Nak Kan Ka Ilaj

Nak Kan Ka Ilaj

नाक-कान का इलाज

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आयुर्वेद के मनीषियों ने कुछ ऐसी विलक्षण जड़ी-बूटियों(वनोषधियों) के गुणों को जांचा-परखा है, जो वास्तव में शरीर पर कारगर असर दिखाती है। ये जड़ी-बूटियां कान, नाक, गला के रोगों के शमन में भी लाभकारी हैं। यहां ऐसी ही जड़ी-बूटियों के माध्यम से कान, नाक, गला रोगों के शमन में कुछ आजमाये हुए घरेलू नुस्खे पेश किये जा रहे हैं।

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नाक-कान-गला रोगों में घरेलू नुस्खे

कान के रोग-

Nak Kan Ka Ilaj

कान में आवाज आने, बहने अथवा पीड़ा होने पर गेंदे के फूल की पिसी पंखुड़ियों का रस निकाल कर महीन कपड़ से छानकर कान में डालें, इससे पीड़ा समाप्त हो जायेगी। कुछ दिनों के इस्तेमाल से कान का बहना भी रूक जाता है।

लहसुन, अजवाइन का तेल कान में डालने से कान का भारीपन समाप्त हो जाता है।

यदि छोटे बच्चों का कान बह रहा हो, तो चूने के पानी की पिचकारी देने से राहत मिलती है।

फिटकरी के चूर्ण में शहद मिलाकर उसमें रूई लपेट कर कान में रखने से कान का घाव जल्द ठीक हो जाता है।

खट्टे अनार के रस में जरा-सा शहद मिलाकर कान में टपकाने से कान की पीड़ा नष्ट होती है। अनार के ताजे पत्ते कुचल कर निकाला गया रस 120 मि.ली., गोमूत्र आधा लीटर तथा तिल का तेल 120 मि.ली. तीनों को धीमी आंच पर पकायें। केवल तेल बाकी रहने पर छानकर रख लें। इसकी कुछ बूंद थोड़ा गर्म करके सुबह-शाम कान में डालते रहने से कान का दर्द, खुश्की, कर्णनाद एवं कम सुनाई देना में फायदा होता है।

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– लहसुन की कलियों को 10 ग्राम तिल्ली के तेल में पका कर तेल की एक-दो बूंद कान में टपकाने से कुछ दिनों में कान का बहरापन नष्ट होता है।

नाक के रोग-

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नाक में फुंसी होने पर तुलसी की पत्तियां सुखाकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर सूंघने से फायदा होता है।

नकसीर होने पर आंवले की ताजी पत्तियों में कपूर पीसकर मस्तिष्क पर लेप करें। नाक का रक्तस्राव शांत होगा।

Nak Kan Ka Ilaj

नाक में गंधशक्ति की क्षति हो, तो लहसुन की पत्ती या काली का रस 2-4 बूंद प्रतिदिन एक बार नाक में डालें।

तुलसी के पत्ते या मंजरी का चूर्ण सूंघने से पीनस व्याधि में आराम मिलता है एवं मस्तिष्क के कीड़े खत्म होकर नाक से बदबू आना रूक जाती है।

नीम की कोपलों का रस नाक में टपकाने से नाक के कीड़े मर जाते हैं।

काली मिर्च को गुड़ और दही के साथ सेवन करने से पीनस रोग का शमन होता है।

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