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Jangh Ke Dard Ko Door Karne Ke Gharelu Upay

जाँघ के दर्द को दूर करने के घरेलू उपाय

उरूस्तम्भ रोग, जाँघ के रोग(Thighs Disease)
परिचय-

उरूस्तम्भ में ‘उरू’ का अथ है जाँघ। ‘स्तम्भ’ का अर्थ है स्थिर रहना, ठहरना, संज्ञाहीन होना आदि। इस प्रकार उरूस्तम्भ का अर्थ जाँघ या जाँघों का स्थिर हो जाना या संज्ञाहीन होना है। वस्तुतः चिकित्सीय क्षेत्र में यही शब्दार्थ अनुकूल भी है, क्योंकि यह नाम(उरूस्तम्भ) उस रोग विशेष को दिया गया है, जिसमें रोगी अपने जाँघों को गतिशील करने(संचालित करने) में पूर्णतः असमर्थ होता है। अस्वाभाविक आहार-विहार एवं अनियमित दिनचर्या ही इस रोग के मुख्य कारण हैं।

लक्षण-

इस रोग में दोनों जाँघें अकड़ जाती हैं। ये अत्यंत भारी, संज्ञाहीन एवं इनमें पीड़ा होती है। ये जाँघ किस ओर की है, ऐसा रोगी को प्रतीत होता है। साथ ही अंगों का टूटना, तन्द्रा, वमन, अरूचि, ज्वर, पाँवों की ग्लानि, पाँवों की मन्दता, हिलने-डुलने, चलने एवं बैठने में भी तीव्र कष्ट होता है। यह ‘आढ्यवात’ और ‘महावात’ के नाम से भी जाना जाता है।
रोग होने से पहले अधिक नींद आना, क्रिया-हीनता, ज्वर में रोयें खड़े होना। अरूचि, वमन, पिण्डलियों एवं जाँघों में दर्द होना आदि लक्षण भी होते हैं।

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अरिष्ट एवं अशुभ संकेत-

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यदि रोगी को उरूस्तम्भ में दाह, पीड़ा, सुई चुभने जैसी पीड़ा हो, रोगी स्वयं कांपता रहता रहे, तो घातक सिद्ध हो सकता है। रोग पुराना होने के साथ-साथ कष्ट साध्य होता जाता है।

चिकित्सा-

इसमें अन्य वात पीड़ा की भांति सामान्य तेल की मालिश, वमन कराना, जुलाब आदि न दें। इससे कष्ट में वृद्धि होगी। विशेष प्रकार के निर्देशित तेल ही उपयोगी होंगे।

1. असगन्ध, आक और नीम की जड़ को गोमूत्र में पीसकर जाँघों एवं कूल्हों पर लेप करने से उरूस्तम्भ ठीक हो जाता है।

2. सरसों को शहद में पीस और गर्म करके आहिस्ता-आहिस्ता लेप करने से उरूस्तम्भ में लाभ होता है।

3. धतूरे के पत्ते एवं सरसों के पानी में पीसकर जाँघों पर मामूली गर्म लेप करने से उरूस्तम्भ ठीक हो जाता है।

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4. पीपरामूल, भिलावे और पीपर का काढ़ा शहद में मिलाकर पीने से अथवा इन तीनों को तिल पर पीसकर शहद मिलाकर प्रतिदिन दो मात्रायें चाटने से उरूस्तम्भ में आराम आ जाता है। भिलावों को प्रयोग से पहले शुद्ध कर लें।

5. जिस ओर से नदी की धारा आती हो, उसकी विपरीत दिशा में 1-2 किलो मीटर चलने से उरूस्तम्भ रोग ठीक हो जाता है।

Jangh Ke Dard Ko Door Karne Ke Gharelu Upay

6. हरड़, बहेड़ा, आमला और कुटकी का समभाग चूर्ण 3 ग्राम को शहद 6 ग्राम में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चाटने से उरूस्तम्भ में लाभ होता है।

7. महायोगराज गुग्गल नियमित सेवन करने से उरूस्तम्भ में लाभ होता है।

8. आक की जड़ को गोमूत्र में पीसकर जाँघों एवं कूल्हों पर लेप करने से उरूस्तम्भ ठीक हो जाता है।

9. असगन्ध और देवदारू को गोमूत्र में पीसकर लेप करने से उरूस्तम्भ ठीक हो जाता है।

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