Acidity Ke Gharelu Upay

Acidity Ke Gharelu Upay

एसिडिटी के घरेलू उपाय

एसिडिटी के कारण, लक्षण और उपचार

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वर्तमान में एसिडिटी की समस्या आम हो चुकी है। अव्यवस्थित एवं अनियमित जीवनशैली और अनुचित खान-पान इसका मुख्य कारण है। आधुनिक चिकित्सा जगत में एसिडिटी को Gastroesophageal Reflux Disease (GERD) के नाम से जाना जाता है।

Acidity Ke Gharelu Upay

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आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। एसिडिटी की समस्या लगातार बनी रहने पर ब्लडप्रेशर, शुगर के साथ ही अगर एसिड ज्यादा मात्रा में बनने लगे तो पेट में छाले तथा फिर छालों से रक्तस्राव भी हो सकता है। आयुर्वेद की मान्यतानुसार सभी बीमारियों का मूल मंदाग्नि(पाचन संबंधित शिकायत) ही है।

एसिडिटी के लक्षण-

1. सीने या छाती में जलन।

2. रह-रहकर मुँह में खट्टा पानी आना।

3. कभी-कभी एसिडिटी की वजह से सीने में दर्द भी हो सकता है। लगातार एसिडिटी होने पर गंभीर समस्या का रूप भी ले सकता है।

4. एसिडिटी होने पर रोगी को लगता है जैसे भोजन करने पर वह उसके गले में ही अटक गया है। कई बार डकार के साथ-साथ भोजन पदार्थ भी मुँह में आ जाता है।

5. रात को सोते समय इस तरह की दिक्कत अधिक होती है।

6. कुछ गंभीर मामलों में मुँह में खट्टे पानी के साथ-साथ खून भी आ सकता है।

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एसिडिटी के कारण-

आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक एसिड तथा पेप्सिन का स्राव होता है। आमतौर पर यह अम्ल तथा पेप्सिन आमाशय और भोजन नली के सम्पर्क में नहीं आते। आमाशय तथा भोजन नली के जुड़ने वाले स्थान पर कुछ विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती हैं, जो अपनी सिकुड़ने की क्षमता से आमाशय व आहार नली का मार्ग बंद रखती हैं। हालांकि कुछ खाने-पीने पर खुल जाती हैं।
जब इन मांसपेशियों में कोई खराबी आ जाती है, तो कई बार ये अपने आप ही खुल जाती हैं और एसिड तथा पेप्सिन भोजन नली में आ जाते हैं। ऐसा बार-बार होने पर आहार नली में सूजन व घाव हो जाते हैं, जिसे हम एसिडिटी कहते हैं।

एसिडिटी से बचाव व उपचार-

1. एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए समय से भोजन करें और भोजन करने के बाद कुछ देर टहलें जरूर।

2. खाने में ताजे फल, सलाद, सब्जियां व इनका सूप शामिल करें।

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3. हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज अधिक से अधिक सेवन करें।

4. खाने को खूब चबा-चबा कर खायें और कोशिश करें भूख से कम ही खायें।

5. मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाले भोजन से परहेज करें।

6. खाने के साथ मट्ठा(छांछ) और ताजी दही का प्रयोग कर सकते हैं।

7. शराब, गुटखा, तंबाकू, मांसाहार से दूर रहें व पानी अधिक पिएं।

8. जंक फूड्स, पिज्जा, बर्गर, पेटिस का सेवन न करें।

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