chetanherbal.com

Madhumeh Rog Ke Liye Desi Gharelu Upay

मधुमेह रोग के लिए देसी घरेलू उपाय

मधुमेह(डायबिटीज़)-

आज दुनियां में लगभग 90 प्रतिशत लोग मधुमेह रोग से ग्रस्त हैं। शायद ही कोई घर ऐसा होगा, जहां एक-न-एक व्यक्ति ऐसा न मिले, जोकि मधुमेह से पीड़ित न हो। बडे़ तो बड़े आज वर्तमान में बच्चे इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। मधुमेह में रोगी बार-बार मूत्र करने जाता है, जोकि तीव्र गति से आता है। भूख अधिक लगने लगती है, शरीर दुर्बल हो जाता है आदि।

मधुमेह की घरेलू चिकित्सा-

1. मेथी 10 ग्राम रात को 250 ग्राम पानी में भिगो दें। प्रातः मेथी को चबाकर खाकर यह पानी लें। इससे शर्करा घट जाती है।

2. ताजे-ताजे करेले लेकर बीज निकाल दें। फिर करेलों को पीसकर रस निकाल लें। करेले का रस 2-4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट लेने से शर्करा की मात्रा घट जाती है। करेला मधुमेह की उत्तम औषधि है। हजारों लोग अपने मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिये करेले का रस सेवन करते हैं। एक व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह आधा कप करेले का रस पीता है।

3. जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर 1-1 चाय चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है। इससे मूत्र की अधिकता बहुत जल्दी कम हो जाती है। मधुमेहनाशक अधिकांश आयुर्वेदिक औषधियों में जामुन की गुठली का चूर्ण मिलाया जाता है।

4. जामुन की 4-5 हरी कोमल पत्तियां बचाकर सुबह-शाम खायें। गुठली की भांति पत्तियों के सेवन से भी मधुमेह में लाभ होता है।

5. सदाबहार के 5-6 पत्ते प्रतिदिन सुबह खाली पेट चबाकर खाने से रक्तगत तथा मूत्रगत शर्करा नियंत्रण में रहती है। इसके सेवन से कुछ ही दिन में बढ़ी हुई शर्करा घटकर सामान्य हो जाती है।

आप यह हिंदी लेख chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

6. बेल के कोमल ताजे पत्तों का रस 2-4 चाय चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम पीने से मधुमेह में लाभ होता है। इसी प्रकार बेल की 10-12 कोमल पत्तियां सुबह के समय चबाकर खाने से भी शर्करा की मात्रा घट जाती है। बहुत से वैद्य बेल के पत्तों को पिसवाकर गोला-सा बनाकर पानी में ठण्डाई की भांति घोलकर सुबह-शाम सेवन करवाते हैं। कुछ लोग बेल के 10-15 पत्ते तथा काली मिर्च 5 दानें एक साथ पीसकर सुबह-शाम पीने की सलाह देते हैं।

7. सुबह के समय खाली पेट तुलसी की पत्तियां 5 चबाकर खाने से मधुमेह में लाभ होता है। कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से शर्करा का स्तर घटकर सामान्य हो जाता है।

8. बिनौले 20 ग्राम थोड़ा-सा कूटकर पानी 750 ग्राम में इतना औटायें कि पानी 250 ग्राम शेष रह जाये। इसको छान लें। यह दो मात्रा हैं। 1-1 मात्रा सुबह-शाम रोगी को दें। इससे शर्करा की बढ़ी हुई मात्रा घटकर सामान्य हो जाती है।

यह भी पढ़ें- उच्च रक्तचाप

मधुमेह के रोगी के लिए जाँच निर्देश-

chetanherbal.com

1. माह में एक बार रक्तशर्करा(Blood Glucose Level) की अवश्य जाँच करवायें। यदि आप कोई एलोपैथिक औषधियाँ ले रहे हैं, तो प्रत्येक 15 दिन के बाद ही जाँच करवायें।

2. यदि रोगी इंसुलिन ले रहा हो, तो नियमित रूप से मूत्र शर्करा की जाँच तथा प्रत्येक 15 दिन बाद रक्तशर्करा की जाँच अवश्य करवायें। मूत्र शर्करा की जाँच डायस्टिक की सहायता से घर पर भी की जा सकती है।

3. प्रत्येक 6 माह के अंतराल पर निम्नलिखित जाँच करवायें-
Urine R/E                    Blood Creatinine
Cholesterol Level        Hb%
Blood Urea

4. वर्ष में दो बार आँखों की जाँच करायें।

5. प्रत्येक 15 दिन के बाद रक्तचाप(Blood Pressure) की जाँच करवायें।

6. खाली पेट रक्तशर्करा(Fasting Blood Sugar) जाँच करने से यह पता चल जाता है कि बिना भोजन लिये रक्त में शर्करा की मात्रा कितनी है।

Madhumeh Rog Ke Liye Desi Gharelu Upay

7. भोजन के दो घण्टे बाद P.P. Blood Sugar जाँच करने से यह पता चलता है कि भोजन करने के बाद शरीर में शर्करा की मात्रा कितनी है।

8. Fasting तथा P.P. दोनों प्रकार की जाँचें एक ही दिन करवाने से यह पता लग जाता है कि भोजन करने के बाद शरीर में शर्करा की मात्रा में कितनी वृद्धि होती है। इससे यह पता चल जाता है कि भोजन में नियंत्रण के बाद क्या शर्करा की मात्रा नियंत्रित हो सकती है अथवा औषधि लेना अनिवार्य है।

9. वर्ष में एक बार E.C.G.(ई.सी.जी.) करवायें।

10. प्रत्येक तीन माह बाद Urine Albumin की जाँच करवायें।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.