Naak Ke Rog Ka Gharelu Ayurvedic Upchar

Naak Ke Rog Ka Gharelu Ayurvedic Upchar

नाक के रोग-

यद्यपि नाक से संबंधित छोटे-छोटे कई रोग है जैसे- छींके आना, जुकाम से नाक बंद होना आदि। ये जटिल नहीं है। अतः चिकित्सार्थ इन पर विचार करेंगे। लेकिन लाक्षणिक वर्णन जिस रोग का आवश्यक है वह ‘पीनस’ है।

पीनस के सामान्य लक्षण-

1. नाक का बंद रहना, श्वास लेने में(नाक से) कठिनाई होना।

2. नाक में घाव होना।

3. चिकित्सा के अभाव में कीडे़ पड़ जाना।

आप यह आर्टिकल chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

4. ताजे माँस में धोवन जैसा स्राव आना।

5. दोनों भौंहों और कनपटियों में पीड़ा, भारीपन, सूजन आदि।

6. सांस में बदबू और सिर में तीव्र पीड़ा।

7. नाक बंद रहने से गंध का ज्ञान नहीं होना।

8. रोग पुराना होने से जीभ की क्षमता का अभाव अर्थात् खट्टे-मीठे का ज्ञान न होना आदि मुख्य लक्षण है।

नाक के रोगनाशक योग-

 

Naak Ke Rog Ka Gharelu Ayurvedic Upchar

1. सोंठ, छोटी पीपर और छोटी इलायची के बीज प्रत्येक 4 ग्राम, पुराना गुड़ 100 ग्राम। गुड़ के अतिरिक्त सभी कूट-छानकर गुड़ में मिलाकर 2-2 ग्राम की गोलियाँ बना लें। गोली प्रतिदिन रात को जल के साथ दें। पीनस से मुक्ति मिल जायेगी।

2. यदि रोग की प्रारम्भिक अवस्था से ही रोगी गुड़, दही और काली मिर्च खानी प्रारम्भ कर दे तो पीनस नहीं पनपता, पीनस का भय नहीं रहता और रोगी सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

3. काकड़ासिंगी, कायफल, पोहकर मूल, सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपर, जवासा और अजवायन समान मात्रा में लेकर पीस लें। 2 ग्राम लेकर अदरक का रस पीने से पीनस, तमक श्वास(श्वास रोग), खाँसी, ज्वर, स्वरभंग आदि ठीक हो जाते हैं। यह कफ, वात-कफ आदि से संबंधित तमाम रोगों में लाभकारी है।

यह भी पढ़ें- मधुमेह

4. कुलींजन को पोटली में बांधकर सूंघने से छींके अधिक आना ठीक हो जाता है।

5. यदि चिकित्सा के अभाव में पीनस में कीड़े पड़ गये हों तो बांस के कोमल कोपलों का रस 100 मि.ली. और तारपीन का तेल 10 मि.ली. मिला लें। इस मिश्रित योग की बूंद बार-बार नाक में डालने से तमाम कीड़े बाहर आ जाते हैं।

नोट- पीनस रोग अधिक पुराना होने पर रोगी को प्लीहा विकार हो जाता है। मुंह में घाव भी हो जाते हैं। अतः इस ओर भी ध्यान रखें।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.