Pet Me Kide Ki Dawa

Pet Me Kide Ki Dawa

पेट में कीड़े की दवा

आँत्रकृमि, कृमि, आँत में रहने वाले कीड़े

Intestinal Worms, Helminthiasis, Pet Ke Kide

परिचय-

आँतों में कृमियों का पैदा होना। यह आँतों में किसी भी आयु में पैदा हो सकते हैं। यह व्यस्कों की अपेक्षा बच्चों में अधिक होते हैं। ये कृमि कई प्रकार के होते हैं। जैसे- सूत कृमि, केंचुए की भांति कृमि, फीते की भांति चिपटे कृमि।
इनके अतिरिक्त भी कई प्रकार के कृमि होते हैं, लेकिन मुख्य रूप से ये तीन प्रकार के अधिक पाये जाते हैं।

कारण-

यदि किसी भी आयु में यकृत क्रिया ठीक हो रही हो तो आँत्रकृमि की संभावना कम हो जाती है अर्थात् आँत्रकृमि होने का अर्थ यकृत की क्रिया में गड़बड़ी होना है। इसके अतिरिक्त कच्चे हरे फलों का अधिक सेवन, पके केले अधिक खाना, आहार-विहार दोषपूर्ण होना, कच्चा दूध अधिक पीना(धारोष्ण दूध पीने से आँत्रकृमि नहीं होते हैं) रहने की जगह(निवास) स्वस्थ वातावरण में न होना, नंगे पाँव चलने से अंकुश कृमि होने की संभावना, आहार में माँस अधिक खाना आदि मुख्य कारण हैं।

आप यह हिंदी लेख Chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

लक्षण-

आँत्रकृमि होने से ‘मलद्वार’ और ‘नाक’ में खुजली होती है। नाभि के आसपास धीमी-धीमी पीड़ा होती है। भूख खूब लगती है या फिर लगती ही नहीं है। मुँह में पानी भर जाता है, मिचली आती, कब्ज़, क्त की कमी, पतले दस्त आना, खड़िया(मिट्टी) की भाँति सफेद मूत्र आता आदि लक्षण होते हैं। पेट बड़ा और कड़ा हो जाता है। नींद नहीं आती या बच्चा रोगी को चिहुंक कर अचानक नींद से उठ जाता है, बिस्तर पर मूत्र कर देता है, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, अकारण बच्चों का रोना।

नोट- कुछ बच्चे ऐसे होते हैं, जिनकी आँतों(पेट) में मात्र एक कीड़ा होने से भी तमाम लक्षण प्रकट होते हैं। कई बच्चे ऐसे भी होते हैं, जिनके पेट में कीड़े अत्यधिक होते हैं, लेकिन लक्षण एक भी प्रकट नहीं होता है। पेट में कृमियों का तब पता चलता है, जब किसी प्रकार की कृमिनाशक औषधि ली जाती है। आँत्रकृमि के होने से कुछ बच्चों में मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं।

Pet Me Kide Ki Dawa

रोग की पहचान-

Pet Me Kide Ki Dawa

गुदा मार्ग और नाक की खुजली तथा मुँह में बार-बार पानी भर जाना मुख्य लक्षण हैं, जो आँत्रकृमि होने का संकेत है।

प्राकृतिक चिकित्सा-

1. सर्वप्रथम बच्चों को कृमिकारक आहार देना बंद कर दें।

2. आँतों की सफाई करें, जिससे आँतों में कीड़े नहीं रहने पायें। इसके लिए एनीमा दें जैसे- गुनगुने पानी में कागज़ी नींबू का रस निचोड़ कर इस पानी से एनीमा करें। इसके बाद गुनगुने पानी में सेंधा नमक घोलकर एनीमा दें। अंत में प्रति औंस 10-15 ग्रेन फिटकरी घोलकर एनीमा करें।

उपरोक्त एनीमा देकर अंत में नारियल का तेल पिचकारी में भरकर गुदामार्ग में अंदर दें। लेकिन इससे पहले बच्चे के घुटने पेट से सटाकर पेट के बल लेटा दें, जिससे सिर जमीन पर टिका रहे। इस स्थिति में तेल डालने में सुविधा होगी और इसी स्थिति में कुछ देर रहने से नारियल तेल आँतों में अंदर तक पहुंच जायेगा, एनीमा आदि के कारण उत्पन्न जलन भी दूर होगी।

3. आहार में खूब पके नारियल का दूध थोड़ा-थोड़ा दें।

4. तीखे, कसैले और कड़वे पदार्थ खाने को दें।

5. आटे में नमक और मीठा सोडा मिलाकर रोटी बनाकर खिलायें।

यह भी पढ़ें- मधुमेह को ऐसे करें नियंत्रण

6. पोदीना या अदरक की चटनी जीरा मिलाकर खिलायें।

7. आड़ू, अखरोट और मीठे बादाम दें।

8. शीत ऋतु में गुनगुने पानी से, गर्मियों में ठण्डे पानी से स्नान अच्छी प्रकार मलकर करवायें।

9. यदि रोगी युवक या प्रौढ़ हो तो जलाहारी या जल-रसाहारी व्रत एक दिन के बदले दो दिन के लिए भी रख सकते हैं।

10. तरकारी में टमाटर, गाजर, खीरा, ककड़ी, प्याज आदि जिन्हें कच्चा या पकाकर खाया जा सकता है।

घरेलू चिकित्सा-

Pet Me Kide Ki Dawa

1. अनानास के सफेद पत्तो के रस में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

2. कच्चे आम के छिलकों का काढ़ा छोटे बच्चों को 2-3 मि.ली. प्रतिमात्रा नित्य 3 बार 2-3 दिन देने से आँत्रकृमि नष्ट हो जाते हैं।

3. कच्चे आँवले का रस आधा से एक औंस नित्य सेवन करने से एक सप्ताह में आँत्रकृमियों से मुक्ति मिल जाती है।

4. नित्य कच्चा नारियल खाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।

5. बेल के पत्तों का रस 1-1 चम्मच सुबह-शाम सेवन करने से आँत्रकृमि मर जाते हैं।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.