Kaan Ki Samasya Ka Desi Ayurvedic Ilaj

Kaan Ki Samasya Ka Desi Ayurvedic Ilaj

कान बहना, कर्णस्त्राव, कान का बहना, कान से पीप आना
ओटोर्हिया(Otorrhoea)

परिचय-

कर्णशूल, शिरःशूल, कानों में सूजन आदि के बाद ही कर्णस्राव होता है। स्राव आते ही पीड़ा कम हो जाती है। लेकिन पर्दा फटना, कानों से कम सुनाई देना कानों से शैं..शैं..की आवाज आना आदि लक्षण होते हैं। इस स्थिति में निम्न योग उपयोगी हैं।

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चिकित्सा-

Kaan Ki Samasya Ka Desi Ayurvedic Ilaj

1. अमलतास के क्वाथ को कान में डालने से पीप आना बंद हो जाता है।

2. कत्थे का चूर्ण कान में भुरकाने से कान बहना ठीक हो जाता है।

3. कलिहारी नींबू के रस में मिलाकर कान में टपकाने से पीप आना बंद हो जाता है। इससे कीड़ा भी मर जाता है।

4. कौड़ी की राख को कान में डालने से कान का घाव भरकर पीप आना ठीक हो जाता है।

5. खश की घास का काढ़ा कान में टपकाने से पीप आना ठीक हो जाता है।

6. चूने के पानी में दूध मिलाकर नाक या कान में पिचकारी करने से नाक और कान बहना बंद हो जाता है।

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7. कली चूना 60 मि.ग्रा. को गोमूत्र में मिलाकर, कान में डालकर एक घंटे तक रोगी लेट जाये जिससे यह तरल बाहर न निकले। एक घंटे बाद उसे बाहर निकाल दें। इस प्रकार प्रत्येक तीसरे दिन इस योग को देने से धीरे-धीरे कान बहना ठीक हो जाता है।

8. ज्वार का रस गर्म करके कान में डालने से कान का स्राव(पीप आना) ठीक हो जाता है।

9. मरोड़ फली के चूर्ण को एरण्ड के तेल में मिलाकर कान में डालने से कान बहना बंद हो जाता है।

10. माजूफल को कूटकर सिरके में औटाकर कान में डालने से कान बहना बंद हो जाता है।

11. मूसाकानी के रस को कान में डालने से काम का दर्द ठीक हो जाता है।

12. मेथी के बीजों को दूध में पीस-छानकर गुनगुना करके कान मंे डालने से पीप आना बंद हो जाता है।

13. राल वृक्ष की छाल के चूर्ण में कपास के बीजों का रस औ शहद मिलाकर कान में डालने से कर्णस्राव ठीक हो जाता है।

14. समुद्रफेन, के चूर्ण को कान में डालने से कान बहना बंद हो जाता है।

15. सहजन की छाल के ताजा रस को कान में डालने से कान की पीड़ा ठीक हो जाती है। सहजन के गोंद के चूर्ण को कान में छिड़कने से पीप आना ठीक हो जाता है।

16. लोध्र के चूर्ण को कान में छिड़कने से कान बहना बंद हो जाता है।

Kaan Ki Samasya Ka Desi Ayurvedic Ilaj

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17. हल्दी और फिटकरी 1.20 के अनुपात में मिलाकर नली द्वारा कान में फूंकने से पुराना कर्णस्राव ठीक हो जाता है।

18. तिलों का तेल 1 भाग और हुल-हुल का रस 4 भाग मिलाकर हल्की आंच पर सिद्ध करके कान को साफ करके इसकी 2-4 बँूदें कान में डालने से कर्णस्राव और बहरापन ठीक हो जाता है।

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