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Hawa Pani Badalne Ke Karan Hone Wale Rog

हवा पानी बदलने के कारण होने वाले रोग

जलवायु परिवर्तन विकार या रोग-
(Climate Changing Diseases)

परिचय-

आये दिन सुना जाता है कि स्थान परिवर्तन से, जलवायु परिवर्तन से, यहाँ तक कि एक ही स्थान पर रहते हुए मौसम परिवर्तन से भी व्यक्ति अस्वस्थ हो जात है, तरह-तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से व्यक्ति को जूझना पड़ता है। ऐसे लोग आबो हवा या जलवायु के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। सच में ऐसे लोग उपरोक्त परिस्थितियों में अस्वस्थ हो जाते हैं और श्वसन संस्थान एवं पाचन संस्थान से संबंधित रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। इनके अतिरिक्त भी अनेक कष्ट देखे जाते हैं। ऐसे शारीरिक प्रकृति वालों को निम्न योगों से शीघ्र ही लाभ प्राप्त होता है।

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प्राकृतिक चिकित्सा-

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1. 40 लीटर पानी में 250 ग्राम कली चूना घोलकर छोड़ दें। इसमें से निथरे हुए पानी पीते रहने से जलवायु परिवर्तन से, मौसम परिवर्तन से देश से विदेश पहुंचने पर किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं होता है।

2. यदि स्थान परिवर्तन या मौसम परिवर्तन से कष्ट उभर चुका हो तो 125 मि.ग्रा. कली चूने को डेढ़ ग्राम जीरे के चूर्ण में मिलाकर नित्य सुबह-शाम सेवन करने से सब विकार मिट जाते हैं।

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3. जहर मोहरा खताई प्रतिमात्रा 250 से 500 मि.ग्रा. तक की मात्रा रोजाना लेने से इससे बहुत समय के लिए शारीरिक क्षमता इतनी दृढ़ हो जाती है कि जलवायु परिवर्तन, मौसम परिवर्तन का कोई दुष्प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता है। यदि कोई विकार ग्रस्त हो चुका है, तो इसके सेवन से स्वस्थ हो जाता है। ऐसे दुष्प्रभाव से उत्पन्न जीर्ण ज्वर, अतिसार, संग्रहणी, सूजन, निर्बलता इत्यादि उत्पन्न सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

Hawa Pani Badalne Ke Karan Hone Wale Rog

4. सोंठ और जवारखार का समभाग मिश्रित चूर्ण का नित्य सुबह-शाम गर्म जल के साथ सेवन करने से विभिन्न देशों के जल पीने से उत्पन्न दुष्प्रभाव मिट जाते हैं। मिश्रित योग में से प्रतिमात्रा 1-2 ग्राम लें।

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