Diabetes Ki Bimari Se Hone Wale Nuksan

Diabetes Ki Bimari Se Hone Wale Nuksan

डायबिटीज की बीमारी से होने वाले नुकसान

डायबिटीज जीवनशैली से जुड़ी घातक बीमारी है, जिसे अंग्रेजी में डायबिटीज मेलाइटस कहते हैं। जिस व्यक्ति के शरीर में मेटाबाॅलिक सिस्टम के अनुसार शुगर का जितना स्तर होना चाहिए, उससे शुगर का स्तर लगातार बढ़ा रहता है, उस व्यक्ति को डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित माना जाता है।

मधुमेह(शुगर) के स्तर को दो हिस्सों में बांटा जाता है। पहला खाली पेट या फास्टिंग और दूसरा खाना खाने के बाद यानी पोस्ट प्रेन्डियल। फास्टिंग के दौरान यदि खून में शुगर की मात्रा 125 से ज्यादा पायी जाती गई तो यह शुगर का संकेत है। खाना खाने के दो घंटे बाद अगर रक्त में शुगर की मात्रा 145 से अधिक पाई जाये तो इसका अभिप्राय यह है कि व्यक्ति मधुमेह का शिकार हो चुका है।

क्या हैं कारण-

1. पैन्क्रियाज ग्रन्थि से तरह-तरह के हार्मोन्स निकलते हैं। इन्हीं में शामिल है इंसुलिन और ग्लूकाॅन। शरीर के विभिन्न हिस्सों में इंसुलिन के द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है। जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं होता है, तो यह डायबिटीज का कारण बनता है।

2. शुगर रोग से पीड़ित होने का कारण आनुवंशिक भी होता है।

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3. अगर आपका वजन बढ़ा हुआ है, आपका बीपी बहुत हाई रहता है और कोलेस्ट्राॅल भी संतुलित नहीं है, तो आपको मधुमेह हो सकता है।

4. बहुत अधिक मीठा खाना, नियमित तौर पर बाहर का खाना खाना, कम पानी पीना, खाना खाने के बाद तुरन्त सो जाना, जंकफूड आदि भी इस बीमारी के कारण हैं।

डायबिटीज के प्रकार-

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यह दो प्रकार की होती है- टाइप- 1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज। पहले प्रकार की डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का बनना कम हो जाता हैं, जबकि दूसरे प्रकार में रक्त में शुगर का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है। दवाओं और खान-पान के माध्यम से इंसुलिन को बढ़ाया जा सकता है लेकिन रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। टाइप-1 डायबिटीज में पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकायें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं, जिस कारण इंसुलिन बन पाना संभव नहीं हो पाता। भारत में एक या दो प्रतिशत लोगों को ही टाइप-1 डायबिटीज की समस्या होती है। टाइप-2 डायबिटीज से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं।

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क्या हैं लक्षण-

1. बहुत ज्यादा प्यास लगना।

2. बार-बार पेशाब की शिकायत होना।

3. बहुत ज्यादा भूख लगना।

4. तेजी से वजन गिरना।

5. मूत्र में किटोन्स की उपस्थिति(किटोन्स मांसपेशियों और वसा के टूटने के कारण होता है। इसका कारण शरीर में इंसुलिन की कमी है)

6. चिड़चिड़ाहट महसूस होना।

7. आंखों की रोशनी कम हो जाना या धुंधला नजर आना।

8. दांतों, त्वचा और बेजाइनल संक्रमण जल्दी होना।

कौन होते हैं शिकार-

टाइप- 1 डायबिटीज आमतौर पर 4 साल की उम्र से लेकर 18 साल की उम्र में ज्यादा देखने को मिलती है। हालांकि भारत में इसकी संख्या कम है। यहां पर टाइप-1 से ग्रसित लोगों की संख्या एक से दो प्रतिशत तक ही होगी। आजकल की खराब दिनचर्या के चलते बहुत सारे लोग टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हो रहे हैं। व्यायाम और शारीरिक श्रम का अभाव और फास्ट फूड का अधिक सेवन करना इस बीमारी का प्रमुख कारण है। पहले 40 साले से ज्यादा उम्र के लोग ही टाइप-2 डायबिटीज से ग्रसित होते थे, लेकिन वर्तमान में 12-13 साल के छोटे बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। पुरूषों के मुकाबले महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका ज्यादा रहती है। महिलाओं में इसका कारण जरूरत से ज्यादा मोटापा है। सामान्यतया जिन लोगों का बीएमआई 32 से ज्यादा होता है, उनके टाइप-2 डायबिटीज का शिकार होने की आशंका ज्यादा रहती है।

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डायबिटीज से होने वाली दिक्कत-

1. डायबिटीज की वजह से छाती में दर्द की शिकायत के साथ-साथ दिल का दौरा, स्ट्रोक, हृदय रोगों की आशंका ज्यादा होती है।

2. रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाने की वजह से धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिसके कारण हाथ-पैरों में सुन्नता, दर्द और झनझनाहट की शिकायत होती है।

3. किडनी में लाखों छोटी-छोटी रक्तवाहिकायें होती हैं, जो रक्त के अंदर से अवशिष्ट पदार्थों को साफ करती हैं। डायबिटीज की वजह से नाजुक फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।

4. डायबिटीज के कारण आंखों की रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने की वजह से रेटिना खराब हो सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपेथी कहते हैं। इसकी वजह से आंखों से दिखना कम हो सकता है या फिर आंखों की रोशनी जा सकती है।

5. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो अपने तनाव के स्तर को नियंत्रण में रखें अन्यथा आप अवसाद के शिकार हो सकते हैं।

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