Bhojan Hamare Sharir Ke Liye Kyu Jaruri Hai

Bhojan Hamare Sharir Ke Liye Kyu Jaruri Hai

भोजन हमारे शरीर के लिए क्यों जरूरी है

मानव शरीर में भोजन की उपयोगिता-
(Use of Food in Human Body)

यद्यपि इस पर अधिक कुछ कहना व लिखना आवश्यक नहीं है, क्योंकि यह सबको पता है कि भोजन हमारे लिए कितना आवश्यक है और इसकी उपयोगिता क्या है? फिर भी वैज्ञानिक दृष्टि से और शारीरिक रचना के अध्ययन की दृष्टि से इसका विश्लेषण आवश्यक है। भोजन का उद्देश्य भोजन से पोषक तत्व प्राप्त करना है। इन पोषक तत्वों की सहायता से हमारे शरीर में निम्न क्रियाएं सम्पन्न होती हैं:-

1. ताप की प्राप्ति(Heat Gain)
2. शरीर को स्वस्थ रखना(Maintaining good Health)
3. कोशिकाओं का पोषण(Nutrition for cells)
4. क्षति की पूर्ति(Compensation)
5. शक्ति की प्राप्ति(Source of Energy)

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1. ताप की प्राप्ति(Heat Gain)-

शरीर के अंदर शारीरिक क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए ताप की आवश्यकता होती है। इसमें ताप का नुकसान भी होता है, अतः पुनः ताप की प्राप्ति हमें भोजन से ही होती है। भोजन के कार्बोहाइड्रेट एवं वसा जातीय पदार्थ के दहन से ताप की उत्पत्ति होती है।

2. शरीर को स्वस्थ रखना(Maintaining good Health)-

Bhojan Hamare Sharir Ke Liye Kyu Jaruri Hai

हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिसे पाकर शरीर स्वस्थ, सबल एवं सुंदर रहता है। इसके अभाव में शरीर अस्वस्थ, कमजोर एवं कुरूप हो जाता है। यही कारण है कि अच्छे पोषक तत्व की प्राप्ति के लिए पौष्टिक भोजन भी चाहिए, क्योंकि हम भोजन पर ही निर्भर होते हैं। हमारे स्वास्थ्य का आधार भोजन ही है।

3. कोशिकाओं का पोषण(Nutrition for cells)-

जैसा कि हम जानते हैं, हमारा शरीर असंख्य कोशिकाओं की सहायता से चल रहा है। वे सब की सब अपने कार्य में सदा सलंग्न होती हैं। अपने कार्य को सम्पादित करने में उन्हें पोषक तत्व की आवश्यकता होती है। ये पोषक तत्व हमारे भोजन से ही उनके प्राप्त होते हैं। इसके द्वारा उनकी वृद्धि एवं विभाजन संभव है, जिससे हमारे शरीर की वृद्धि होती है। विशेषकर कोशिकाओं की वृद्धि एवं विकास के लिए प्रोटीन हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है, जोकि हमें भोजन से ही मिलता है।

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4. क्षति की पूर्ति(Compensation)-

हमारे शरीर के अंदर सृजनात्मक एवं विनाशात्मक दोनों क्रियाएं साथ-साथ चलती हैं। सदा कार्यरत होने से एक ओर कोशिकाओं का ह्नास और विनाश होता है, तो दूसरी ओर नयी-नयी कोशिकाएँ विभाजन द्वारा बनती रहती है। इन क्रियाओं में प्रोटीन जैसे पोषक तत्व आवश्यक होते हैं, जिसे हम अपने भोजन से ही प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि नई कोशिकाओं के निर्माण से क्षति की पूर्ति स्वतः होती रहती है। यदि ऐसा न हो, मात्र कोशिकाओं का क्षय ही होता रहे तो हमारा अधिक दिनों तक जीवित रहना संभव नहीं होता।

Bhojan Hamare Sharir Ke Liye Kyu Jaruri Hai

5. शक्ति की प्राप्ति(Source of Energy)-

हम बराबर मानसिक और शारीरिक रूप से कार्यरत होते हैं। यहां तक कि सुप्तावस्था में भी शारीरिक क्रियाएँ नियमित रूप से चलती रहती हैं। इसमें शक्ति का ह्नास भी होता है। पुनः यह शक्ति हमें भोजन से ही प्राप्त होती है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट एवं वसा का मन्द दहन माँसपेशियों में होता रहता है, जिससे हमें कार्य करने की शक्ति(क्षमता) प्राप्त होती है। इसी प्रकार भोजन से शक्ति मिलती है।

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