Badi Bawaseer Ka Ilaj

Badi Bawaseer Ka Ilaj

बादी बवासीर का इलाज

Piles, Bawaseer Ka Ilaj, Piles Causes

इसमें गुदाद्वार पर मस्से निकल आते हैं। मलद्वार की नसें फूल जाने से वहाँ की त्वचा सख्त हो जाती है। अंगूर की भाँति एक-दूसरे से जुड़े हुए मस्सों के गुच्छे से उभर आते हैं। इनमें से सुई चुभोने-सी पीड़ा होती है। रोगी का उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। मस्सों में टीस, दर्द, खुजली आदि रोगी को बेचैन कर देती है। कब्ज़, भूख न लगना, पेट में गैस बनना, शरीर दिन-प्रतिदिन कमज़ोर होते जाना आदि कष्ट हो जाते हैं।

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कारण-

इस रोग का मुख्य कारण यकृत विकार है। यदि यकृत की कार्यक्षमता ठीक हो और कब्ज़ नहीं हो, तो इस रोग की होने की संभावना नहीं होती है।

कुपथ्य- उड़द, दही, खटाई, गोभी, पका केला, कटहल, माँस आदि से रोग में वृद्धि होती है। अतः पूर्ण आरोग्य होने तक इनको खाना नहीं चाहिए।

नोट- याद रखें बवासीर के ये मस्से नाक, कान और लिंगाग्र पर भी हो सकते हैं, लेकिन सर्वसाधारण गुदामार्ग के मस्से से ही परिचित होते हैं और उसी को बवासीर के मस्से समझते हैं।

चिकित्सा- यदि बवासीर के मस्से बाहर निकले दिखाई दें तो सेंहुर के दूध में हल्दी का चूर्ण मिलाकर एक बूँद मस्से पर मलने से लाभ हो जाता है।

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घरेलू नुस्खे-

Badi Bawaseer Ka Ilaj

1. छोटी हरड़ को 12 घण्टे तक गोमूत्र में भिगोकर रख दें। 12 घण्टे बाद निकाल कर धो-पोंछकर सुखा कर चूर्ण बना लें। 1-1 चम्मच 2 बार गुड़ के साथ दें।

2. अजवायन चूर्ण 1 ग्राम तथा काला नमक ) ग्राम 2 बार तक्र(मट्ठा) के साथ दें।

3. सूरण(ओल) के ऊपर मिट्टी का लेप करके आग में पका लें। फिर छीलकर उसका भर्ता(चोखा) बनाकर सेंधा नमक, नींबू का रस और तेल मिलाकर दें।

4. मट्ठे का सेवन करायेें।

5. भाँग पीसकर टिकिया बनाकर मस्सों पर बाँधें।

6. सुबह-शाम स्वमूत्र से गुदा का प्रक्षालन करें।

7. अदरक का काढ़ा प्रतिदिन पीने से कफज़ बवासीर ठीक हो जाती है।

8. काले तिलों का चूर्ण, नागकेसर और मिश्री को बराबर-बराबर पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से पित्तज बवासीर में लाभ होता है। सफल योग है।

9. इमली के बीजों की राख 1 से 2 ग्राम दही के साथ खाने से बवासीर का खून आना बंद हो जाता है।

10. जंगली गोभी की तरकारी घी में बनाकर और सेंधा नमक मिलाकर, रोटी के साथ आठ दिन तक लगातार खाने से प्रत्येक प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती है।

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