Gathiya Ka Ilaj

Gathiya Ka Ilaj

गठिया का इलाज(Gout)

Gathiya Ka Ilaj, Gathiya Ki Dawa, Gout Treatment

यह रोग प्रायः पाँव के अंगूठे के जोड़ों से आरम्भ होता है। इसके बाद शरीर के अन्य जोड़ों में भी दर्द होने लगता है। नींद कम आना, अजीर्ण, हृदय अधिक धड़कना, हाथ-पाँव की अंगुलियों में फड़कन, जोड़ में तीव्र पीड़ा व जलन व शोथ, रोग का पाँव के अंगूठे से शुरू होना, रोग का लगभग 40 वर्ष की अवस्था में प्रारम्भ होना आदि लक्षण इस रोग में मिलते हैं। यह रोग अचानक शुरू होता है। इस रोग में रक्त में यूरिक एसिड(Uric Acid) की मात्रा बढ़ जाती है।

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घरेलू चिकित्सा-

Gathiya Ka Ilaj

1. नीम, गिलोय, वासा तथा पिप्पली बराबर मात्रा में महीन चूर्ण कर लें। 2-2 ग्राम दिन में 3 बार दें।

2. गुडूची का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन 3 बार शुद्ध गुग्गुलु 1 ग्राम के साथ दें।

3. ताजा गोमूत्र प्रतिदिन 3 बार 1-1 कप पीना लाभदायक है।

4. गिलोय स्वरस 2-2 चम्मच प्रतिदिन 3 बार खाली पेट पीने से लाभ होता है।

5. हरीतकी चूर्ण 3-3 ग्राम समभाग गुड़ मिलाकर सुबह-शाम पानी के साथ दें।

6. प्रातःकाल उठते ही एक गिलास ताजे पानी में एक नींबू का रस निचोड़ कर पीने से यूरिक एसिड का निष्कासन होता है।

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7. गुडूची, सोंठ और धनिया बराबर-बराबर लेकर क्वाथ बनाकर 4-4 चम्मच सुबह-शाम दें।

8. वासापत्र, गुडूची और आरकधफल मज्जा बराबर-बराबर लेकर क्वाथ बनाकर 4-4 चम्मच सुबह-शाम दें।

9. काले तिल भूनकर पीसकर दूध में मिलाकर उसका लेप बनाकर पीड़ित सन्धियों पर लगाना चाहिए।

10. गोखरू और गिलोय बराबर-बराबर लेकर चूर्ण बनाकर 1-1 चम्मच 2 बार दें।

11. अश्वगंधा, सोंठ और बिधारा बराबर-बराबर लेकर चूर्ण बना लें। 1-1 चम्मच प्रतिदिन 2 बार दूध के साथ दें।

12. केशर का महीन चूर्ण आधा-आधा ग्राम सुबह-शाम 1-1 कप सुखोष्ण दूध में मिलाकर पिलायें।

13. हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा 2-2 चम्मच दिन में 2-3 बार दें। इसे हरसिंगार का पारिजात तथा शेफाली भी कहा जाता है।

14. निगुण्डी के पत्तों का काढ़ा 2-2 चम्मच दिन में 3 बार।

15. अश्वगंधा 10 ग्राम, बिधारा 10 ग्राम, सुरंजान क्षीरी 10 ग्राम तथा मिश्री 90 ग्राम महीन कर लें। 1-1 बड़ा चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ दें।

 

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