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Pet Fulne Ki Samasya Ke Liye Desi Upay

पेट फूलने की समस्या के लिए देसी उपाय

अफारा, आनाह, पेट में गैस भर जाना, वायु गोला(Flatulence)
परिचय-

मन्दाग्नि(अजीर्ण) या अम्लपित्त आदि रोगों की उचित चिकित्सा नहीं करने से पेट में गैस बहुत अधिक भर जाती है। ऊपर की ओर दबाव पड़ने से हृदय पर भी दबाव बढ़ता जाता है, जिससे रोगी घबराहट अनुभव करता है। कभी-कभी संयोग विरूद्ध आहार लेने से भी ऐसी समस्या होती है। यदि कभी डकार आ जाये या गुदा से वायु निकल जाये तो राहत अनुभव होती है।

चिकित्सा-

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इस रोग में सर्वप्रथम साबुन के पानी में एरण्ड का तेल मिलाकर एनीमा दें। एनीमा देते ही कुछ राहत अनुभव होगी। यदि इसके बाद भी संतोषजनक लाभ नहीं हो तो ग्लीसरीन मिले पानी में थोड़ी-सी भुनी हींग पीसकर घोलकर एनीमा दें। पहले एनीमा से ही पेट साफ होगा। दूसरे एनीमा से गैस का शमन होगा और रोगी आराम अनुभव करेगा।
सावधान! यदि एनीमा का पानी बार-बार प्रयास करने पर भी अंदर नहीं जा रहा हो तो रोगी को तुरन्त अस्पताल भेज दें। संभव है कि आँत्रावरोध हो और शल्य चिकित्सा अनिवार्य हो।

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1. अजवायन 6 ग्राम में काला नमक 1.5 ग्राम मिलाकर फँकी मारकर गर्म पानी पीने से अफारा में लाभ होता है। इसी अनुपात में मिश्रित योग तैयार कर लें। 2-2 ग्राम रोज सुबह-शाम सेवन करने से पेट फूलना ठीक हो जाता है और वायुगोला का नाश होता है।

2. अनासफल(एक प्रकार का झाड़ीदार वृक्ष) के बीज सुगंधित, उत्तेजक और पेट के अफारे को दूर करते हैं। इनसे एक प्रकार का तेल प्राप्त होता है, जिससे सौंफ जैसी गंध आती है। इसलिए इसका व्यवहार सौंफ के स्थान पर होता है।

3. अमरबेल के बीजों को उबालकर पेट पर बांधने से डकार आती है, पेट की गुड़गुड़ाहट दूर होती है तथा पेट दर्द में लाभ होता है।

4. अमलतास की गिरी पीसकर नाभि के चारों ओर लेप करने से बच्चों का पेटदर्द अफारा आदि में लाभ होता है।

Pet Fulne Ki Samasya Ke Liye Desi Upay

5. छोटी और बड़ी अरनी की जड़ का काढ़ा पीने से वायुगोले में लाभ होता है।

6. इन्द्रायण की गिरी और एलवे को पीसकर गर्म पानी के साथ लेने से अफारा में लाभ होता है।

7. किरायता छोटा के फूल वाला पौधा अग्निवर्धक, पेट का अफारा दूर करने वाला और कटु पौष्टिक होता है।

8. कोमल का फल पेट के अफारे को दूर करता है।

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9. कोष्ठ के पंचांग की राख शहद में मिलाकर गुल्म रोग(वायु गोला) में लाभप्रद है। नित्य सुबह-शाम लें।

10. ग्वारपाठे(घीक्वार) का गूदा 6 ग्राम, गाय का घी 6 ग्राम, हरड़ का चूर्ण 1 ग्राम, सेंधा नमक 1 ग्राम मिलाकर खाने से वायुगोला में लाभ होता है।

11. कली का चूना 200 मि.ग्रा., शक्कर 200 मि.ग्रा. और नमक 200 मि.ग्रा., पानी 250 मि.ली. में मिला लें। 25 मि.ली. पानी सुबह-शाम लेने से वायुगोला, अफारा, आँत्रकृमि आदि ठीक हो जाते हैं।

12. जंगली अदरख के कन्द को भुभल आग(धूम रहित आग) में भून-छीलकर नमक के साथ खाने से अफारा में लाभ होता है।

13. तेजपात(तमलपत्र) की छाल को पीसकर फाँकने से वायुगोला में लाभ होता है।

14. तेजपात का काढ़ा पीने से पसीना आने से आँतों के दोष, पेट फूलना, दस्त लगना आदि में लाभ होता है।

15. नीम के तेल को पान में रखकर खाने से अथवा इसकी 30 बूँदें रास्नादि क्वाथ में मिलाकर पीने से शरीर की ऐंठन एवं अन्य वायु पीड़ा मिट जाती है।

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16. प्याज के रस में भुनी हींग और काला नमक मिलाकर पीने से उदरशूल और अफारा में लाभ होता है।

17. काला नमक के साथ मरोड़फली के चूर्ण की फँक्की लेने से शूल और अफारा में लाभ होता है।

18. मूसाकानी की जड़ों को पानी में पीसकर पेट पर लेप करने से पेट के अफारा में लाभ होता है।

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