Bar Bar Pyas Lagne Ki Samasya Ka Desi Ilaj

Bar Bar Pyas Lagne Ki Samasya Ka Desi Ilaj

तृष्णा, प्यास अधिक लगना(Excessive Thirst)

परिचय-

प्यास लगना, शरीर में पानी की आवश्यकता होने पर एक स्वाभाविक आवश्यकता है। इसे रोग नहीं कहते हैं। लेकिन बार-बार पानी पीने पर भी प्यास नहीं बुझती तो इसे रोग माना जाता है। यह एक लक्षण मात्र है जोकि प्रमाणित करता है कि शरीर में वात, पित्त या कफदोष संबंधी कोई विकृति हो गई है। प्यास एक या एक से अधिक दोषों से संबंधित हो सकती है। इनके अतिरिक्त क्षतज एवं क्षयज प्यास के लक्षण भी होते हैं।

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प्यास के प्रकार-

परिचय के अंतर्गत जो चर्चा की गई है उसके आधार पर प्यास के 3 भेद हैं(1. वातज, 2. पित्तज, 3 कफज, 4 क्षतज, 5. क्षयज।)

1. वातज- अदम्य प्यास के साथ चेहरा कान्तिहीन, माथे में पीड़ा, मुँह का स्वाद, विकृत तथा शीतल जल पीने से वमन।

2. पित्तज- अदम्य प्यास के साथ-साथ अन्न में अरूचि, लगातार मुँह सूखना, शीतल जल पीने की इच्छा, प्रलाप, मूच्र्छा(बेहोशी) आदि लक्षण होते हैं।

3. कफज़ प्यास के लक्षण- अदम्य प्यास के साथ नींद आना, शरीर में भारीपन महसूस होना, मुँह का स्वाद मीठा-मीठा होना, शारीरिक क्षय(दुबलापन) आदि लक्षण होते हैं।

4. क्षतज- किसी प्रकार के घाव से शरीर का रक्त निकल जाना है और शरीर में तरल का अभाव हो जाना। पीड़ा के साथ-साथ प्यास लगती है। इस प्रकार की प्यास को क्षतज प्यास कहते हैं। रोगी अनवरत पानी पीकर भी संतुष्ट नहीं होता है। अन्न में भी अरूचि रहती है।

5. क्षयज प्यास के लक्षण- रस क्षय के कारण उत्पन्न प्यास को क्षयज प्यास कहते हैं। इसे सन्निपात प्यास के नाम से भी जाना जाता है। इसमें हृत्पीड़ा, क्षय के कारण हृदय में कंपकंपी, शोष, बहरापन आदि के साथ-साथ अदम्य प्यास लगती है।

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प्राकृतिक चिकित्सा-

Bar Bar Pyas Lagne Ki Samasya Ka Desi Ilaj

1. यदि बार-बार पानी पीने से पेट फूल जाये तो सर्वप्रथम कै करायें।

2. गले तक शीतल जल में शहद मिलाकर पिलाकर कै करायें। इससे पेट फूलना और प्यास दोनों में ही लाभ होगा।

3. यदि प्यास के साथ-साथ मुँह का ज़्ाायका ठीक न हो, स्वाद की अनुभूति नहीं हो, तो खट्टी चीजें और आमलों का चूर्ण खिलाकर कुल्ले करायें।

4. प्यास चाहे किसी भी दोष से लगे पित्तनाशक योगों का प्रयोग अवश्य करें। क्योंकि यदि प्यास लगती है, तो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पित्त का प्रकोप होता है। बिना इसे शांत किये प्यास नहीं मिट पाती है।

5. प्रतिदिन रात को धनिया 25 ग्राम, पानी 250 मि.ली. में भिगो दें। सुबह मल-छानकर उसमें मिश्री 20 ग्राम मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बार-बार पिलाने से लाभ होता है।

6. लोहे या ईंट को आग में तपाकर लाल करके इसे पानी में बुझायें। इस पानी को बार-बार पिलाने से वातज प्यास शांत हो जाती है।

7. गुड़ मिलाकर दही खिलाने से वातज प्यास शांत हो जाती है।

8. गूलर के पके फलों का रस या काढ़ा पीने से पित्तज प्यास शांत हो जाती है।

9. अन्न के पचने पर(भोजन के 2 घण्टे बाद) चावलों का धोवन पीने से पित्तज प्यास शांत हो जाती है।

10. गन्ने(ईख) का रस पीने से पित्तज प्यास नहीं लगती है।

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11. नीम की छाल या पत्तों का काढ़ा गर्म-गर्म पीकर उल्टी करने से कफज प्यास में लाभ होता है।

12. अदरक, जीरा और काला नमक- प्रत्येक 8 ग्राम 2 लीटर पानी में उबालें। आधा पान शेष रहने पर मल-छानकर थोड़ा-थोड़ा पीने से कफज़ प्यास शांत हो जाती है।

13. इमली को पानी में भिगो दें। कुछ देर बाद मल-छानकर इससे कुल्ले करने से मुँह का सूखना में लाभ होता है।

14. अरहर की दाल में यूष में खील और चीनी मिलाकर पीने से कफज़ प्यास शांत होती है।

15. दूध में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से कफज़ प्यास में लाभ होता है।

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