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Bawaseer Ke Liye Desi Ayurvedic Upchar

बवासीर के लिए देसी आयुर्वेदिक उपचार

बवासीर, अर्श
Hemorrhoids, Piles

परिचय-

यह गुदामार्ग का रोग है। इसमें मलद्वार पर अंगूर के दानों की भांति एक संरचना हो जाती है। इसकी संख्या एक से अधिक भी संभव है। यह रक्तस्रावी और बादी दो प्रकार की होती है। बादी में रक्त का स्राव नहीं होता है। बवासीर का रक्त, पाखाना आने के बाद बूंद-बूंद आता है। कभी-कभी पाखाना करने से पहले रक्त बूंद टपकता अथवा पाखाना के ऊपर लकीर जैसा रक्त लगा होता है। ये लक्षण रोग पहचान के पर्याप्त होते हैं। रोग बादी हो या खूनी पाखाना करने के समय बहुत कष्ट होता है। डर के कारण रोगी वेग आने पर भी शौच के लिए जाना नहीं चाहता है। परिणामतः रोग और कष्टदायी होता चला जाता है, क्योंकि इसका मूल कारण ‘कब्ज’ ही होता है।

चिकित्सा-

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1. सर्वप्रथम रोगी को कब्ज़ से मुक्ति दिलायें। इस कार्य के लिए यकृत(लीवर) को ठीक करें। यकृत-पोषक औषधियों को नियमित कुछ-कुछ मास तक दें। इस सूत्र को सब रोगियों में निश्चित रूप से लागू करें अन्यथा सफलता प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। साथ ही निम्नलिखित योगों को भी दें।

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2. अंकोल की जड़ की छाल का चूर्ण और काली मिर्च का चूर्ण 1-1 ग्राम प्रतिदिन फंकी लेने से बवासीर में लाभ होता है।

3. दो सूखी अंजीर को रात को पानी में भिगो दें। सुबह खा लें। इसी प्रकार सुबह को दो भिगोये हुए अंजीर शाम को खा लें। इस क्रम को 8-10 दिन तक जारी रखें। यह नुस्खा खूनी बवासीर के लिए बहुत ही प्रभावशाली है।

4. अंजीर का अचार प्रतिदिन 30 ग्राम खाने से त्वचा की तमाम गर्मी, पित्त विकार, रक्त विकार, कब्ज़, बवासीर और वीर्य संबंधी विकार ठीक हो जाते हैं।

5. अनार, वृक्ष की छाल के काढ़े में सोंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से बवासीर का रक्त बंद हो जाता है।

6. दूधली के पत्ते के रस में अनन्तमूल की जड़ का चूर्ण एक चावल के बराबर लेने से 7 दिन में बवासीर में लाभ हो जाता है।

7. अपामार्ग की जड़, बीज और पत्तों को कूटकर उनके चूर्ण में समान मिश्री मिलाकर 6-6 ग्राम जल के साथ लेने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

8. अपामार्ग के बीजों का चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम चावल की धोवन के साथ लेने से 7 दिन में बवासीर का रक्तस्राव बंद हो जाता है।

Bawaseer Ke Liye Desi Ayurvedic Upchar

9. शुद्ध भिलावों के चूर्ण में अभ्रक भस्म मिलाकर लेने से बवासीर में लाभ होता है।

10. त्रिफला, दालचीनी, बड़ी इलायची, तेजपात, नागकेशर, चीनी और शहद के साथ अभ्रक भस्म लेने से बवासीर का नाश होता है।

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11. अरण्ड(एरण्ड) के पत्तों को पीसकर मस्सों पर बांधने से और इसी के 4-6 बीजों की गिरी को पीसकर दूध में उबाल कर प्रतिदिन रात को लेने से बवासीर में लाभ होता है।

12. अरनी के पत्तों का काढ़ा पीने एवं इसी के पत्तों की पुल्टिस मस्सों पर बांधने से आशातीत लाभ होता है।

13. अरलू(सोना पाठा) की छाल, चित्रकमूल, इन्द्रजौ, करंज की छाल सेंधा नमक और सोंठ को समान मात्रा में लेकर कूट, छानकर 1.5 से 3 ग्राम मट्ठे के साथ लेने से बवासीर में लाभ होता है।

14. काली अरबी का रस पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

15. अरीठे(रीठा) की गुठली से बीज निकाल कर लोहे के बर्तन में भूनकर चूर्ण बना लें। इसके वज़न के बराबर पपड़िया कत्था मिला लें। 125 मि.ग्रा. मक्खन या मलाई के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम दें। इसे 7 दिन तक दें। रोगी चिकित्सा अवधि में नमक और खटाई नहीं खाये। इससे कब्ज़, बवासीर की खुजली, बवासीर का रक्तस्राव तुरन्त बंद हो जाता है।

16. असालू(हालों) का शर्बत बनाकर नियमित नित्य पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

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17. आक का दूध 3 बूँद को रूई में डालकर और उस पर थोड़ा-सा कूटा हुआ जवाखार छिड़क कर बताशे में रखकर निगलने से बवासीर बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।

18. आम की कोमल कोपलों को पानी में पीसकर थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से खूनी बवासीर ठीक हो जाता है।

19. आम और जामुन के पत्तों का रस 15-15 मि.ली. मिला लें। यदि इतना रस निकालना संभव नहीं हो तो पत्तों को पानी के साथ सिल पर पीसकर रस निकाल लें। फिर इस 30 मि.ली. रस में दूध 250 मि.ली. और थोड़ा मिश्री मिलाकर प्रतिदिन एक बार पी लें। इसे 8 दिन तक लें। इस योग से खूनी और बादी बवासीर ठीक हो जाती है।

20. आँवले का चूर्ण 3-5 ग्राम सुबह-शाम छांछ के साथ लेने से लाभ होता है।

21. ईसबगोल के बीजों को ठंडे पानी में भिगोकर इसके लुआब को छानकर पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

22. उतरण(उतरन) के 20 ग्राम पत्तों के छोटे-छोटे टुकड़े करके लौंग के साथ घी में तलकर सुबह-शाम खाने से बवासीर का रक्त बंद हो जाता है। लगातार 10-15 दिन तक इसे पीड़ित को देने से स्थायी लाभ हो जाता है।

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