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Dil Ki Kamzori Ka Desi Ayurvedic Upchar

दिल की कमज़ोरी का देसी आयुर्वेदिक उपचार

हृदय का तेजी से धड़कना, हृदय की दुर्बलता, दिल का तेजी से धड़कना, हृत्कम्प, हृत्स्पंदन
(Palpitation of Heart)

परिचय-

हृदय की धड़कन ही प्राणी के जीवन का संकेत है, लेकिन तभी तक जब तक वह सामान्य गति से(प्रतिमिनट 72 से 75 बार) धड़कता रहे। लेकिन जब इससे धड़कन की गति तेज हो जाती है, तब घबराहट, अनिंद्रा, मृत्युभय आदि लक्षण प्रकट होते हैं। रोग की उग्रावस्था में प्रति मिनट 130 से 140 बार तक हृदय की धड़कन हो जाती है। इस स्थिति में रोगी बेचैन रहता है। यहां तक कि हृदय धड़कन के साथ-साथ तमाम शरीर में कम्पन्न देखी जा सकती है। यह रोग हृदय विकारों के अतिरिक्त भय, परिणाम या भविष्य की चिंता, सदमा, औषधियों का दुष्प्रभाव, अधिक नमक का सेवन करना आदि में से कुछ भी हो सकता है। जो इसके रोगी हों उन्हें चाय, काॅफी, खटाई एवं मीठी चीजों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये रोगकारक सिद्ध होंगे। निम्न योग या योगों का प्रयोग लाभदायक सिद्ध होगा।

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आयुर्वेदिक चिकित्सा-

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1. अर्जुन वृक्ष की छाल के चूर्ण के साथ हजार पुटी अभ्रक भस्म को अर्जुन की छाल के काढ़े में सात बार भावना देकर हृदय रोगी को देने से यह रोग दूर हो जाता है।

2. अरनी के पत्तों का धनिये के साथ क्वाथ बनाकर पीने से हृदय की निर्बलता में लाभ होता है।

3. अर्जुन की अन्तरछाल और गेहूँ को बकरी के दूध और गाय के घी में पका कर, मिश्री और मधु मिलाकर चाटने से अति उग्र हृदय रोग भी ठीक हो जाते हैं। शत-प्रतिशत सफल योग है।

4. इलायची दाना और पीपलामूल के चूर्ण को भी घी के साथ चाटने से कफजनित हृदय रोग में लाभ होता है।

5. कुटकी का काढ़ा(क्वाथ) पीने अथवा कुटकी और मुलहेठी का चूर्ण गर्म जल के साथ लेने से जीर्ण ज्वर, रक्तपित्त और हृदय रोग ठीक हो जाते हैं।

6. केसर हृदय को बल देता है, इसे अन्य हृदयोपयोगी औषधियों के साथ मिलाकर लेने से हृदय रोगों में लाभ पहुंचता है।

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7. कुलफा(लोनिया शाक) को ठण्डे पानी में रखकर बराबर खाते रहने से हृदय को ताकत मिलती है।

8. गाजर का शीत निर्यास सेवन करने से गर्मी से हुई दिल की धड़कन में लाभ होता है।

Dil Ki Kamzori Ka Desi Ayurvedic Upchar

9. गाँवजबां एक वनस्पति है। गाँवजबां के ताजे मोटे पत्ते वाली खुरदुरी, हरे रंग की और बड़े रोएं वाली होती है। यह दिल की धड़कन में विशेष उपयोगी है। यह हिमालय में कश्मीर से कुमाऊ तक विशेष रूप से पैदा होती है।

10. ब्राह्मी के साथ गिलोय का काढ़ा बनाकर नित्य सुबह-शाम पीने से दिल की धड़कन और पागलपन में लाभ होता है।

11. चन्द्रकान्त मणि मसूर के दानों को लगातार खिलाने से दिल की तेज धड़कन में लाभ होता है।

12. कली चूना 400 मि.ग्रा. और गुड़ 50 ग्राम को मिलाकर रोग के आक्रमण के अनुसार कम या अधिक मात्रा में चाटने से हृदय के भीतर का वेग और पीड़ा दूर होकर हृदय मजबूत होता है। साथ ही रक्त संचार की क्रिया में भी सुधार होता है।

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