chetanherbal.com

Gala Baithne Ke Liye Gharelu Upay Kya Hai

गला बैठने के लिए घरेलू उपाय क्या हैं?

आवाज बैठना, स्वरभंग, गला बैठना
(Hoarseness)

परिचय एवं लक्षण-

हम जो कुछ बोलते हैं, उसमें मुख्य भूमिका ‘स्वरयंत्र’ की होती है। स्वरयंत्र गले में होता है। इसमें भी किसी प्रकार की विकृति होने से आवाज़ परिवर्तित हो जाती है। स्वरभंग भी एक प्रकार की आवाज़ की विकृति ही है, जिसमें आवाज स्पष्ट नहीं होती है। कभी-कभी तो आवाज़ की स्थिति ऐसी होती है कि रोगी मात्र फुसफुसाकर ही बोल पाता है। उसे अपनी आवाज़ स्वयं भी नहीं सुनाई देती है।

स्वरभंग के कारण-

इसका मुख्य कारण स्वरयंत्र में प्रदाह होना है। स्वरयंत्र में प्रदाह का कारण जोर से या चिल्ला कर बोलना, अधिक देर तक प्रवचन देना, वकील का कोर्ट में अधिक बोलना, लेक्चरार के रूप में देर तक लेक्चर देना, देर तक किसी से वाक्युद्ध करना, गले में किसी ठोस वस्तु से चोट लगना, संयोग विरूद्ध आहार-पेय लेना आदि। कारण कुछ भी हो, रोगी को चिकित्सा की परम आवश्यकता होती है, क्योंकि इससे रोगी और सुनने वाले दोनों के लिए यह कष्टदायी होता है।

आप यह हिंदी लेख chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

स्वरभंग के भेद-

आयुर्वेद अनुसार रोग के मूल में वात, पित्त एवं कफ सन्निपात आदि विकार होते हैं, उसी आधार पर स्वरभंग भी इन दोषों के अनुसार क्रमशः 4 प्रकार के होते हैं..
1. वातज स्वरभंग, 2. पित्तज स्वरभंग, 3. कफज़ स्वरभंग, 4. सन्निपातज स्वरभंग

1. वातज स्वरभंग- वात विकृति से स्वरभंग में आवाज़ बैठ जाती है और नेत्र, मुंह, मल-मूत्र आदि काला आता है।

2. पित्तज स्वरभंग- इस विकार से स्वरभंग के रोगी के नेत्र, मल, मूत्र, मुख आदि पीले हो जाता हैं। गले में दाह(जलन) होती है।

3. कफज़ स्वरभंग- इसमें गला और छाती कफ(बलगम) से भरा होता है। रोगी कठिनाई से धीरे-धीरे बोलता है। रात की अपेक्षा दिन में कुछ स्पष्ट बोलता है।

4. सन्निपातज स्वरभंग- इसमें उपरोक्त वर्णित तीनों स्वरभंग के लक्षण पाये जाते हैं। यह स्वरभंग असाध्य होता है।

वातज स्वरभंग के लिए देसी उपाय-

1. गन्ने के रस या गुड़ के छाने हुए शर्बत में चावल पका कर सोने से पहले खाने एवं एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से 3-4 दिन में लाभ होता है।

2. नमक मिला सरसों का तेल 10 मि.ली. तक प्रतिदिन दो बार पीने से लाभ होता है।

3. देवदारू और चीते की छाल के क्वाथ में असमान मात्रा में बकरी का घी एवं शहद मिलाकर प्रतिदिन दो बार लेने से लाभ होता है।

यह भी पढ़ें- मधुमेह का आयुर्वेदिक इलाज

4. घी पीकर ऊपर से दूध पीने से लाभ होता है।

5. असमान मात्रा में घी और शहद मिलाकर पीने से लाभ होता है।

Gala Baithne Ke Liye Gharelu Upay Kya Hai

6. दस्त लाने वाली औषधि देकर दूध में मिश्री पर्याप्त मात्रा में मिला और घी मिलाकर लेने से शीघ्र लाभ होता है।

कफज़ स्वरभंग के लिए उपाय-

1. काली मिर्च, सोंठ, छोटी पीपर और पीपरामूल को महीन पीस-छान लें। 1 से 3 ग्राम प्रतिदिन दो बार गौमूत्र के साथ सेवन करने से कफज़ एवं मेदज(मोटापा के कारण स्वरभंग) में लाभ होता है।

2. सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपर और त्रिफला का चूर्ण मिश्रित करके शहद एवं तेल में एक साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।

अन्य योग-

chetanherbal.com

1. कत्था 1 ग्राम सरसों के तेल में घोलकर मुंह में रखने से स्वरभंग ठीक हो जाता है।

2. छोटी हरड़ और छोटी पीपर का समभाग चूर्ण एक चुटकी(आधा चाय चम्मच) प्रतिदिन 2-3 बार मुंह में रखने से स्वरभंग ठीक हो जाता है।

3. सूखे आंवलों का चूर्ण 6 ग्राम गाय के दूध के साथ लेने से स्वरभंग 8-10 दिनों में ठीक हो जाता है।

4. छोटी हरड़ का चूर्ण गाय के दूध के साथ लेने से स्वरभंग 8-10 दिन में ठीक हो जाता है।

यह भी पढ़ें- ऐसे करें आंखों की देखभाल

5. मिश्री और सोंठ का समभाग चूर्ण मिश्रित कर लें। 1-1 चाय चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चूसने से आशातीत लाभ होता है।

6. मूली के महीन बीजों का चूर्ण 4 ग्राम गर्म पानी के साथ प्रतिदिन दो बार लेने से बैठा हुआ गला खुल जाता है और गले के दर्द में भी आराम पहुंचता है।

7. थोड़ी-सी हींग गर्म जल के साथ निगलने से आवाज़ ठीक हो जाती है।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.