के भाग को घिसकर लेप करने से पित्त के विकार और छाती की पीड़ा शांत हो जाती है।

14. पारिजात(हरसिंगार) के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर पीने से पित्त विकारों में लाभ होता है।

15. शक्कर के साथ पुनर्नवा लेने से पित्त गल जाता है।

16. बहेड़ा का सेवन करने से पित्त दस्तों में निकल जाती है। 3-4 ग्राम समभाग मिश्री या गुड़ के साथ सुबह-शाम दें।

17. बिदारीकन्द के रस में शहद मिलाकर पीने से पित्तशूल में लाभ होता है।

18. धूप में सुखाई हुई बेर की जड़ को पानी में औटाकर उस पानी को पीने से पित्त ज्वर में लाभ होता है।

19. गिलोय के सत्व के साथ मोती भस्म चाटने से पित्तविकारों में लाभ होता है।

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