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Bechaini Or Ghabrahat Door Karne Ke Upay

घबराहट, बेचैनी, उद्विग्नता, दिल घबराना
(Nervousness, Anxiety State)

परिचय-

यदि किसी भी स्थिति में शांति का अनुभव नहीं हो रहा हो, तो इसे बेचैनी और घबराहट कहते हैं। सोने, बैठने या शारीरिक रूप से स्थिर रहने पर भी शांति नहीं मिलती है। रोगी को स्वयं भी पता नहीं होता है कि शांति कैसे मिलेगी। इसका मुख्य कारण शारीरिक या मानसिक तीव्र पीड़ा, सन्ताप, घोर चिन्ता, हृदय की तेज धड़कन, मानसिक रोग आदि है।

चिकित्सा-

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1. शर्बत अनार- पानी 750 मि.ली. में चीनी 1 किलोग्राम डालकर चाश्नी बनायें। इसके बाद उसमें आधा लीटर अनार का रस मिलाकर एक तार की चाश्नी बनाकर बोतल में डाल लें। यह शर्बत 20 से 30 मि.ली. प्रति मात्रा पानी में मिलाकर नित्य 2-3 बार पीने से घबराहट(बेचैनी), दिल की जलन, आमाशय की जलन, मूच्र्छा, प्यास इत्यादि में लाभ होता है।

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2. पके हुए आँवलों के रस को खरल में घोटें। जब गाढ़ा हो जाये तो उसमें और रस डालकर घोटें। जब घोटते-घोटते गाढ़ा हो जाये तो गोला बनाकर शुष्क करके चूर्ण बना लें। यह चूर्ण अत्यंत पित्तनाशक है। इसके प्रयोग से चित्त की घबराहट, प्यास और पित्त के ज्वर में लाभ होता है। 3-3 ग्राम मिश्री मिले शर्बत के साथ दें।

3. यदि शीतला में ताप-उताप आदि के साथ बेचैनी हो तो शर्बत उन्नाब शांतिदायक सिद्ध होता है। यह शर्बत शांतिदायक होने के साथ-साथ कफ निस्सारक और रक्तशोधक भी है।

4. ओगई(पंजाबी), आगई के बीजों का शर्बत, मिश्री मिलाकर पीने से बेचैनी में लाभ होता है। यह शांतिदायक योग है।

5. कोकम का फल शीतादि रोग प्रतिरोधक, शीतल, पित्तनाशक, स्निग्धकारक और शांतिदायक है।

6. कोईनार, कोइलारि की जड़ चावलों के पानी में पीस घोटकर नित्य 2-3 बार पिलाने से शांति मिलती है।

7. कड़कोष्ट(कड़ुकोष्ट) वनस्पति को कुछ देर पानी में भिगो दें। फिर मसल, छानकर पीने से शांति मिलती है।

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8. गाँवजबां एक औंस को पानी में उबालकर पीने से ज्वर की बेचैनी और प्यास आदि मिट जाती है। यह मूत्रल और शांतिदायक है।

9. चम्पा की जड़ शांतिदायक होती है। इसे घोटकर पीने से लाभ होता है।

10. चिरियारी(चिरियारा) की जड़ का क्वाथ शांतिदायक है। इसे नित्य सुबह-शाम पूर्ण लाभ होने तक दें।

11. लोहे के बर्तन में देसी घी डालकर हींग भून लें। 250 से 500 मि.ग्रा. नित्य दो बार लेने से बेचैनी और घबराहट दूर होती है।

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