Kabj Ka Ilaj

Kabj Ka Ilaj

कब्ज़ का इलाज

Constipation, Constipation In Hindi, Kabj Ki Dawa

उदर रोगों में मुख्य व्याधि मलावरोध अर्थात् कब्ज़ है। इस रोग के शिकार लगभग 80 प्रतिशत मनुष्य तो मिलेंगे ही। इसमें स्त्री या पुरूष का भी कुछ भेद नहीं है। यद्यपि आयुर्वेदज्ञों ने मलावरोध को कोई स्वतंत्र रोग नहीं माना है, तथापि अब इस युग में तो यह एक प्रकार से महारोग ही है।

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कब्ज़ की घरेलू चिकित्सा-

Kabj Ka Ilaj

1. छोटी पीपल और अजमोद 40-40 ग्राम, हरड़ 150 ग्राम, सोंठ 30 ग्राम, सेंधा नमक और काला नमक 5-5 ग्राम लेकर कूट, कपड़-छान करके रखें।
मात्रा- 4 से 10 ग्राम तक गर्म पानी के साथ फंकी लेनी चाहिए। इससे कब्ज़ दूर होता है और उदरशूल, अफारा आदि में भी लाभ होता है।

2. बड़ी हरड़ का वक्कल, सनायपत्र और एलुआ 20-20 ग्राम सेंधा नमक 10 ग्राम। हरड़ को घी के साथ भूनें और फिर सबको कूट-छान कर एकत्र करें। यह अभयादि चूर्ण कब्ज़ को दूर करने में अत्यंत उपयोगी है।
मात्रा- 5 ग्राम से 10 ग्राम तक सुखोष्ण पानी के साथ रात्रि में शयन से पूर्व लेना चाहिए। कब्ज़ शीघ्र नष्ट होता है।

3. हरड़ का वक्कल, छोटी पीपल और काला नमक, तीनों समान भाग लेकर कूट-छान लें तथा चूर्ण करके रखें।
मात्रा- 5 से 10 ग्राम, गर्म पानी के साथ सेवन करने से कब्ज़ दूर हो जाता है। अपच, उदर का भारीपन, दर्द आदि उपसर्गों में भी अपेक्षित लाभ होता है।

4. नौसादर और काला नमक 25-25 ग्राम, भुनी हुई हींग और टाटरी 6-6 ग्राम तथा ताजा शुद्ध पानी 1 बड़ी बोतल। सभी द्रव्यों को महीन पीसकर पानी में डालें। इसे 2-3 दिन धूप में रखना चाहिए। तरल तैयार है।
मात्रा- 2 चम्मच से 8 चम्मच तक रोग और बलाबल के अनुसार पिलानी चाहिए। इसके सेवन से कब्ज़ दूर होता है तथा अपच, अजीर्ण, मन्दाग्नि आदि में भी बहुत लाभ करता है। यदि पानी के स्थान पर सौंफ के अर्क में डालकर तरल बनायें तो अधिक गुणकारी हो जाता है।

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5. निशोथ का चूर्ण 50 ग्राम, गुड़ 200 ग्राम तथा अमलताश के गूदे से बनाया हुआ क्वाथ आधा लीटर लेकर मन्दाग्नि पर पकायें और जब पकते-पकते अवलेह बन जाये, तब उतार कर ठंडा करें और सुरक्षित रखें।
मात्रा- 1 से 3 ग्राम क्वाथ सेवन करने से खुलकर दस्त हो जाता है। आवश्यक होने पर अधिक मात्रा भी दी जा सकती है। रोग की स्थिति के अनुसार अनुपान भी निश्चित किया जा सकता है। यह क्वाथ पेट के भारीपन, अपच आदि में भी उपयोगी रहता है।

6. सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, अजवाइन, सेंधा नमक, काला जीरा, श्वेत जीरा और हींग सभी समान भाग लेकर हींग और दोनों की जीरों को भून लें। फिर सब द्रव्यों को कूट-छान कर एकत्र घोट लें। आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध हिंग्वाष्टक चूर्ण यही है। इसके सेवन से कब्ज़ दूर होती है, अजीर्ण और मन्दाग्नि आदि उदर-विकार नष्ट होते हैं।
मात्रा- 1 से 2 ग्राम तक। मन्दाग्नि में लगभग 1 ग्राम चूर्ण भोजन के प्रथम ग्रास के साथ खाना चाहिए। वातज विकार भी इस प्रकार सेवन करने से नष्ट होते हैं। कुछ के मत में इसकी 1 मात्रा गाय के घी में मिलाकर भात अथवा खिचड़ी के साथ लेने से पर्याप्त लाभ होता है। भोजन के पश्चात् अन्न पचाने के हेतु भी इसे खा सकते हैं।

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