Pet Ke Kide Ki Dawa

Pet Ke Kide Ki Dawa

पेट के कीड़े की दवा

Stomach Bug, Intestinal Worms, Stomach Bug Symptoms, Pet Ke Kide Ka Ilaj

कृमि एक प्रकार के परजीवी हैं, जिसका अर्थ है जीवित रहने के लिए दूसरों पर पूर्ण आश्रित होना। परजीवी अपने भोजन का स्वयं प्रबंध नहीं करते, ये दूसरों के शरीर से भोजन ग्रहण कर जीवित रहते हैं। मनुष्य के उदर(पेट) में पाये जाने वाले कृमि, आंतों से रक्त एवं अन्य पोषक तत्व चूसते रहते हैं, जिससे मनुष्य कुपोषण का शिकार होकर कमजोर व खून की कमी से ग्रस्त हो जाता है। ये कृमि शरीर में हानिकारक पदार्थ भी छोड़ते हैं, जिसके कारण शरीर में अनेक रोग पैदा हो सकते हैं जैसे- सांस फूलना, दमा, शरीर की त्वचा पर एलर्जी होने से ददौरे, पित्ती आदि। उदर कृमि से ग्रस्त गर्भवती स्त्री के शरीर में खून की कमी की वजह से प्रसव के समय अनेक कठिनाइयां होती हैं। इन उदर कृमियों के कारण कब्ज तथा आंतों के क्षतिग्रस्त होने पर कोलाइटिस रोग हो जाता है।

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ये कृमि आंतों में छेद करके लटके रहते हैं, जिससे घाव होकर आंतों की आंतरिक परत क्षतिग्रस्त हो जाती है। ये कृमि शरीर के अंदर एक अंग से दूसरे अंग में आते-जाते रहते हैं। आमाशय, यकृत, आंतें, पित्ताशय, मस्तिष्क में पहुंच कर ये कृमि इन्हें क्षतिग्रस्त कर अंगों की कार्य-प्रणाली व कार्य क्षमता को नष्ट करते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर मस्तिष्क में सूजन, नेत्र ज्योति में कमी व मिरगी रोग पैदा हो सकते हैं। पैंक्रियाज़, अपेन्डिक्स व पित्ताशय में पैंक्रियाटाइटिस एपेन्डिसाइटिस, कोलीसिस्टाइटिस रोग पैदा हो सकते हैं।

सामान्य कारण-

गलत खान-पान, हाथ साफ किए बिना भोजन ग्रहण करना, भूख न लगने पर(अजीर्ण) खाना खाने से, दूध, खट्टे-मीठे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, मैदे से बने पदार्थों का सेवन, कढ़ी, रायता, गुड़, उड़द, सिरका, कांजी, दही और संयोग विरूद्ध पदार्थों का सेवन, परिश्रम न करना, दिन में सोना तथा मक्खियों द्वारा दूषित आहार खाने से उदर कृमि हो जाते हैं।

सामान्य लक्षण-

पेट दर्द होना, आंखें लाल होना, जीभ सफेद होना मुंह से दुर्गन्ध आना, गले में धब्बे पड़ना, शरीर में सूजन आना, गुप्तांगों में खुजली होना, जी मिचलाना और उल्टी आना, मल त्याग करते समय खून आना, दस्त लगना आदि लक्षण उदर कृमि होने पर होते हैं। यदि कोई बच्चा रात में सोते समय दांत किटकिटाता है, तो उसके पेट में कीड़े होने के संकते हैं।

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उदर कृमि रोग का उपचार-

Pet Ke Kide Ki Dawa

1. अजवाइन का सत, बथुआ के बीज, पलास बीज, इन्द्रजौ- ये सब प्रत्येक 10-10 ग्राम लेकर जल में पीसकर गोली बनाकर एक या दो गोली 24 घंटे में दोबारा ताजा जल से सेवन करने पर गोल कृमि गल व मर जाते हैं। यह सूत्र कृमि का भी नाश करता है।

2. सत अजवाइन व सत पिपरमिंट 5-5 ग्राम लेकर शीशी में डालने पर दोनों मिलते ही पानी जैसा तरल मिश्रण बनाते हैं। 12 ग्राम तिल तेल में इस मिश्रण की 10 बूंद मिलाकर रखें। इसी तेल को गुदा मार्ग पर चुपड़ देने से गुदा पर सूत्र कृमि के कारण होने वाली खुजली, जलन, दर्द अति शीघ्र नष्ट होता है। थोड़ी चीनी या मिश्री में इस मिश्रण की 2-3 बूंद डालकर दिनभर में तीन बार सेवन करने पर सूत्र कृमि नष्ट हो जाते हैं।

3. नारियल 50 ग्राम, फ्लाश पापड़ा 50 ग्राम, गुड़ 50 ग्राम तीनों को चूर्ण कर आपस में मिलाकर रखें। इस मिश्रण को 6 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ दो बार प्रयोग करने पर फीता कृमि नष्ट होते हैं।

4. उदर कृमि ग्रस्त व्यक्ति को अपना पाचन तंत्र स्वस्थ रखने के लिए औषधि लेते रहना चाहिए। कब्ज़ का होना कृमियों को बाहर नहीं निकलने देता। अतः कब्ज़नाशक औषधियों का प्रयोग करना चाहिए।

5. करेले के 4 चम्मच रस में मिश्री मिलाकर सात दिनों तक सेवन करने से भी उदर कृमि का नाश होता है।
कुछ औषधियों का सेवन कृमि रोग में करने पर उदर कृमि नष्ट हो जाते हैं। औषध-सेवन से पूर्व चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। जैसे- कृमि कुठार रस, कृमिमुदगर रस, विडंगावहेल, विडंगासव, विडंगारिष्ट, कुटजारिष्ट, कृमिघ्न चूर्ण आदि।

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उदर कृमि से बचाव

1. शौच के बाद अच्छी तरह साबुन से हाथ धोएं। फलों-सब्जियों को बिना धोए नहीं खाना चाहिए। कब्ज़ होने से पेट में मल सड़ता है, जिससे उदर कृमि पैदा होते हैं। अतः कब्ज़नाशक आहार लेना चाहिए।

2. नंगे पैर न घूमें, नाखून काटते रहें, नमकीन, मांस, मछली, बेसन के पकवान, खटाई, दिन में सोना, शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

3. आंवला, संतरा, अदरक रस एवं चटनी, शहद, नींबू, मूंग, हींग, अजवाइन, अन्नानास का रस, सरसों का साग, जीरा, लौकी, करेला, परवल, तौरई, बथुआ, अरहर, सेब का सेवन करने से उदर कृमि का जोर कम होने लगता है।

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