Khujli Ki Ayurvedic Dawa

Khujli Ki Ayurvedic Dawa

खुजली की आयुर्वेदिक दवा

खुजली, कण्डु या पामा, चर्म रोग

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यह रोग प्रायः उन लोगों को अधिक होता है, जो शारीरिक स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं देते। गन्दगी के कारण शरीर में जो विषाणु उत्पन्न हो जाते हैं, उनके संक्रमण से शरीर के विभिन्न अंगों में, गाइयों आदि में खुजली होने लगती है। रोग बढ़ता है तो बेचैनी बढ़ जाती है और रोगी खुजाते-खुजाते परेशान हो जाता है।
आयुर्वेद, चर्म रोगों में शोधन कर्मों को विशेष महत्व देता है। उपवास के साथ वास्तविक कर्म एनिमा का प्रयोग किया जाये। उपवास के रूप में फलों का रस तथा शुद्ध जल में नींबू और शहद मिश्रित पेय अथवा बकरी या गाय का दूध लेना चाहिए तथा रोगी को पूरी तरह सफाई के लिए सर्वांग स्नान नित्य प्रति करना चाहिए।

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खुजली दूर करने के लिए सरल उपाय-

Khujli Ki Ayurvedic Dawa

1. नारियल के तेल में फुलाया हुआ सुहागा मिलाकर शरीर पर मालिश करनी चाहिए।

2. सत्यनाशी के बीज, पानी के साथ पीसकर लगावें अथवा उनका उबटन करें।

3. शुद्ध आमलासार गन्धक को शहद के साथ सेवन करने से खुजली में पर्याप्त लाभ होता है। गन्धक की मात्रा लक्षणानुसार 100 से 400 मिलीग्राम तक ले सकते हैं।

4. पँवाड़ के बीज, बावची, सरसों, तिल, हल्दी, दारूहल्दी, कूट और मोथा समान भाग लेकर ताजा तक्र के साथ पीसकर लेप करने से खुजली और दाद में भी लाभ होता है।

5. आमलासार गन्धक-शुद्ध 10 ग्राम को रात्रि में जल के साथ भिगोयें और सुबह के समय मोटे वस्त्र में छानकर पीयें। इससे खुजली में शीघ्र लाभ होता है। इसी गन्धक का पानी छानने पर वस्त्र में जो गन्धक रहे, उसे नारियल के तेल में घोट कर रखें। इसे धूप में बैठकर लगाने से खुजली दूर होती है।

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6. शुद्ध आमलासार गन्धक, आँवा हल्दी, बावची के बीज और काला जीरा प्रत्येक 12 ग्राम लेकर दरदरी कूटकर रखें। इसमें से 12 ग्राम तक यह चूर्ण पानी के साथ रात्रि में एक मिट्टी के पात्र में भिगोयें और प्रातः पानी निथार कर या छान कर पीयें। ऊपर से 20-25 ग्राम भुने चने खायें। यह प्रयोग नित्य प्रति तीन दिन तक करें। खुजली मिट जायेगी।

7. उक्त योग में पानी निथारने के पश्चात् जो औषधि शेष रहे, उसमें 2 ग्राम मैनसिल मिलाकर पीसें और तिली के तेल में मिलाकर रखें। इसे धूप में बैठकर रूग्ण स्थान पर मलना चाहिए।
इस प्रकार खाने और लगाने के प्रयोग से 3 दिन में लाभ हो जाता है।

Khujli Ki Ayurvedic Dawa

8. त्रिफला चूर्ण 8 ग्राम, शुद्ध गन्धक 2 ग्राम और रसमाणक्य 1 ग्राम, खरल में घोंट कर एक जीव कर लें तथा 10 पुड़िया बना लें।
मात्रा- 1-1 पुड़िया सुबह-शाम पानी के साथ अथवा त्रिफला कषाय के साथ सेवन करायें। इसके प्रयोगकाल में घृत, मक्खन आदि का सेवन करें, क्योंकि दवा गर्मी करती है। खुजली पर अव्यर्थ योग है।

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