Bawaseer Ka Desi Ilaj

Bawaseer Ka Desi Ilaj

बवासीर का देसी इलाज

अर्श, बवासीर, पाइल्स

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अर्श(बवासीर) एक प्रकार का मासांकुर है, जो गुदा मार्ग में उत्पन्न होता है। इसे सामान्य बोलचाल की भाषा में बवासीर कहते हैं। आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में इसे पाइल्स कहा जाता है।

कारण क्या हैं?

Bawaseer Ka Desi Ilaj

1. आधुनिक जीवनशैली एवं विरूद्ध खान-पान।
2. मिर्च-मसाले युक्त भोजन का अति सेवन।
3. अत्यधिक मांसाहार का प्रयोग।
4. फास्ट फूड का अति प्रयोग(पिज्जा, बर्गर)।
5. व्यायाम न करना।
6. ज्यादा देर तक एक स्थान पर बैठे रहने से।
7. दिन में सोने की आदत।
8. कब्ज़ होना।
9. मल त्याग करने के लिए ज्यादा दबाव लगाना।
10. ज्यादा भार उठाना।
11. बिना फाइबर युक्त भोजन लेना।
12. प्रसव का सही तरीके से न होना।

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अर्श के सामान्य लक्षण-

1. मल त्याग में जलन व दर्द होना।
2. कब्ज़ होना।
3. गैस बनना।
4. खून की कमी।
5. कमजोरी महसूस होना।
6. भोजन ठीक से न पचना।
7. भूख न लगना आदि लक्षण मिलते हैं।

अर्श(पाइल्स) के प्रकार-

1. सहज अर्श :
वे अर्श, जो व्यक्ति को जन्म से ही रहते हैं। इसका मुख्य कारण माता-पिता के आर्तव-शुक्र का दूषित होना, जो माता-पिता के अनुचित आहार-विहार से होता है। दूषित शुक्र एवं आर्तव के कारण गर्भावस्था में गुदा प्रवेश के निर्माण के समय ही अर्श की उत्पत्ति हो जाती है। इस प्रकार के अर्श कम ही होते हैं।

2. शुष्क अर्श(बादी बवासीर) :
इसे बाह्य अर्श भी कहते हैं। यह मुख्यतः गुदा प्रवेश की सबसे बाहरी गुदवली में उत्पन्न होते हैं। ये अर्श, मल त्याग के समय गुदा मार्ग से बाहर आ जाते हैं। इन अर्श में रक्तस्राव नहीं होता, इसलिए इन्हें शुष्क अर्श कहते हैं। इन अर्श में त्वचा का आवरण होता है। साधारण अवस्था में जब ये अर्श खाली होते हैं(रक्तरहित) तो गुदा मार्ग के बाहर नहीं दिखते, लेकिन जब दोष कुपित होते हैं एवं अधोमार्ग से दबाव बढ़ता है, जिसके कारण गुदा प्रदेश की सिराओं में रक्त भर जाता है, तब इन सिराओं के किनारे फूलने लगते हैं और नया उभार गुदा मार्ग से बाहर आने लगता है। इन अर्श में जब रक्त भर जाता है तो इनमें जलन, सूजन व दर्द होता है। व्यक्ति को मल त्याग के समय बहुत कष्ट होता है। ये अर्श मल दबाव से बाहर आ जाते हैं। इनकी चिकित्सा न करने पर ये मलद्वार को अवरूद्ध कर देते हैं एवं अन्य बीमारियां उत्पन्न करते हैं।

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3. स्रावी अर्श(खूनी बवासीर) :
इसे आंतरिक अर्श भी कहते हैं। इस अर्श में रोगी को दर्द का एहसास नहीं होता, क्योंकि गुदा के अंदर के अंगों में दर्द महसूस करने वाले नर्व नहीं होते, इसलिए रोगी को खूनी बवासीर होने पर दर्द नहीं होता। इसका सिर्फ एक ही लक्षण है वह है, मलद्वार से रक्त का स्राव होना। इसे ही खूनी बवासीर कहते हैं।

बवासीर के लिए घरेलू उपाय-

Bawaseer Ka Desi Ilaj

1. नीम के कुछ पत्तों को घी में भूनकर उसमें थोड़ा-सा कपूर मिलाकर पीस लें। अब इसे बवासीर के मस्सों पर रोजाना लगायें।

2. आधा चम्मच हरड़ पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में फायदा पहुंचता है।

3. आक के पत्तों से दूध निकाल कर इसमें हल्दी पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाकर इसे मस्सों पर लगायें। कुछ दिन लगातार इस उपाय से मस्से सूखकर गिर जायेंगे।

4. काली मिर्च और जीरा पीसकर पाउडर बना लें। प्रतिदिन आधा चम्मच पाउडर, शहद के साथ लेने से फायदा होगा।

5. लौकी के पत्ते पीसकर मस्सों पर लगायें। इससे कुछ ही दिनों में फायदा देखने को मिलेगा।

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