Khoon Badhane Ke Upay

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खून बढ़ाने के उपाय

रक्ताल्पता(एनीमिया)- कारण, लक्षण और उपचार

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शरीर में जीवन का संचार तभी तक है, जब तक रक्त का संचार बना रहता है। रक्त संचार बंद होते ही आत्मा शरीर को छोड़ देती है। रक्त का महत्व इससे समझा जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि औसत भार के स्वस्थ मनुष्यों में तकरीबन 10 पौण्ड से लेकर 16 पौण्ड तक रक्त होता है। इसे यूं भी समझा जा सकता है कि मनुष्य के शरीर भार का कुल लगभग 10 फीसदी रक्त होता है। शरीर का प्रत्येक भाग तथा कोशिकाएं रक्त से सराबोर रहती हैं।

रक्त एक गरम तरल है। इसे ‘प्लाज्मा’ कहा जाता है। धमनियों, शिराओं तथा बहुत महीन-बारीक रक्त वाहिनियों के माध्यम से रक्त पूरे शरीर में हर समय दौड़ता रहता है और समस्त कोशिकाओं को पोषण देता रहता है।

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रक्त का स्वाद नमकीन होता है, इसकी प्रकृति क्षारीय होती है। रक्त द्वारा शरीर को ऑक्सीजन, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा(चर्बी) तथा विभिन्न प्रकार के लवण प्राप्त होते हैं। ये सभी तत्व जीवन को बनाये रखने के लिए आवश्यक हैं। रक्त तमाम दूषित पदार्थों के निष्कासन करने का कार्य भी करता है। ये दूषित पदार्थ हैं, कार्बन डाइऑक्साइड एवं यूरिया आदि।

कई कारणों से जब शरीर में रक्त की मात्रा कम हो जाती है, तब इसे ‘रक्ताल्पता’, खून की कमी होना या ‘एनीमिया’ का रोग कहा जाता है। हमारे शरीर में सामान्यतः 4 से 8 लीटर तक रक्त रहता है। पुरूषों में स्त्रियों की अपेक्षा रक्त कुछ कम होता है। आयु, बलाबल, खानपान के अनुसार इसमें कमीबेशी होती रहती है।

कई कारणों से आवश्यक मात्रा में कम हो जाने से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है। ये कारण निम्न हो सकते हैं:-

बहुत अधिक रक्त बह जाना :
ऐसा प्रायः दुर्घटना हो जाने से शरीर में रक्त बहने लगता है। कई बार समय पर बह रहे रक्त की रोकथाम न होने से जीवन संकट में पड़ जाता है।

स्त्रियों में मासिक धर्म की अधिकता :
महिलाओं में रक्ताल्पता का यह महत्वपूर्ण कारण है। सामान्यतः माहवारी 3-4 दिन आती है। कुछ में यह अवधि बढ़ भी जाती है। यदि मासिक स्त्राव अधिक दिनों तक हो यानि 3-4 दिन से ज्यादा अथवा माहवारी में रक्तस्त्राव ज्यादा हो, तब रक्ताल्पता की स्थिति बन सकती है।

प्रसव में अधिक रक्तस्त्राव :
कई मामलों में प्रसव के दौरान असावधानी के वशीभूत रक्त स्त्राव ज्यादा हो जाता है। पर्याप्त चिकित्सा के अभाव में यह स्थिति अत्यधिक रक्ताल्पता होने से जानलेवा तक बन जाती है।

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स्तनपान :
माता के स्तनों में दूध बनने से रक्त की खपत बढ़ जाती है, क्योंकि दूध का निर्माण रक्त से होता है। ऐसे में यह परामर्श दिया जाता है, कि स्तनपान कराने वाली माता को अतिरिक्त मात्रा में पोषक आहार का सेवन अवश्य करते रहना चाहिए, ताकि अधिक खून बनता रहे और वह बढ़ी हुई खपत को पूरा करता रहे। ऐसा न होने पर शरीर में खून की कमी होकर रक्ताल्पता का रोग लग जाता है। गर्भावस्था में भी रक्त की खपत बढ़ती है।

वे रोग जिनसे रक्ताल्पता उत्पन्न होती है :
कई रोग हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शरीर में खून की कमी कर देते हैं। इनमें मुख्यतः बवासीर, नकसीर, खून उल्टियाँ, कैंसर, पुराने घाव व फोड़े, हड्डियों के लाल गूदे में दोष, फेफड़ों से खून आना, मसूड़ों के रोग, गुर्दों के रोग, मल के साथ रक्त आना, पाचन विकार, विषैली औषधियों का प्रभाव, शीशे के बर्तनों में खाना बनाना तथा मलेरिया ज्वर, स्वाइन फ्लू, पतले दस्त, संग्रहणी, पेट में कीड़े होना, स्कर्वी रोग एवं विभिन्न संक्रामक रोग आदि।

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ये कुछ ऐसे कारण हैं, जो रक्ताल्पता उत्पन्न करते हैं। इनके अलावा कुछ रोग ऐसे भी होते हैं, जिनसे शरीर में या तो रक्त निर्माण की गति धीमी पड़ जाती है अथवा बना हुआ खून दूषित होता है या निकल जाता है।

रक्ताल्पता दूर करने वाले घरेलू उपाय-

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1 एक मुट्ठी गेहूं 24 घंटे पानी में भिगोकर, फिर जल की सहायता से सिल पर पीसकर (या मिक्सी में) सूती कपड़े में रखकर निचोड़ें। प्राप्त सफेद द्रव को 200 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर, उबाल कर स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पिएं। यह प्रयोग सुबह नाश्ते के साथ नियमित रूप से करें।

2. सोंठ और गुड़ मिलाकर खाने से खून बढ़ता है।

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3. अंकुरित चने तथा हरी सब्जियां और मौसमी फलों का भरपूर सेवन करें।

4 .आंवले का आधा कप रस में दो चम्मच शहद तथा थोड़ा-सा पानी मिलाकर दिन में एक बार नित्य पिएं।

5. फालसा खाने से रक्तवृद्धि होती है।

6. गाजर का रस 200 ग्राम में पालक का 100 ग्राम रस मिलाकर दिन में एक बार नित्य पिएं।

7. पालक का रस नित्य 3 बार 125 मि. ग्राम के अनुसार लेते रहने से रक्त क्षीणता दूर होती है। सब्जी या मूंग की दाल में इसकी पत्तियां डालकर भी सेवन किया जा सकता है।

8. प्याज के सेवन से भी खून की कमी दूर हो जाती है।

9. रक्ताल्पता में शहद का दिन में तीन बार पानी-मिलाकर सेवन करना भी उपयोगी है।

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