Bukhar Dur Karne Ke Liye Ayurvedic Upchar

Bukhar Dur Karne Ke Liye Ayurvedic Upchar

बुखार दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार

ज्वर, बुखार, शरीर का तापमान बढ़ना फीवर

परिचय-

जब तक शारीरिक तापमान 98.4 प्रतिशत होता है तो सामान्य तापमान माना जाता है, लेकिन जब इससे अधिक तापमान होता है तो इसे ज्वर, बुखार या फीवर कहते हैं, चाहे इसका कारण कुछ भी हो। तापमान सामान्य करने के लिए ज्वरनाशक योगों को दें।

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चिकित्सा-

Bukhar Dur Karne Ke Liye Ayurvedic Upchar

1. अकरकरा(अकलकरा) में पसीना लाने का गुण है अतः इसे ज्वर निवारक भी कहते हैं। अकरकरा को जैतून के तेल में पकाकर मालिश करने से पसीना आकर ज्वर उतर जाता है।

2. अंकोल ही जड़ का चूर्ण 300 मि.ग्रा. शहद में मिलाकर लेने से पसीना आकर मौसमी ज्वर उतर जाता है।

3. अतिवला की जड़ और सोंठ का काढ़ा पीने से शीत, कम्प और दाहयुक्त ज्वर 2-3 दिन में उतर जाता है।

4. अतीस ज्वर में उपयोगी है। अतीस का चूर्ण ज्वर होने से पहले 2-2 ग्राम प्रत्येक 2-2 घंटे के बाद देने से लाभ होता है।

5. विषम ज्वर जूड़ी बुखार और पानी के बुखार में अतीस चूर्ण 2 ग्राम, छोटी इलायची आधा ग्राम और वंशलोचन चूर्ण आधा ग्राम मिलाकर लेने से लाभ होता है।

6. अंधाहूली(अधःपुष्पी) के पंचांग का क्वाथ लेने से ज्वर में लाभ होता है।

7. अनानास के पके फल का रस पीने से ज्वर से उत्पन्न पेट की जलन शांत हो जाती है।

8. अभ्रक भस्म को त्रिफला के डेढ़ ग्राम चूर्ण में मिलाकर शहद के साथ चाटने से जीर्ण ज्वर में लाभ होता है।

9. तुलसी के पत्तों का रस, पीपर का चूर्ण और अभ्रक भस्म मिलाकर लेने से हर प्रकार के ज्वर में लाभ होता है।

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10. अरलू(सोनापाठा) लकड़ी का प्याला बना लें। नित्य रात को इसमें पानी भर दें और सवेरे इसे पी लें। ऐसा नित्य करने से इकतारा, तिजारा, चैथिया ज्वर और मलेरिया ज्वर में लाभ होता है।

11. आॅल के पत्तों का काढ़ा पीने से ज्वर में लाभ होता है।

12. आँवलों का रस 20 मि.ली. नित्य पीने से पित्त ज्वर एवं इससे उत्पन्न दिल की घबराहट दूर हो जाती है।

13. आँवलों का मुरब्बा खाने से पित्त ज्वर एवं इससे उत्पन्न दाह, बेचैनी, घबराहट में लाभ होता है।

14. कटकरंज(करंजुआ) की गिरी और काली मिर्च बराबर-बराबर लेकर पीसकर 1 से 2 ग्राम नित्य 2 बार लेने से पानी से आने वाला ज्वर उतर जाता है।

15. चिरायता के अर्क के साथ कड़वी परवल के बीजों का चूर्ण लेने से ज्वर उतर जाता है।

16. कड़वे परवल के पत्तों के रस की शरीर पर मालिश करने से निरन्तर रहने वाला ज्वर उतर जाता है।

17. कदम्ब की छाल का काढ़ा पीने से ज्वर में लाभ होता है।

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18. गम्भारी(कम्भारी) के फलों का क्वाथ पीने से पित्त ज्वर उतर जाता है।

19. करील के कोमल कोपलों और कोमल पत्तों को पीसकर टिकिया बनाकर कलाईयों पर बांधने से फफोले होकर ज्वर उतर जाता है। फफोलों से स्राव निकल कर सामान्य घाव की भांति व्रणनाशक लेप, मरहम लगाकर घाव की चिकित्सा करें।

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