Hysteria Ka Desi Gharelu Ayurvedic Upchar

Hysteria Ka Desi Gharelu Ayurvedic Upchar

हिस्टीरिया, योषापरमार(Hysteria)-

यह रोग स्त्रियों को होने वाली समस्या है, क्योंकि इसका संबंध गर्भाशय में विकृति होने से रजोविकार(मासिकधर्म में गड़बड़ी) होने से होती है। पति से भरपूर प्यार नहीं मिलता, किसी भी कारण से संभोग की इच्छा की पूर्ति नहीं होती या किसी भावना को दबाये रखने के लिए बाध्य होती है, मजबूर होती है, तो स्नायुतंत्र में एक प्रकार का तनाव हो जाता है। इन कारणों से एक या एक से अधिक कारणों का शिकार होने से कोई भी स्त्री इस रोग से ग्रस्त हो सकती है।
कभी-कभी वैधव्य अवस्था में अधिक क्रोध करने से या स्त्री को अजीर्ण रोग आदि के कारण भी इसके लक्षण प्रकट होते हैं।

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हिस्टेरिया के प्रमुख कारण-

1. बिना किसी कारण के हंसना, रोना या चीखना।

2. सगे संबंधियों पर व्यर्थ दोषारोपण और स्वयं को दोषी मानकर बार-बार क्षमा प्रार्थना करना।

3. भाव-भंगिमा में ऐसा परिवर्तन होना कि सामान्य या अनजान व्यक्ति को भूतावेश मान लें।

4. दौरा पड़ने से पहले पेट से ऊपर की ओर गोला जैसा उठता अनुभव करती है।

5. रोगिणी में संभोग की इच्छा बलवती होती है।

6. दौरा के कारण रोगिणी मूच्र्छित हो जाती है। इसी कारण से इसकी भी चर्चा मिर्गी रोग के साथ की गई है। लक्षणानुसार इसकी भी चिकित्सा मूच्र्छा चिकित्सा की भांति ही करें।

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मिर्गी, मूच्र्छा तथा हिस्टीरियानाशक योग-

1. अरीठे को कूट-छान लें। इसकी नस्य प्रतिदिन लेने से मिर्गी व हिस्टीरिया की समस्या दूर हो जाती है।

2. दौरे के समय राई(रैंची) पीसकर किसी पतले कपड़े में पोटली में बांधकर सुंघाये। रोगी शीघ्र होश में आ जायेगा।

3. दौरे के समय ढाक की जड़ पानी में घिसकर नाक में टपकाने से मिर्गी ठीक हो जाती है।

4. महुए की आधी गुठली और काली मिर्च 2.5 दाना पानी में पीसकर नाक में टपकाने से हिस्टीरिया में लाभ पहुंचता है।

5. जटामांसी महीन पीसकर नाक में नस्य या धूनी देने से पुरानी मिर्गी भी ठीक हो जाती है।

6. केवड़े के बालों का चूरा तम्बाकू की भांति सूंघने से मिर्गी ठीक हो जाती है।

7. सफेद प्याज का रस नाक में डालने से मिर्गी ठीक हो जाती है। आंखों में इसी का अंजन भी करें।

8. लहसुन 10 ग्राम और काले तिल 30 ग्राम पीसकर प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन करने से 30-40 दिन में मिर्गी ठीक हो जाती है।

9. ब्राह्मी के पत्तों का रस 15 मि.ली. शहद 15 ग्राम में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से मिर्गी निश्चित रूप से ठीक हो जाती है। धैर्य के साथ सेवन करायें। पूर्ण सफल योग है। जल्दबाजी में चिकित्सा बंद न करें।

10. दूध में शतावर उबाल कर प्रतिदिन पीने से मिर्गी ठीक हो जाती है।

11. बचका पिसा-छना चूर्ण 10 ग्राम, असमान मात्रा में शहद और घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से मात्र 3-4 दिन में हिस्टीरिया की समस्या में लाभ पहुंचने लगता है।

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12. जिस हिस्टीरिया व मिर्गी के रोगी की छाती में कम्पन्न हो, हाथ-पैर शीतल हों, आंखों में पीड़ा हो और पसीना आये, उन्हें नियमित रूप से दशमूल क्वाथ(दशमूल का काढ़ा) पिलाने से चमत्कारिक लाभ होता है।

13. असली हींग 10 ग्राम कपड़े में बांध कर गले में हार की भांति डालने से बच्चा हिस्टीरिया से मुक्ति पा लेता है।

14. ब्रह्मी के पत्तों का रस 15 मि.ली., कुलींजन या अकरकरा का चूर्ण 3 ग्राम, शहद 3 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम देने से मिर्गी ठीक हो जाती है। यह योग मिर्गी, उन्माद और चित्त भ्रम में समान रूप से उपयोगी है।

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