Normal Heart Beat

Normal Heart Beat

नाॅर्मल हार्ट बीट

हृदय की धड़कन बढ़ना

Heart Palpitation, Fast Heart Beat, Dil Ki Dhadkan

हृदय की धड़कन ही जीवन का आधार है। परन्तु यह कभी-कभी अधिक हो जाती है, तो हम घबराहट, बेचैनी, अज्ञात भय आदि का शिकार हो जाते हैं। रोगी स्वयं निर्णय नहीं ले पाता है कि यह क्या हो रहा है? नींद नहीं आती है। यदि नींद आ भी जाये, तो हल्की-सी भी ध्वनि व आहट से तुरन्त खुल जाती है। या बिना किसी कारण के भी एकाएक खुल जाती है और रोगी उठकर बैठ जाता है।

मुख्य कारण-

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इसका मुख्य कारण कब्ज़, रक्ताभाव, अपच(अजीर्ण) एवं गैस है। हृदय विकार से भी ऐसा होता है, लेकिन अधिकांश रोगियों में ये तीनों लक्षण मुख्य रूप से पाये जाते हैं। आँत्रकृमि के कारण भी हृदय की धड़कन बढ़ जाती है। अतः निम्न चिकित्सा करें-

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1. आँत्रकृमि हों तो उसकी चिकित्सा करें।

2. कब्ज़, अजीर्ण या वायु बनने आदि का कष्ट हो तो उसकी चिकित्सा करें। साथ ही भोजन की मात्रा कम कर दें। भोजन उतना ही लें जितना आवश्यक हो अर्थात् थोड़ा और भोजन करने की इच्छा हो तो मत खायें।

3. भोजन में प्राकृतिक खाद्यों को लेने से अपचन और गैस बनने की संभावना कम हो जाती है।

4. जब तक पूर्ण स्वस्थ नहीं हो जायें, तब तक आराम करने की जरूरत होती है।

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5. आराम करते समय सारे शरीर के कपड़े ढीले कर दें। अपनी पसंद की अच्छी पुस्तकें पढ़ें। प्राकृतिक दृश्यों वाले चित्रों को देखें। अपने जीवन के सुख के पलों को याद करें। इससे भय एवं चिंता के प्रभाव कम हो जाते हैं।

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उपरोक्त निर्देशों का पालन करने से आप शीघ्र स्वस्थ हो जायेंगे। फिर भी आवश्यकता प्रतीत हो तो निम्न योगों को प्रयोग करें-

1. नाशपाती का मुरब्बा खाने से हृदय शक्ति में वृद्धि होती है और हृदय धड़कन कम होती है।

2. लीची शर्बत पीना लाभदायक होता है।

3. संतरे का रस 1 लीटर, बेदमुश्क 250 मि.ली., अर्क केवड़ा 250 मि.ली. को मिलाकर 30 से 60 मि.ली. की मात्रा को पानी 1 कप मिलाकर नित्य लेने से दिल घबराना, दिल बैठना तथा दिल अधिक धड़कना ठीक हो जाता है।

4. सेब का मुरब्बा 50-60 ग्राम चाँदी का वर्क लगाकर 15-20 दिन तक प्रातःकाल खायें।

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