Kabj Ki Dawa

Kabj Ki Dawa

कब्ज़ की दवा

कब्ज़, कब्ज़ियत, मलावरोध, पखाना न आना या कम आना
(constipation)

परिचय-

Kabj Ki Dawa, kabj ke lakshan, kabj ke upay

सुबह-शाम पाखाना खुलकर न आना को कब्ज़ या कब्ज़ियत कहते हैं।

कारण-

यद्यपि इसके कई मुख्य कारण हैं। यकृत क्रिया ठीक न होना, ज्वर, पाण्डू रोग, अर्श, नाड़ की दुर्बलता, सुखण्डी या अस्थि विकृति, भोजन न खाना या कम खाना, शारीरिक परिश्रम न करना, बैठने का काम अधिक देर तक करना, रात्रि जागरण, काॅफी या चाय का सेवन अधिक करना, दुःख, शोक या सदमा का शिकार होना, वृद्धावस्था, गरिष्ठ भोजन आदि।

लक्षण-

पाखाना नहीं आता है, पाखाना सूखा हुआ कठोर आता है, अरूचि, सिर भारी, पेट भारी, पेट दर्द, शरीर टूटता प्रतीत होना, जीभ पर मैल जम जाना, मुँह का स्वाद बिगड़ जाना, मुँह से बदबू आना, सिर और कमर दर्द होना, ज्वर सुस्ती, अनिद्रा, मन्दाग्नि आदि लक्षण होते हैं। जिन्हें बराबर कब्ज़ रहती है वे मन लगाकर किसी काम को करने में असक्षम होते हैं।

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रोग की पहचान-

पाखाना खुलकर साफ न आना, सिर भारी रहना और अरूचि लक्षण होते हैं। जिनके आधार पर रोग को आसानी से पहचाना जा सकता है।

प्राकृतिक चिकित्सा-

Kabj Ki Dawa

1. कब्ज़ एक ऐसा रोग है, जिसे दूर करना चाहें तो पता चल जाता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही करें तो पता नहीं लगता है।

2. लेकिन इसे दूर करने के लिए बार-बार औषधियों का सेवन करना उतना ही हानिकारक है जितना कि स्वस्थ टाँग होने पर भी बैसाखी का सहारा लेकर चलने की आदत डालना और पाँवों की रही-सही शक्ति भी खो देना।

3. प्रारम्भ के 2-3 दिन बाद प्रतिदिन एनीमा की आदत भी कब्ज़ में हानिकारक है।

4. रोगी स्वयं शरीर में ही इस प्रकार की क्षमता पैदा करे, जिससे नियमित रूप से पाखाना आना प्रारम्भ हो जाये। इसके लिए निम्न निर्देशों का पालन करें। नित्य सुबह उठते ही ताम्रपात्र में रात का रखा हुआ जल आधा से एक लीटर तक पीयें। जलपान करके टहलने चले जायें। कम से कम 2-4 किलोमीटर अवश्य टहलें। टहलकर वापिस जाकर शौच के लिए जायें फिर स्नान करें। स्नान शीतल जल से करें।

5. सुबह नाश्ते में फल और थोड़ा दूध भी ले सकते है।

Kabj Ki Dawa

6. दोपहर को शामक भोजन के साथ कुछ फल लें। इसे भोजन का अंग समझ कर नियमित लेते रहें।

7. महीनों पहले तोड़े गये फल जो हमें डिब्बों में बंद मिलते हैं, उनसे कहीं अधिक उपयोगी मौसम के ताजा फल अधिक उपयोगी होते हैं।

8. फलों से लाभ तभी होता है, जब उसे भूख लगने पर खाया जाये। कुछ लोग भोजन से आधा घंटा आगे और पीछे भी खाते हैं यह सही विधि नहीं है।

9. यदि पेट भरा हो तो फल मत खायें। ऐसा करने से हानि होती है, जो ऐसा करते हैं, वही अमरूद से जुकाम, खीरे-ककड़ी से जूड़ीताप, आम से फोड़े-फुन्सियाँ और खरबूजे से हैज़ा होने की बात करते हैं। इसलिए भरा पेट होने पर ऐसा मत करें।

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10. दिनचर्या को नियमित करें। पाखाना के लिए निर्धारित समय को और अधिक तत्परता से पालन करें।

11. कई लोग पाखाना हाज़त होने पर पाखाना करने जाते हैं। यह सोच ही कब्ज़ को पैदा करती है।

12. आप निर्धारित समय पर पाखाना करने जायें। चाहे पाखाना आये या नहीं आप पाखाना करने के लिए कुछ देर अवश्य बैठें। यदि 10 मिनट इंतजार करने के बाद भी पाखाना नहीं आता है, तो बाद में 5 मिनट के बाद पाखाना आ जाता है। एक समय तो ऐसा भी आता है कि आपको पाखाना की हाज़त नही है, लेकिन निर्धारित समय पर शौचालय का दरवाजा खोलते ही हाज़त हो तो पाखाना खुलकर आ जायेगा।

13. यदि इस प्रकार अभ्यास हो तो नित्य तीन बार तक का अभ्यास कर सकते हैं। ऐसा करने से कब्ज़ सदा के लिए दूर हो जायेगी।

कब्ज़ से छुटकारा पाने के लिए घरेलू चिकित्सा-

1. नित्य रात को ईसबगोल की भूसी 10 ग्राम दूध में घोलकर पिलायें।

2. एरण्ड का तेल 5 से 10 ग्राम गर्म दूध में मिलाकर नित्य रात को लें। आशातीत लाभ होगा।

3. बेल का गूदा 100 ग्राम नित्य रात को खाने से आँत्रों का कड़ा मल भी मुलायम होकर निकल जाता है और कब्ज़ दूर हो जाती है।

4. संतरे और मौसमी का रस नित्य पीने से कब्ज़ दूर हो जाती है।

5. नित्य लीची खाने से कब्ज़ दूर हो जाती है।

6. पके अमरूद अधिक से अधिक खायें लाभ होगा।

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