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Piliya Me Gharelu Upchar Kya Hote Hain

पीलिया में घरेलू उपचार क्या होते हैं?

कामला, पाण्डू रोग, पीलिया
(Jaundice, lcterus)

परिचय-

आँखों का सफेद भाग और सुबह का पहला मूत्र यदि पीला आये तो इसे कामला(Jaundice) का संदेह करें।

कारण-

इसका मुख्य कारण जिगर(यकृत) में विकृति होना है। किसी भी कारण से जब यकृत की पित्त की नली अवरूद्ध हो जाती है तो पित्त आँतों में नहीं जाकर सीधा रक्त में मिलने लगता है, जिससे तमाम शरीर पीला हो जाता है। पित्त नली अवरूद्ध होने के कारण कुछ भी हो सकता है। पित्त पथरी, पोषक तत्व की कमी, पाचन विकार, अधिक मात्रा में रजःस्राव आना, अस्वाभाविक रूप से वीर्य का क्षरण, रक्तस्राव संबंधी अन्य रोग, अधिक दिनों तक मलेरिया का होना, खुली वायु एवं प्रकाश का अभाव होना, पानी कम पीना आदि मुख्य कारण हैं।

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लक्षण-

1. आँखें पीली हो जाती हैं तथा मूत्र पीला आता है।

2. रोग की उग्रावस्था में त्वचा पीली हो जाती है और पसीना भी पीला आता है, जिससे बनियान पसीने से गीली होने पर पीली हो जाती है।

3. मुँह का स्वाद कड़वा हो जाता है।

4. जीभ पर मैल का लेप चढ़ जाता है।

5. भूख कम हो जाती है।

6. कभी-कभी उदरशूल होता है।

7. मिचली एवं उल्टी(वमन)।

8. शरीर में खुजली होना।

9. आलस्य व सुस्ती आना।

10. अनिंद्रा

11. भय।

12. दुर्बलता आदि लक्षण होते हैं।

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नोट- यदि रोगी का सब कुछ पीला दिखाई दे तो यह अशुभ लक्षण है। ऐसा जानकर चिकित्सा स्वयं हाथ में कदापि न लें। रोगी की मृत्यु संभव है। यदि चिकित्सा हाथ में लेनी ही है तो ठीक की गारंटी न लें। रोगी के संबंधियों को आश्वासन ही दें।

Piliya Me Gharelu Upchar Kya Hote Hain

पथ्य-अपथ्य:

गर्म दूध, साबूदाना, कच्चे गूलर की सब्ज़ी, अखरोट, अनार, मौसमी, संतरें का रस अनुकूल है। छैने का पानी सुपाच्य एवं पौष्टिक आहार आदि हितकर है। वयस्कों को दिन में कम से कम 3-4 लिटर पानी अवश्य पीना चाहिए, सलाह दें। यदि ज्वर भी हो तो साबूदाना, बार्ले वाटर दें। ज्वर के कम हो जाने पर पुराने चावल की भात और शोरबा आदि दें।
मछली, मलाईसहित दूध, घी एवं अन्य चिकनाईयुक्त आहार, मिर्च, मिठाई, गुड़, सेम, उड़द की दाल, मैदा की बनी चीजें आदि मत दें।

सहायक चिकित्सा-

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रोगी को जुलाब(दस्तावर औषधि) देकर पेट साफ करें। आहार में केवल दही पुराने चावल की भात अधिक से अधिक खाने को दें।

घरेलू चिकित्सा-

1. कुटकी का काढ़ा- 10 से 25 मि.ली. नित्य दो बार दें।

2. कामलाहर रस- 1 से 3 ग्राम मक्खन निकाले छांछ के साथ सुबह-शाम दें।

3. अर्क पुनर्नवा- 20 से 50 मि.ली. ईख के रस के साथ नित्य 4 बार दें।

4. मूलीक्षार चैथाई से एक ग्राम जल के साथ सुबह-शाम दें।

5. कामला में कुटकी का चूर्ण आधा से एक ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम लेने से लाभ होता है। यह उत्तम विरेचक है।

6. दारू हल्दी के क्वाथ में थोड़ा शहद मिलाकर सुबह-शाम 25 से 50 मि.ली. दें।

7. केले के स्तम्भ का रस 25 से 50 मि.ली. दही में मिलाकर सुबह-शाम दें, प्रभावी योग है।

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