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Chot Aur Moch Ka Desi Ayurvedic Upchar

चोट और मोच का देसी आयुर्वेदिक उपचार

चोट, मोच एवं अभिघात
(Sprains and Traumatic Pains)

परिचय-

किसी प्रकार के प्रहार से पीड़ा हो, लेकिन त्वचा फटकर रक्त नहीं निकला हो तो उसे चोट लगना कहते हैं। किसी प्रकार की फिसलन या जोर पड़ने से त्वचा पर कोई बाहरी निशान नहीं बना हो और न ही अस्थि(हड्डी) क्षतिग्रस्त हुई हो, लेकिन अंदर की माँसपेशियाँ क्षतिग्रस्त हुई हों, जिससे पीड़ा हो। इसमें आंतरिक कुछ स्राव होने से सूजन भी हो, जिसे मोच कहते हैं। जहां धारदार किसी अस्त्र से प्रहार हुआ हो, त्वचा, माँसपेशियाँ आदि के क्षतिग्रस्त होने से रक्त भी निकल चुका हो, तो उसे ‘अभिघात’ कहते हैं।
पीड़ा, चोट, मोच या अभिघात किसी प्रकार की भी हो, विशेष कष्टदायी होती है। अतः उनके चिकित्सार्थ निम्नलिखित योगों को प्रयोग करें..

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चिकित्सा-

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1. अगस्तिया(अगस्त) के पत्तों को पीसकर पुल्टिस बांधने से चोट लगने या कुचल जाने की पीड़ा ठीक हो जाती है।

2. अंजीर की लकड़ी की राख को पानी में घोल लें। गाद नीचे बैठ जाने के बाद उसका निथरा पानी निकाल कर उसमें फिर वही राख घोल दें। ऐसा सात बार के निथरा पानी पिलाने से रक्त का जम जाना ठीक हो जाता है।

3. अफीम का बारीक चूर्ण 25 ग्राम, रेजिन प्लास्टर 225 ग्राम। रेजिन प्लास्टर को गर्म पानी में पिघला कर उसमें धीरे-धीरे अफीम मिला लें। यह किसी स्थान की पीड़ा शमन के लिए उत्तम प्लास्टर माना जाता है।

4. विजयसार की लकड़ी को पानी में चन्दन की भांति घिसकर लेप करने से पीड़ा ठीक हो जाती है।

5. उड़द के आटे में थोड़ा नमक, थोड़ी सोंठ और थोड़ी हींग मिलाकर उसकी रोटी बनाकर एक ओर सेंक कर कच्चे भाग की ओर तिलों का तेल लगाकर शरीर के किसी भी वेदनायुक्त स्थान पर बांधने से लाभ होता है।

6. कचूर को पीसकर लेप करने से चोट और मोच की पीड़ा में लाभ होता है।

7. खजूर के बीज को पीसकर लेप करने से चोट की पीड़ा में लाभ होता है और प्रदाह भी कम हो जाता है।

8. खेतकी के पत्तों का ताजा रस रगड़ या चोट पर लगाने से लाभ होता है।

9. गाजर के पत्तों एवं जड़ को पीसकर और उसको पका कर गर्म लेप करने से शरीर में किसी कारण से जमा हुआ रक्त बिखर जाता है।

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10. गवार फली और तिलों को कूटकर मामूली गर्म करके बांधने से चोट-मोच की पीड़ा दूर हो जाती है।

11. चुकन्दर के ताजे़ पत्तों को पीसकर रगड़ और मोच पर लगाने से लाभ होता है।

12. चूने को मक्खन के साथ मिलाकर मोच के ऊपर बांधने से मोच की पीड़ा शांत हो जाती है और हड्डी की गठान भी बिखर जाती है।

13. हेमसागर के पत्तों को पीसकर गर्म करके चोट पर बांधने से सूजन ठीक हो जाती है।

14. हेमसागर के पत्तों का लेप मोच और आग से जले घावों पर करने से लाभ होता है।

15. चोट और रगड़ पर भी दूसरे संकोचक द्रव्यों के साथ जंगली हल्दी पीसकर लगाने से लाभ होता है।

16. जंगली सूरण(मदन मस्त) से स्नायु संबंधी पीड़ा तत्काल शांत हो जाती है। इसी पीड़ा शामक गुण के कारण इसे रगड़ या मोच पर इसका लेप बाहरी उपचार के तौर पर किया जाता है।

17. ‘छत्री’(वनस्पति) घाव की पूर्ति करती है और शरीर में गर्मी पैदा करती है। इन गुणों के कारण मोच आ जाने और हड्डी टूट जाने पर भी यह लेप लाभ पहुंचाती है। इसे शहद में मिलाकर लगाया जाता है।

18. खुरासानी अजवायन और जौ के आटे का लेप करने से मोच आने और हड्डी टूटने में लाभ होता है।

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19. तिलों और महुओं को पीसकर मोच पर बांधने से मोच में लाभ होता है।

20. पुराने नारियल की गिरी को बारीक कूटकर उसमें चैथाई भाग पिसी हल्दी मिलाकर पोटली में बांधकर सेंक करने से चोट और मोच की पीड़ा तथा सूजन मिट जाती है।

21. चोट लगने की मोच और गिल्टियों के शोथ पर नीम की पत्तियों का बफारा देने से लाभ होता है।

22. पुदीने का अर्क पिलाने से रक्त का जमाव बिखर जाता है।

23. बड़(बरगद) का दूध चोट और मोच पर लगाने से लाभ होता है।

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