chetanherbal.com

Diabetes, Sugar Kitne Prakar Ki Hoti Hai

डायबिटीज़, शुगर कितने प्रकार की होती है

मधुमेह के प्रकार(Types of Diabetes)

अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से मधुमेह के प्रकारों का निम्नलिखित रूप से स्पष्ट वर्णन किया गया है।

यह रोग दो प्रकार का होता है-

1.मधुमेह (Diabetes Mellitus)- इस प्रकार के रोग में मूत्र में शक्कर निरन्तर आती रहती है और इसी कारण इसको मधुमेह कहते हैं।

2. बहुमूत्र (Diabetes Insipid us)- इस प्रकार के रोग में रोगी को तीव्र प्यास लगती है, मूत्र भी अधिक आता है, परन्तु मूत्र में शक्कर नहीं आती है, इसलिए इसको बहुमूत्र रोग कहा जाता है।

आप यह हिंदी लेख chetanherbal.com पर पढ़ रहे हैं..

मधुमेह के फिर दो प्रकार हैं-

chetanherbal.com

1. अस्थायी मधुमेह- इसको शर्करामेह मुधमेह(Glycosuria) कहते हैं। इस रोग में अस्थायी रूप में मूत्र में शक्कर आने लग जाती है। जैसे खाँड का अधिक प्रयोग करने, सिर में चोट लग जाने, काली खाँसी, श्वास रोग, मिरगी के दौरे के बाद या क्लोरोफाॅर्म के प्रयोग से मूत्र में थोड़े समय के लिए शक्कर आने लग जाती है। वास्तव में यह रोग अस्थायी रूप है।

2. स्थायी मधुमेह- वास्तव में यही रोग है, जिसका वृतान्त इस हिंदी लेख में लिखा जायेगा।

Diabetes, Sugar Kitne Prakar Ki Hoti Hai

इस रोग के भी फिर दो प्रकार हैं..

(क.) घातक मधुमेह-(Malignant Diabetes)-ऐसी अवस्था में मूत्र बहुत अधिक मात्रा में आता है और उसमें शक्कर बहुत अधिक होती है। प्यास के कारण रोगी बेचैन हो जाता है। रोगी शीघ्र ही कमजोर और दुर्बल हो जाता है और दूसरे घातक लक्षण पैदा हो जाते हैं।

यह भी पढ़ें- उच्च रक्तचाप

(ख.) अदोष मधुमेह(Innocence Diabetes)- इस अवस्था में मूत्र में शक्कर कभी कम और कभी अधिक हो जाती है और कभी शक्कर आनी बंद हो जाती है और फिर आने लग जाती है। प्यास अधिक नहीं लगती है, किन्तु कई बार बढ़ भी जाती है। रोगी कमजोरी-सी महसूस करता है, परन्तु दुबला नहीं होता। रोग का यह रूप घातक नहीं होता। परन्तु कई रोगियों में शक्कर को चिकित्सा से कम करना बहुत कठिन होता है। प्रायः इस अवस्था में 30 ग्राम शक्कर प्रतिदिन से अधिक नहीं आती है। इस अवस्था को वृक्कगत मधुमेह(Renal Glycosuria) भी कहते हैं। कई बार यह रोग जन्मजात भी होता है।

About the author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.