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How To Work Pancreas In Human Body In Hindi

पैनक्रियाज इंसान के शरीर में कैसे कार्य करता है?

पैनक्रियाज(क्लोम ग्रन्थि) के कार्य-
(Work of Pancreas)

शरीर में एक ग्रन्थि होती है, जिसको क्लोम ग्रन्थि(पैनक्रियाज या अग्नाशय) कहते हैं। यह नाभि के 8 से.मी. ऊपर आमाशय के पीछे कमर के पहले दूसरे कशेरूका(Vertebra) के सामने होती है। इसकी लम्बाई 15 से.मी., चैड़ाई 2.5 से.मी. और वज़न 125 से 150 ग्राम तक होता है। इस ग्रन्थि में एक नाली होती है, जो उसके बायें सिरे से शुरू होकर उसके दायें सिरे की ओर आकर और पित्ताशय की नलिका के साथ मिलकर 12 अंगुलि अंत में जाकर खुलती है।

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इस ग्रन्थि के रस का यह गुण है कि यह भोजन के चिकने अंशों(चर्बी, एल्ब्युमिन और सरेस की भाँति अंशों) को पचाने योग्य बनाती है। इस ग्रन्थि से दो प्रकार के रस निकलते हैं। एक को क्लोम रस(pancreatic juice) और दूसरे को इन्सुलिन(Insulin) कहते हैं। ये शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स को शरीर का अंश बनाकर रक्त में शक्कर का संतुलन बनाये रखती है। जब किसी कारण से यह ग्रन्थि उचित मात्रा में इन्सुलिन रस नहीं बना पाती तो शक्कर(कार्बोहाइड्रेट्स) जो भोजन में होती है, हज़म करके शरीर का अंश नहीं बना पाती, जिसके कारण रक्त में शक्कर की मात्रा बढ़ जाती है और बाद में मूत्र के साथ निकलने लग जाती है। इस रोग को मधुमेह कहते हैं।

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इस रोग के कई प्रकारों में कई बार मूत्र में शक्कर नहीं होती परन्तु रक्त में शक्कर की मात्रा बहुत अधिक होती है। कई अवस्थाओं में मूत्र में बहुत अधिक मात्रा में शक्कर होती है, परन्तु रक्त में शक्कर नहीं होती है।

रोगियों से पूछने पर पता चलता है कि उनमें से तिहाई के माता-पिता या पूर्वजों को यह रोग होता है। माता-पिता दोनों को मधुमेह का रोग हो तो उनकी सन्तान भी इस रोग से ग्रस्त हो जाती है। दुर्बल मनुष्य की अपेक्षा मोटे मनुष्य इस रोग से अधिक ग्रस्त होते हैं। बड़े-बड़े शहरों में रहने वाले लोग जो सारा दिन बैठकर व्यापार करते हैं, उनको यह रोग अधिक होता है।

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प्रत्यक्ष परीक्षणों के समय देखा गया है कि मधुमेह रोग में वास्तविक विकृति रक्त में सम्पन्न होती है और रक्त में शक्कर की मात्रा क्रमशः बढ़ती है। जब रक्त में शक्कर की मात्रा सामान्य रूप से बढ़ जाती है, तो वह रक्त से छनकर मूत्र में आना शुरू करती है। निरोग व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज एक निश्चित अनुपात में मौजूद रहता है जो खाँड(सफेद चीनी), मीठे पदार्थ या मिश्रीयुक्त भोजन, पेय और शर्करा वाले पदार्थ के प्रयोग से उत्पन्न होता है। जहां भोजन के कुछ समय बाद रक्त में ग्लूकोज बहुत थोड़ा बढ़ता है, वहां उपवास, व्रत, अनशन आदि में घटता है।

साधारण स्वस्थ शरीर में यकृत और इन्सुलिन द्वारा शक्कर सन्तुलन की यह क्रियाविधि इस अनुपात से नियंत्रित होती रहती है कि प्रत्येक दशा में यह मात्रा प्रति 100 मि.लि. रक्त में 80 से 120 मि.ग्रा. के मध्य दिखाई पड़ती है। ध्यान रहे कि 120 मि.ग्रा. से अधिक शक्कर, मधुमेह होने वाला है, इस स्थिति की ओर संकेत करता है तथा 80 मि.ग्रा. से कम शक्कर उससे विपरीत हाइपोग्लाइसीमिया या अल्प ग्लूकोज रक्तता का लक्षण है, जो इन्सुलिन के अधिक इंजेक्शन लगाने से होता है। यदि अधिकतम रक्तस्थ शक्कर की मात्रा में 10-15 मि.ग्रा. का अंतर नहीं होकर 50 मि.ग्रा. या उससे अधिक अंतर निश्चय रूप से हो तो मधुमेह हो सकता है। इसलिए ही भोजन के बाद यदि रक्त में 120 मि.ग्रा. से अधिक तथा उपवास की दशा में 130 मि.ग्रा. की मात्रा से अधिक हो तो मधुमेह समझें। उपवा की दशा में 130 मि.ग्रा. की मात्रा से आना श्रमपूर्ण है, क्योंकि भोजन के बाद लिये गये रक्त मे यह मात्रा स्वस्थ दशा में भी विद्यमान होती है।

How To Work Pancreas In Human Body In Hindi

अतः निश्चयात्मक निदान के लिए ग्लूकोज को रोगी को भरपेट खिलाकर या किसी भोजन में मिलाकर भरपेट खिलाकर तब रक्त का नमूना लेकर उसकी परीक्षा करनी चाहिए। ऐसी अवस्था में यदि प्रति 100 मि.ली. रक्त में शर्करा 180 मि.ग्रा. से अधिक हो तथा मूत्र में भी शर्करा आ रही होने की निश्चयात्मक जाँच पाॅजिटिव हो तो मधुमेह रोग समझेें।

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