Hernia Ke Liye Desi Ayurvedic Upchar Kare

Hernia Ke Liye Desi Ayurvedic Upchar Kare

आँत उतरना, आन्त्र वृद्धि
हर्निया, Hernia
परिचय-

जब आँत अपने स्थान से खिसक जाती है तो इसे आँत उतरना कहते हैं। कभी आँत उतरकर पेडू में तो कभी अण्डकोषों या नाभि प्रदेश में आ जाती है। स्थान के अनुसार यह कई प्रकार का होता है जैसे अम्बेलिकल, स्टैगुलेटेड आदि। इसमें रोगी को बहुत कष्ट होता है। यह कष्ट तब तक होता है, जब तक कि आँत को में किसी भी चिकित्सा से अपने स्थान पर पहुँचा नहीं दिया जाता है। यद्यपि इस चिकित्सा से स्थायी लाभ नहीं होता है। थोड़ी-सी असावधानी से रोगी को पुनः कष्ट होता है। अस्थायी लाभ के लिए हर्निया ट्रस लगायी जाती है। अब इसकी घरेलू चिकित्सा लिखी जा ही है।

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चिकित्सा-

Hernia Ke Liye Desi Ayurvedic Upchar Kare

1. छिरबेल, यह एक प्रकार की झाड़िनुमा बेल होती है। यह हिमालय, बर्मा और कोंकण में पायी जाती है। इसकी जड़ों का क्वाथ पीने से हर्निया में लाभ होता है। इसमें आँत्रों को सिकोड़ने की अद्भुत क्षमता होती है।

2. यदि आँत उतरकर अण्डाकोषों में आ जाये, तो बहेड़ों के चूर्ण का लेप करें। पहले दिन से ही लाभ होने लगता है। यह लेप नित्य पूर्ण लाभ होने तक जारी रखें।

Hernia Ke Liye Desi Ayurvedic Upchar Kare

3. भांगरा(भृंगराज) बरसात के दिनों में सब जगह पैदा होता है, लेकिन गीली जमीन में पानी के आसपास वर्ष भर उपलब्ध होता है। पौधे आधे से दो फुट तक लम्बे होते हैं। कुछ पौधे सीधे खड़े होते हैं और कुछ जमीन पर फैले हुए होते हैं। इसके पंचांग का स्वरस 3.5 से 7 मि.ली. तक नित्य सुबह-शाम कालीमिर्च का योग देकर प्रयोग करने से हर्निया अर्थात् आँत्रवृद्धि में लाभ होता है।

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4. इन्द्रायण के फलों का चूर्ण 125 से 250 मि.ग्रा. या मूल चूर्ण 1-3 ग्राम सुबह-शाम लेने से आंत्र उतरना ठीक हो जाता है। अनुपान में सोंठ का चूर्ण एवं गुड़ का प्रयोग करें।

5. तेज पत्तों का चूर्ण 1 से 3 ग्राम नित्य सुबह-शाम शहद के साथ लेने से आँत्र की शिथिलता दूर हो जाती है और आँत उतरना ठीक हो जाता है।

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