Neend Ki Dawa

Neend Ki Dawa

अनिद्रा, निद्रानाश, नींद न आना
(Sleeplessness, Insomnia)

परिचय-

Insomnia, Sleeplessness, Neend Na Aana, Neend Ki Dawa
सोने के उद्देश्य से बिस्तर पर लेटने पर भी पलक नहीं झपके तो उसे निद्रानाश(अनिद्रा) कहते हैं।

कारण-

तीव्र शारीरिक पीड़ा, मानसिक चिंता, उद्वेग, भय एवं तनाव, प्रतीक्षा, कब्ज़, बेचैनी, तीव्र ज्वर, शरीर में उत्ताप(दाह) आदि कारणों से निद्रा का नाश होता है। इनके अतिरिक्त ‘नींद न आ जाये’ इसके लिए औषधि का सेवन(जैसा कि कुछ छात्र परीक्षा से पूर्व करते हैं) तो कुछ गाड़ी चालक(ड्राइवर) ऐसे कष्ट लेकर आते हैं कि लगातर तीन दिन तीन रात जगे रहने से अब नींद ही नहीं आती अर्थात् लगातार जागने से भी निद्रा का नाश होता है।

लक्षण-

नींद लेने(सोने) से शरीर में स्फूर्ति, हल्कापन एवं मानसिक शांति मिलती है। इससे स्पष्ट है कि नींद के अभाव में शरीर में भारीपन, आलस्य, शरीर टूटता, आंखों में लाली, शरीर में आंतरिक कम्पन्न क अनुभूति, पाचन विकारों का उत्पन्न होना आदि लक्षण स्पष्ट होते हैं। सोने के लिए बिस्तर पर लेटते-लेटते भी टकटकी लगाकर देखते रहना स्वभाव-सा बन जाता है।

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प्राकृतिक चिकित्सा एवं निर्देश-

Neend Ki Dawa

1. यदि अनिद्रा का कारण शारीरिक कष्ट या पीड़ा हो तो सर्वप्रथम उसकी चिकित्सा करें।

2. कुछ लोग भूतकाल में अपने द्वारा किये गये पापोें को याद करके सो नहीं पाते हैं।

3. जो छात्र परीक्षा के नाम पर देर रात जागना पसंद करते हैं, उन्हें ज्ञात होना चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करके अधिक लाभ नहीं ले सकता है। अतः निश्चित समय पर अवश्य सोयें, जिससे शरीर का स्नायुतंत्र परीक्षा के समय सबल और स्वस्थ रहें।

4. कुछ लोग कल के ‘काम के बोझ’ को स्मरण करके चिंता से सो नहीं पाते हैं। उन्हें यह सोचना चाहिए कि रातभर नहीं सोने से हम कोई भी काम करने के योग्य नहीं रहते और थकावट अनुभव करते हैं।?

5. भविष्य के लिए सोचना, कल्पना करना ठीक है लेकिन अधिक सोचकर अपने सुख(नींद) को जानबूझ कर खोना अपने लक्ष्य से दूर रह जाना है।

अच्छी नींद के लिए-

1. अपने आपको कब्ज़ से मुक्त रखें। इसके लिए नित्य 5 से 10 ग्राम आवश्यकतानुसार ईसबगोल की भूसी दूध में मिलाकर रात को सोने से पहले लें या एरण्ड का तेल 5 से 10 मि.ली. दूध में मिलाकर नित्य रात को लें।

2. शारीरिक श्रम करने का अवसर कम मिलता हो तो नित्य सुबह कसरत अवश्य करें।

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3. यदि कसरत या व्यायाम नहीं कर सकें, तो नित्य सुबह उठते ही ताम्रपात्र में रात का रखा हुआ आधा से एक लीटर जल पीकर कम से कम आधा घंटा अवश्य टहलें।

4. सोने का कमरा साफ, स्वच्छ और हवादार हो और कमरे में शोर न हो।

5. सोने के समय हाथ-पैरों को धो लें। यदि ग्रीष्म ऋतु हो ता ठंडे जल से, शीत ऋतु हो तो गुनगुने जल से स्नान करके सोना हितकर है।

6. निश्चित समय पर सोने की आदत डालें। ऐसा करने से आप देखेंगे कि जागने का समय भी स्वतः निश्चित हो जायेगा। इस बीच शरीर को भरपूर नींद का सुख मिलेगा।

घरेलू चिकित्सा-

1. सेब, पालक, गाजर और अमरूद का रस समान मात्रा में मिश्रित करके 1 गिलास सुबह-शाम पीने से अनिद्रा रोग में लाभ होता है।

2. सब्जियों में बैंगन की मात्रा अधिक हो तो अच्छी नींद आती है।

3. नित्य सुबह-शाम लौकी(कदुआ, घीया) का रस, तिलों के तेल में मिलाकर सिर पर मालिश करने से नींद अच्छी आती है।

4. पीपल(अश्वत्थ) के हरे पत्तों को पीसकर माथे पर लेप करने से गहरी नींद आती है।

5. भाँग तथा खसखस समभाग लेकर बकरी के दूध में पीसकर दोनों पाँवों के तलवों पर सोने से पहले नित्य लेप करने से अच्छी नींद आती है।

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