Gala Baith Jana

Gala Baith Jana

गला बैठ जाना

Hoarseness, Hoarseness Causes, Hoarse Voice And Cough,

इसमें आवाज़ विकृत हो जाती है। बोलते समय आवाज़ साफ नहीं निकलती है। अधिक बोलने, चिल्लाने, बहुत देर तक गायन करने, ठंड लग जाने आदि कारणों से स्वरयंत्र में विकृति आ जाने से यह रोग हो जाता है।

आप यह हिंदी लेख Chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

घरेलू चिकित्सा-

Gala Baith Jana

1. सुखोष्ण जल में मामूली नमक मिलाकर सुबह-दोपहर, शाम गरारे करें।

2. सतमुलेठी चूसनी चाहिए। यदि सत मुलेठी न मिले तो मुलेठी की जड़ चूसें।

3. मुलेहठी और बच बराबर-बराबर खूब बारीक कर लें। 2-2 ग्राम दिन में 4 बार शहद मिलाकर चाटें।

4. गाय का घी एक चम्मच गर्म करके काली मिर्च एक नग चूर्ण तथा नमक आधी चुटकी मिलाकर सुबह-रात्रि पीना चाहिए।

5. मुलेहठी चूर्ण 2-2 ग्राम प्रतिदिन तीन बार शहद मिलाकर चाटें अथवा सुखोष्ण दूध साथ लें।

यह भी पढ़ें- उच्च रक्तचाप कैसे नियंत्रण करें

6. सोंठ, मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला प्रत्येक बराबर-बराबर लेकर चूर्ण तैयार कर लें। 2-2 ग्राम प्रतिदिन चार बार शहद मिलाकर चाटें।

7. सोंठ चूर्ण 1-1 ग्राम प्रतिदिन 3-4 बार शहद मिलाकर चाटें।

Gala Baith Jana

8. सोंठ, मिर्च और पीपल बराबर-बराबर लेकर महीन कर लें। 2-2 ग्राम प्रतिदिन 3 बार शहद मिलाकर लें।

9. खूबकलां का पाक बनाकर लेने से आवाज़ सुधर जाती है।

10. गोभी के पत्ते और डालियों को पानी में औटाकर उस क्वाथ में शहद मिलाकर पीने से स्वरभंग ठीक हो जाता है।

11. भोजन के पश्चात् घी में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर चाटने से स्वरभंग में लाभ होता है।

12. कचूर के छोटे-छोटे टुकड़ों को चूसने या इसका चूर्ण 3 ग्राम की फँक्की लेने से खाँसी में लाभ होता है। कण्ठ स्वर भी साफ होता है।

13. चिला(चिलिराध) के ताजा पत्तों का रस ज्वर निवारक और शीत निर्यास गले के रोग और स्वरभंग में उपयोगी है।

14. चूने को बबूल की कलियों के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियाँ बना लें। इन गोलियों को चूसने से सर्दी से बैठा गला खुल जाता है।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.