Bukhar Ki Dawa

Bukhar Ki Dawa

बुखार की दवा

जीर्ण ज्वर (Fever)

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जो ज्वर 12 दिन से अधिक- वात ज्वर, जो 14 दिन से अधिक रहे- पित्त ज्वर, जो 20 दिन से अधिक रहे और कफज्वर जो 28 दिन से अधिक रहे उसे जीर्ण ज्वर कहते हैं। बंगसेन अनुसार जो ज्वर 15 दिन के बाद भी नहीं उतरे और धीमा-2 रहे और पुराना हो जाये अर्थात् 15 दिन के बाद यदि ज्वर रहे उसे ‘जीर्ण’ ज्वर कहते हैं।

देसी उपचार-

Bukhar Ki Dawa

1. गिलोय(गुच) के रस में पीपल और शहद मिलाकर पीने से जीर्ण ज्वर, कफ, तिल्ली(प्लीहा), खाँसी, अरुचि आदि में लाभ होता है।

2 पीपल के चूर्ण में दोगुना गुड़ मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से अरुचि, हृदय रोग, दमा, खाँसी, क्षय रोग, अग्निमांद्य, पीलिया, कृमिरोग, मिर्गी और जीर्ण ज्वर आदि में लाभ होता है।

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3. पीपल का चूर्ण शहद में मिलाकर लेने से मेद, कफ, श्वास रोग, खाँसी, हिचकी, जीर्ण ज्वर, पीलिया, उदर रोग, तिल्ली(प्लीहा) और नये ज्वर में होता है।

4. गिलोय के ठण्डे काढ़े में पीपल का चूर्ण और शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से जीर्ण ज्वर और कफ में लाभ होता है।

5. जीरे का चूर्ण 1 भाग पुराने गुड़ 2 भाग मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जीर्ण ज्वर में लाभ होता है।

6. गिलोय का क्वाथ शीतल होने पर शहद चैथाई भाग मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जीर्ण ज्वर में लाभ होता है।

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जल के दुष्प्रभाव से उत्पन्न ज्वर-

कभी-कभी गंदा जल पीने से या स्थान अथवा जलवायु के परिवर्तन से पानी का प्रभाव ऐसा होता है कि हमें ज्वर हो जाता है। इस स्थिति में इन योगों से लाभ होता है।

Bukhar Ki Dawa

1. छोटी हरड़, नीम के पत्ते, सोंठ, सेंधा नमक और चीता का चूर्ण बना लें। 4-6 ग्राम प्रतिदिन दो बार सेवन करने से लाभ होता है। इस योग में सोंठ के स्थान पर पीपल लेने से भी योग प्रभावी हो जाता है।

2. सोंठ का काढ़ा शीतल करके 50 मि.ली. में शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से अरुचि मन्दाग्नि, श्वास रोग, बवासीर, पेट के रोग और जल से होेने वाले तमाम विकार दूर हो जाते हैं और शरीर में कान्ति की वृद्धि होती है।

3. सोंठ, जीरा और हरड़ तीनों का कल्क आदि भोजन करने से पहले प्रतिदिन सेवन किया जाये तो अनेक स्थानों का जल पीने से उत्पन्न ज्वर नष्ट हो जाता है। प्रत्येक मात्रा में प्रत्येक का चूर्ण 2-2 ग्राम होना चाहिए।

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