High Blood Pressure Ka Ilaj

High Blood Pressure Ka Ilaj

हाई ब्लड प्रेशर का इलाज

उच्च रक्तचाप, हाई ब्लड प्रेशर
(High Blood Pressure)

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इसे व्यानबलवृद्धि या हाइपरटैन्सन(भ्लचमतजमदेपवद) भी कहते हैं। सामान्यतः एक युवा स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप 120/80 एम.एल. आॅफ एच.जी. रहता है। वैसे आयु के विभिन्न भागों में रक्तचाप कम-अधिक रहता है, जैसे एक 12 वर्ष के बालक का रक्तचाप 100/70, 16 वर्ष के युवक का 110/75, 25-30 वर्ष के युवक का 120/80, 40 वर्ष के प्रौढ़ की 127/86 एम.एम. आॅफ एच.जी. रहता है। सिस्टोलिक और डायास्टालिक प्रेशर में प्रायः 40 का अंतर होता है तथा आयु $ 90 जोड़कर सिस्टोलिक प्रेेशर होता है।
सिस्टोलिक प्रेशर स्थाय रूप से 140 मि.मी. पारद से अधिक तथा डायास्टोलिक प्रेशर 90 मिलीमीटर से ज्यादा होने पर उच्च रक्तचाप समझा जाता है। रक्तचाप का बढ़ना कोई स्वतंत्र रोग नहीं है, बल्कि शरीर में पनप रहे अन्य घातक रोगों का लक्षण है, परिणाम मात्र है। नींद न आना, सिर में दर्द, परिश्रम करने पर साँस फूलना, गुस्सा अधिक आना मुख्य लक्षण हैं।

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घरेलू व आयुर्वेदिक चिकित्सा-

High Blood Pressure Ka Ilaj

1. अश्वगंधादि कषाय- अश्वगंधा, पुनर्नवा, गोखरू, हरीतकी, गुडूची, आँवला, शंखपुष्पी, जटामाँसी, रसोन, शतावरी, भृंगराज, मुलेहठी, मंडूकषर्णी, पिप्लीमूल तथा घृतकुमारी क्वाथ सुबह-शाम दें

2. एक पोथी लहसुन का स्वरस 10-20 बूंद सुबह-शाम पीने से रक्तवाहिनियों में लचक आकर बढ़ा हुआ रक्तचाप कम कर देता है। यह कोलेस्ट्रोल वृद्धि को भी नियंत्रित करता है।

3. भृंगराज का स्वरस 2-4 चम्मच सुबह-शाम शहद मिलाकर पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।

4. गोखरू पंचांग का चूर्ण 1-1 छोटा चम्मच सुबह-शाम लेने से मूत्र साफ आता है और बढ़ा हुआ रक्तचाप कम हो जाता है।

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5. सहजन के पत्तों का रस या क्वाथ 2-4 चम्मच सुबह-शाम पीने से बढ़ा हुआ रक्तचाप घटकर सामान्य हो जाता है।

6. शंखपुष्पी का स्वरस 1-2 चम्मच सुबह-शाम जल के साथ लेने से लाभ होता है।

7. शंखपुष्पी पंचांग चूर्ण 1-1 छोटा चम्मच सुबह-शाम जल के साथ लेने से लाभ होता है।

8. जटामांसी का क्वाथ 5-5 मि.ली. सुबह-शाम पीने से भी लाभ होता है।

9. सर्पगन्धामूल का चूर्ण 250-500 मि.ग्रा. सुबह-शाम जल के साथ लेने से लाभ होता है।

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